अर्थतंत्र की खबरें: कच्चे तेल में उबाल से शेयर बाजार पस्त, सोना-चांदी चमके और रुपया 7 पैसे कमजोर

कच्चे तेल के दाम में तेजी और पश्चिम एशिया संकट के कूटनीतिक समाधान को लेकर उम्मीद कम होने के साथ निवेशकों की धारणा प्रभावित होने से बाजार में गिरावट आई।

फोटोः सोशल मीडिया
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घरेलू शेयर बाजारों में मंगलवार को गिरावट का सिलसिला जारी रहा और दोनों मानक सूचकांक नुकसान में रहे। बीएसई सेंसेक्स 493 अंक टूटा, जबकि निफ्टी में लगातार छठे दिन गिरावट आई और यह 133 अंक और नीचे आ गया।

कच्चे तेल के दाम में तेजी और पश्चिम एशिया संकट के कूटनीतिक समाधान को लेकर उम्मीद कम होने के साथ निवेशकों की धारणा प्रभावित होने से बाजार में गिरावट आई।

तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 492.70 अंक यानी 0.63 प्रतिशत टूटकर 77,235.46 अंक पर बंद हुआ। यह लगातार तीसरा दिन है जब सेंसेक्स में गिरावट आई है।

इसी तरह, 50 शेयरों पर आधारित एनएसई निफ्टी में लगातार छठे कारोबारी सत्र में गिरावट आई और यह 132.75 अंक यानी 0.55 प्रतिशत फिसलकर 24,154.90 अंक पर बंद हुआ।

सेंसेक्स के शेयरों में एशियन पेंट्स, इन्फोसिस, एचसीएल टेक, भारती एयरटेल, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और हिंदुस्तान यूनिलीवर प्रमुख रूप से नुकसान में रहे।

दूसरी तरफ, लाभ में रहने वाले शेयरों में एक्सिस बैंक, पावर ग्रिड, महिंद्रा एंड महिंद्रा और बजाज फाइनेंस शामिल हैं।

मझोली कंपनियों से जुड़ा बीएसई मिडकैप सेलेक्ट सूचकांक 0.46 प्रतिशत नीचे आया जबकि स्मॉलकैप सेलेक्ट 0.24 प्रतिशत चढ़ा।

क्षेत्रवार सूचकांकों में ‘फोकस्ड’ आईटी में सबसे अधिक 1.84 प्रतिशत की गिरावट रही। इसके बाद आईटेक्नोलॉजी रियल्टी में 1.28 प्रतिशत, पीएसयू बैंक में 1.04 प्रतिशत, टिकाऊ उपभोक्ता में 0.81 प्रतिशत, एफएमसीजी (दैनिक उपयोग का सामान बनाने वाली कंपनियों) में 0.67 प्रतिशत तथा धातु और पूंजीगत वस्तुओं में 0.47-0.47 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

मिडस्मॉल प्राइवेट बैंक्स क्वालिटी टिल्ट, मिडस्मॉल प्राइवेट बैंक्स, हॉस्पिटल्स और हेल्थकेयर सूचकांक बढ़त में रहे। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.17 प्रतिशत बढ़कर 91.02 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

सोना 2,000 रुपये चढ़ा, चांदी 730 रुपये मजबूत

राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में मंगलवार को सोने की कीमत 2,000 रुपये बढ़कर 1.58 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। खुदरा विक्रेताओं और स्टॉकिस्ट की ओर से लिवाली बढ़ने के कारण लगातार दूसरे सत्र में सोने की कीमतों में तेजी आई।

99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत सोमवार के 1,56,800 रुपये प्रति 10 ग्राम के बंद भाव से 2,000 रुपये बढ़कर 1,58,800 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) हो गई।

अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, दो सत्रों तक 2,40,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रहने के बाद चांदी की कीमत भी 730 रुपये बढ़कर 2,40,730 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) हो गई।

वैश्विक स्तर पर, हाजिर सोना 0.5 प्रतिशत घटकर 4,394.57 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था और चांदी एक प्रतिशत से कुछ अधिक की गिरावट के साथ 65.08 डॉलर प्रति औंस रह गई।

मिराए एसेट शेयरखान में जिंस प्रमुख प्रवीण सिंह ने कहा कि पश्चिम एशिया से आपूर्ति संबंधी चिंताओं के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच सोना 4,392 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा था।

सोमवार को अमेरिका-ईरान के बीच 60 दिन का संघर्ष-विराम खत्म होने के बाद तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। उन्होंने कहा कि हालांकि इस अवधि को बढ़ाया जा सकता है, लेकिन कोई भी पक्ष ऐसा करने को तैयार नहीं है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहने के कारण ईरान पर अमेरिका का पलड़ा भारी है, जबकि ईरान ने अपनी सेना को स्थिर रहने को कहा है।


रुपया सात पैसे कमजोर होकर 95.68 प्रति डॉलर पर

पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव जारी रहने और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के दबाव में रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सात पैसे कमजोर होकर 95.68 (अस्थायी) के स्तर पर आ गया।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते में देरी, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और डॉलर में व्यापक मजबूती के कारण डॉलर-रुपये की विनिमय दर में निकट अवधि में हल्का नकारात्मक रुख रहने का अनुमान है।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.68 प्रति डॉलर पर खुला और कारोबार के दौरान 95.64 से लेकर 95.69 के दायरे में रहा। कारोबार के अंत में यह 95.68 प्रति डॉलर (अस्थायी) पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव से सात पैसे की गिरावट है। सोमवार को रुपया 19 पैसे टूटकर 95.61 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के शोध प्रमुख सिद्धार्थ खेमका ने कहा, ‘‘ब्रेंट क्रूड की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच जाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने का मुद्दा अनसुलझा रहने से तेल की कीमतें रुपये, मुद्रास्फीति और विदेशी पूंजी प्रवाह के लिए महत्वपूर्ण बनी रहेंगी।’’

उन्होंने कहा कि कमजोर वैश्विक संकेतकों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली ने भी बाजार धारणा को प्रभावित किया। एफआईआई ने सोमवार को तीन सप्ताह में सबसे अधिक 2,535 करोड़ रुपये की बिकवाली की। उन्होंने कहा कि अमेरिका के 10 साल के बॉन्ड पर प्रतिफल भी ऊंचा बना हुआ है।

इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.04 प्रतिशत घटकर 99.60 पर आ गया।