अर्थतंत्र की खबरें: चौतरफा बिकवाली से सेंसेक्स 1,247 अंक टूटा, निफ्टी पांच महीने के निचले स्तर पर और रुपया हुआ कमजोर

वैश्विक स्तर पर अमेरिकी बॉण्ड पर बढ़ते प्रतिफल और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भी बाजार धारणा कमजोर की। अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड 2.36 प्रतिशत बढ़कर 105.4 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

फाइल फोटोः सोशल मीडिया
i

चौतरफा बिकवाली से सेंसेक्स 1,247 अंक टूटा, निफ्टी पांच महीने के निचले स्तर पर

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिकी बॉण्ड पर बढ़ते प्रतिफल के बीच घरेलू शेयर बाजार में बृहस्पतिवार को चौतरफा बिकवाली से सेंसेक्स 1,247 अंक से अधिक टूटकर तीन महीने से अधिक के निचले स्तर पर बंद हुआ। वित्तीय, धातु, वाहन और पेट्रोलियम शेयरों में भारी गिरावट से बाजार धारणा कमजोर हुई।

बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 1,247.71 अंक यानी 1.67 प्रतिशत गिरकर 73,580.54 अंक पर बंद हुआ। यह सेंसेक्स का आठ जून के बाद सबसे निचला बंद स्तर है। कारोबार के दौरान एक समय यह 1,264.33 अंक फिसलकर 73,563.92 अंक तक आ गया था।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 383.70 अंक यानी 1.64 प्रतिशत गिरकर 23,063.10 अंक पर बंद हुआ। यह पांच महीने से अधिक का निचला स्तर है। निफ्टी के 50 में से 47 शेयर गिरावट में रहे।

सेंसेक्स में शामिल शेयरों में से बजाज फाइनेंस में सबसे अधिक 5.47 प्रतिशत की गिरावट आई। एक्सिस बैंक 4.67 प्रतिशत, बजाज फिनसर्व 4.06 प्रतिशत, इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) 2.78 प्रतिशत, ट्रेंट 2.75 प्रतिशत और महिंद्रा एंड महिंद्रा 2.31 प्रतिशत टूटे। हालांकि, एनटीपीसी का शेयर अपरिवर्तित रहा।

विश्लेषकों के मुताबिक, भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) द्वारा बीमा वितरण व्यवस्था में बदलाव के प्रस्ताव के बाद वित्तीय शेयरों में भारी बिकवाली हुई। प्रस्ताव में प्रबंधन खर्च की सीमा कम करने और कमीशन पर नियंत्रण कड़ा करने की बात कही गई है।

रेलिगेयर ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजित मिश्रा ने कहा कि इन प्रस्तावों से बीमा कंपनियों और संबंधित वित्तीय मध्यस्थों की आय तथा वितरण कारोबार पर असर को लेकर चिंता बढ़ी है।

वैश्विक स्तर पर अमेरिकी बॉण्ड पर बढ़ते प्रतिफल और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भी बाजार धारणा कमजोर की। अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड 2.36 प्रतिशत बढ़कर 105.4 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

अमेरिका के 10 साल के ट्रेजरी बॉण्ड पर प्रतिफल बढ़कर करीब 5.11 प्रतिशत हो गया, जबकि 30 साल के बॉण्ड पर प्रतिफल 2004 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।

रुपया 23 पैसे कमजोर होकर 95.96 प्रति डॉलर पर

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच अमेरिकी मुद्रा के मजबूत होने से रुपया बृहस्पतिवार को 23 पैसे कमजोर होकर 95.96 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, घरेलू शेयर बाजार में भारी बिकवाली से भी रुपये पर दबाव पड़ा। निवेशकों के जोखिम लेने से बचने की धारणा और अमेरिका में महंगाई को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण अमेरिकी बॉण्ड पर प्रतिफल में तेजी आई, जिससे डॉलर को मजबूती मिली।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.84 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान यह 95.98 के निचले स्तर तक पहुंच गया। अंत में रुपया 95.96 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव से 23 पैसे की गिरावट है।

रुपया बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 11 पैसे टूटकर 95.73 पर बंद हुआ था। इससे एक दिन पहले इसमें 16 पैसे की मजबूती आई थी।

चॉइस ब्रोकिंग (जिंस तकनीकी शोध) में जिंस एवं मुद्रा विश्लेषक आमिर मकडा ने कहा कि ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण रुपये में तेज गिरावट आई। उन्होंने कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा आगे भी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद से डॉलर को समर्थन मिला है।

इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर सूचकांक 0.18 प्रतिशत बढ़कर 100.99 पर कारोबार कर रहा था।


हड़ताल से पहले आम लोगों की सुविधा के लिए रविवार को खुले रहेंगे बैंक

आम लोगों की बैंकिंग जरूरतों में व्यवधान को कम करने के लिए सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को रविवार को खुले रखने का निर्देश दिया है। यह फैसला बैंक कर्मचारियों की 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित तीन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल से एक दिन पहले लिया गया है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सभी बैंक शाखाओं, कार्यालयों, एटीएम-लिंक शाखाओं और करेंसी चेस्ट को रविवार को पूरी तरह से चालू रखने की मंजूरी दे दी है।

वित्त मंत्रालय ने कहा कि सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (आरआरबी) रविवार को सामान्य रूप से काम करेंगे।

वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) द्वारा 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित तीन दिवसीय देशव्यापी बैंक हड़ताल को देखते हुए और इससे पहले 26 और 27 सितंबर को सप्ताहांत की छुट्टियां होने के कारण सरकार ने नागरिकों की बैंकिंग जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं।"

इस कदम से हड़ताल के समय के कारण आर्थिक गतिविधियों में होने वाले व्यवधान को कम करने में मदद मिली है। अगर शनिवार और रविवार दोनों दिन बैंक बंद रहते, तो हड़ताल के कारण बैंकिंग गतिविधियां लगातार पांच दिनों तक प्रभावित होतीं।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की यूएफबीयू तथा कुछ अन्य यूनियनों ने पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था लागू करने और परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना वापस लेने की मांग को लेकर हड़ताल का आह्वान किया है। फिलहाल बैंक कर्मचारियों को महीने में दो शनिवार की छुट्टी मिलती है, लेकिन बैंक यूनियनें बाकी दो शनिवार को भी छुट्टी किए जाने की मांग कर रही हैं।

वित्त मंत्रालय ने कहा कि बैंक ग्राहकों का कल्याण और सुविधा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार और बैंक प्रबंधन ने यूनियनों से प्रस्तावित हड़ताल को टालने की अपील की है। साथ ही, आवश्यक बैंकिंग सेवाएं बिना किसी रुकावट के जारी रहें, यह सुनिश्चित करने के लिए भी कदम उठाए गए हैं।

प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल @navjivanindia से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए