अर्थतंत्र की खबरें: 5 फीसदी महंगी हुई मांसाहारी थाली, घरेलू भोजन की लागत में उछाल और क्रूड ऑयल की तेजी से सहमा बाजार
क्रिसिल इंटेलिजेंस की मंगलवार को जारी मासिक रिपोर्ट के मुताबिक, प्याज, खाद्य तेल, चावल और रसोई गैस (एलपीजी) की ऊंची कीमतों ने थाली की लागत को ऊंचा बनाए रखा। हालांकि, आलू और टमाटर की कीमतों में गिरावट से कुल बढ़ोतरी सीमित रही।

घरों में बनने वाले भोजन की लागत अगस्त में मामूली रूप से बढ़ गई। शाकाहारी थाली की लागत सालाना आधार पर एक प्रतिशत बढ़कर 29.5 रुपये रही, जबकि मांसाहारी थाली की लागत पांच प्रतिशत बढ़कर 57.5 रुपये हो गई।
क्रिसिल इंटेलिजेंस की मंगलवार को जारी मासिक रिपोर्ट के मुताबिक, प्याज, खाद्य तेल, चावल और रसोई गैस (एलपीजी) की ऊंची कीमतों ने थाली की लागत को ऊंचा बनाए रखा। हालांकि, आलू और टमाटर की कीमतों में गिरावट से कुल बढ़ोतरी सीमित रही।
रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में प्याज की कीमत सालाना आधार पर 43 प्रतिशत बढ़कर 40 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जो एक साल पहले 28 रुपये प्रति किलोग्राम थी। महाराष्ट्र में मार्च-अप्रैल में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से आपूर्ति प्रभावित होने के कारण प्याज की कीमत बढ़ी।
इस दौरान खाद्य तेल की कीमत में 11 प्रतिशत और एलपीजी यानी रसोई गैस की कीमत में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
वहीं, आलू की कीमत 12 प्रतिशत और टमाटर की कीमत 28 प्रतिशत घटने से थाली की लागत में कुल बढ़ोतरी को सीमित करने में मदद मिली। इसके परिणामस्वरूप शाकाहारी थाली की लागत में सालाना और मासिक दोनों आधार पर एक-एक प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी हुई।
मुर्गे के मांस की कीमत में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी के कारण मांसाहारी थाली की लागत सालाना आधार पर पांच प्रतिशत बढ़कर 57.5 रुपये हो गई। हालांकि, जुलाई की 58.3 रुपये की लागत की तुलना में अगस्त में यह एक प्रतिशत कम रही।
कच्चे तेल के दाम में तेजी से शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट, सेंसेक्स 555 अंक लुढ़का
घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार को गिरावट का सिलसिला लगातार दूसरे दिन जारी रहा और दोनों मानक सूचकांक नुकसान में रहे। जहां बीएसई सेंसेक्स 555 अंक लुढ़क गया, वहीं एनएसई निफ्टी 144 अंक टूटा। कच्चे तेल के दाम में तेजी और अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बने रहने से निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित हुई।
आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे प्रमुख शेयरों में बिकवाली से भी बाजार पर दबाव बढ़ा।
तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 555.23 अंक यानी 0.73 प्रतिशत टूटकर 75,577.58 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 579.46 अंक तक लुढ़क गया था। इसी तरह, एनएसई निफ्टी 144.05 अंक यानी 0.61 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,635.10 अंक पर बंद हुआ।
सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, कोटक महिंद्रा बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचडीएफसी बैंक में प्रमुख रूप से गिरावट रही।
दूसरी ओर लाभ में रहने वाले शेयरों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, अदाणी पोर्ट्स, हिंदुस्तान यूनिलीवर और इंटरग्लोब एविएशन शामिल हैं। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 1.45 प्रतिशत बढ़कर 98.36 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
एनरिच मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी पोनमुडी आर ने कहा, ‘‘भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को गिरावट के साथ बंद हुए। कच्चे तेल की ऊंची कीमत और लगातार बनी वैश्विक अनिश्चितता से निवेशकों की धारणा प्रभावित होने के कारण बाजार में गिरावट जारी रही और यह सात सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया। पूरे कारोबारी सत्र के दौरान बिकवाली का दबाव बना रहा।’’
मझोली कंपनियों से जुड़ा मिडकैप सेलेक्ट सूचकांक 0.79 प्रतिशत चढ़ा जबकि छोटी कंपनियों से जुड़ा स्मॉलकैप सेलेक्ट 0.06 प्रतिशत की गिरावट के साथ लगभग स्थिर रहा।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ा
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने से भारत के तेल आयात बिल, रुपये और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड का वायदा भाव दो प्रतिशत से अधिक बढ़कर करीब 99 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) करीब तीन प्रतिशत बढ़कर 94 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक एवं उपभोक्ता देश है तथा अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लंबे समय तक बढ़ोतरी से देश का डॉलर में होने वाला आयात बिल बढ़ने के साथ व्यापार संतुलन और रुपये पर दबाव पड़ सकता है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर ईंधन, परिवहन और अन्य ऊर्जा लागत के जरिये घरेलू महंगाई पर भी पड़ सकता है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम नियोजन एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) के अनुसार, अप्रैल-जुलाई में भारत का कच्चे तेल का आयात बिल 56 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 63.4 अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले की समान अवधि में 40.5 अरब डॉलर था।
पीपीएसी के मुताबिक, भारत के कच्चे तेल के आयात की औसत कीमत सितंबर में औसतन 100.75 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है, जो अगस्त में 90.19 डॉलर और जुलाई में 82.04 डॉलर प्रति बैरल थी। सात सितंबर को इसकी कीमत 106.26 डॉलर प्रति बैरल रही।
पश्चिम एशिया तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से रुपया 28 पैसे टूटकर 94.84 प्रति डॉलर पर
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया मंगलवार को 28 पैसे टूटकर 94.84 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों के 99 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा अरामको के संयंत्रों पर नए हमलों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से भारतीय रुपया कमजोर हुआ। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और घरेलू शेयर बाजार में कमजोर रुख ने भी रुपये पर दबाव डाला।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 94.49 पर खुला। कारोबार के दौरान यह डॉलर के मुकाबले 94.49 के उच्च स्तर तक गया और 94.89 के निचले स्तर तक आया। अंत में रुपया 94.84 रुपये (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा जो पिछले बंद भाव से 28 पैसे की गिरावट है। रुपया सोमवार को 13 पैसे फिसलकर 94.56 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, ‘‘पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की चिंता के कारण हमें रुपये में हल्की कमजोरी का रुख रहने के आसार हैं। वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति भी रुपये पर दबाव डाल सकती है।
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