अर्थतंत्र की खबरें: बैंक, आईटी शेयरों में तेजी से सेंसेक्स और निफ्टी में उछाल और RBI ने ब्याज दरों पर क्या कहा?

सेंसेक्स 174 अंक के लाभ में रहा जबकि एनएसई निफ्टी 42 अंक मजबूत हुआ। बैंक, आईटी और पूंजीगत वस्तुओं से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी से बाजार बढ़त में रहा।

फोटो: IANS
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नवजीवन डेस्क

स्थानीय शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार दूसरे दिन तेजी रही और बीएसई सेंसेक्स 174 अंक के लाभ में रहा जबकि एनएसई निफ्टी 42 अंक मजबूत हुआ। बैंक, आईटी और पूंजीगत वस्तुओं से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी से बाजार बढ़त में रहा।

तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 173.81 अंक यानी 0.21 प्रतिशत चढ़कर 83,450.96 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान सूचकांक ऊंचे में 83,598 अंक तक गया तथा नीचे में 82,987.43 अंक तक आया।

पचास शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 42.65 अंक यानी 0.17 प्रतिशत बढ़कर 25,725.40 अंक पर बंद हुआ।

सेंसेक्स में शामिल शेयरों में आईटीसी, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लि., लार्सन एंड टुब्रो, इन्फोसिस, एशियन पेंट्स, टाइटन, अदाणी पोर्ट्स, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, सन फार्मा, मारुति सुजुकी इंडिया, इंडिगो, भारतीय स्टेट बैंक और टेक महिंद्रा प्रमुख रूप से लाभ में रहे।

दूसरी ओर, नुकसान में रहने वाले शेयरों में इटर्नल, टाटा स्टील, ट्रेंट, रिलायंस इंडस्ट्रीज, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, एक्सिस बैंक, भारती एयरटेल, कोटक महिंद्रा बैंक और हिंदुस्तान यूनिलीवर शामिल हैं।

अधिक शेयरों का प्रतिनिधित्व करने वाले सूचकांकों में भी मजबूती देखी गई। बीएसई स्मॉलकैप सेलेक्ट सूचकांक 0.49 प्रतिशत और मिडकैप सेलेक्ट सूचकांक 0.26 प्रतिशत के लाभ में रहा।

जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘घरेलू बाजारों में सीमित दायरे में कारोबार हुआ। आईटी क्षेत्र में भारी गिरावट के बाद, वैश्विक एआई साझेदारों के साथ रणनीतिक सहयोग की घोषणाओं के बाद चुनिंदा शेयरों में तेजी से खरीदारी देखने को मिली।’’

बीएसई में सूचीबद्ध शेयरों में 2,447 लाभ में रहे, जबकि 1,756 में गिरावट रही। वहीं 149 के भाव अपरिवर्तित रहे।

बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 1,52,688.24 करोड़ रुपये बढ़कर 4,70,11,313.57 करोड़ (5,180 अरब डॉलर) हो गया।

अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया पांच पैसे मजबूत होकर 90.69 पर बंद

रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पांच पैसे मजबूत होकर 90.69 (अस्थायी) पर बंद हुआ। घरेलू शेयर बाजारों में तेजी और विदेशों में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से रुपया बढ़त में रहा।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि विदेशी निवेशकों के लगातार पूंजी निकासी और डॉलर की मजबूती ने रुपया पर दबाव बनाया और इसकी तेजी पर अंकुश लगाया।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.72 पर खुला और सीमित दायरे में रहा। रुपया ऊंचे में 90.64 तक गया और नीचे में 90.78 तक आया।

कारोबार के अंत में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.69 (अस्थायी) पर बंद हुआ, जो पिछले बंद स्तर से पांच पैसे मजबूत है। रुपया सोमवार को आठ पैसे की गिरावट के साथ 90.74 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक, अनुज चौधरी ने कहा कि रुपये में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की पूंजी निकासी और डॉलर की मजबूती के कारण थोड़ी कमजोरी के साथ कारोबार हुआ। हालांकि, घरेलू बाजारों में सकारात्मक रुख और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से गिरावट पर अंकुश लगा।

चौधरी ने कहा, ‘‘निवेशक अब इस सप्ताह अमेरिकी आवास बाजार और जीडीपी आंकड़ों पर नजर रख सकते हैं। डॉलर के मुकाबले रुपये का हाजिर भाव 90.50 रुपये से 91 रुपये के बीच रहने का अनुमान है।’’


जनवरी में घर पर बनी शाकाहारी थाली की कीमत एक प्रतिशत घटी, मांसाहारी थाली का दाम 7 प्रतिशत कम हुआ

घर में बनी शाकाहारी थाली और मांसाहारी थाली की कीमत में जनवरी में सालाना आधार पर कमी देखी गई है। इसकी वजह सब्जियों और दालों की कीमतों में कमी आना है। यह जानकारी मंगलवार को जारी हुई एक रिपोर्ट में दी गई।

क्रिसिल इंटेलिजेंस की एक रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी में शाकाहारी थाली की कीमत में पिछले वर्ष की तुलना में एक प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि मांसाहारी थाली की कीमत में सात प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

शाकाहारी थाली की कीमत में गिरावट का मुख्य कारण प्याज, आलू और दालों की कीमतों में आई भारी कमी थी।

हालांकि, क्रिसिल के नवीनतम मासिक खाद्य लागत संकेतक के अनुसार, टमाटर की कीमतों में वृद्धि ने समग्र राहत को सीमित कर दिया।

रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2025 में टमाटर की कीमत 31 रुपए प्रति किलोग्राम थी, जो जनवरी 2026 में बढ़कर 46 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई, यानी इसमें वार्षिक आधार पर 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

यह वृद्धि इस महीने आवक में 39 प्रतिशत की कमी के कारण हुई, हालांकि यह वृद्धि पिछले वर्ष के कम आधार पर हुई।

इसके विपरीत, प्याज की कीमतों में वार्षिक आधार पर 27 प्रतिशत की गिरावट आई, जिसका कारण अधिक स्टॉक उपलब्धता और निर्यात में कमी थी।

आलू की कीमतों में 23 प्रतिशत की गिरावट आई है क्योंकि पिछली फसल में कम पैदावार के कारण कीमतें बढ़ गई थीं, जिससे उच्च आधार प्रभाव पैदा हुआ था।

वित्त वर्ष 2027 में ब्याज दरें स्थिर रख सकता है आरबीआई: रिपोर्ट

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) वित्त वर्ष 2027 में नीतिगत ब्याज दरों को स्थिर रख सकती है, क्योंकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई में हल्की बढ़ोतरी की संभावना है।

मंगलवार को जारी क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि खाद्य महंगाई सामान्य होने के कारण सीपीआई में बढ़ोतरी हो सकती है, हालांकि कच्चे तेल की कम कीमतों और साल की पहली छमाही में जीएसटी कटौती के लाभ से गैर-खाद्य महंगाई नियंत्रित रह सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक वृद्धि दर सामान्य रुझान के आसपास बनी रहने की उम्मीद है। 2011-12 सीरीज के आधार पर वित्त वर्ष 2027 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

एजेंसी ने कहा कि डिफ्लेटर में संभावित बढ़ोतरी से वास्तविक वृद्धि पर कुछ दबाव पड़ सकता है, लेकिन केंद्र सरकार के पूंजीगत खर्च और निजी निवेश में सुधार के संकेत अर्थव्यवस्था को गति देंगे।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका-भारत व्यापार समझौते से रुपए की स्थिति मजबूत हुई है और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की वापसी के संकेत मिले हैं, और अनुमान है कि मार्च 2027 तक रुपया 89 प्रति डॉलर पर स्थिर हो जाएगा।

16 फरवरी तक एफपीआई ने फरवरी महीने में शुद्ध रूप से 2.8 अरब डॉलर का निवेश किया, जिससे रुपए पर दबाव कम हुआ। रुपया जनवरी के अंत में करीब 92 प्रति डॉलर से मजबूत होकर लगभग 90.7 के स्तर पर आ गया है।

हालांकि नीतिगत दरों में बदलाव की संभावना कम है, लेकिन पहले की गई दर बढ़ोतरी का असर अर्थव्यवस्था में ब्याज दरों पर जारी रहेगा।

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