अर्थतंत्र की खबरें: शेयर बाजार लाल निशान में बंद, मेटल और IT शेयरों में गिरावट और लोन-EMI में कोई राहत नहीं!

बाजार पर दबाव बनाने का काम मेटल और आईटी स्टॉक्स ने किया। सूचकांकों में निफ्टी मेटल में 1.60 प्रतिशत और निफ्टी आईटी में 0.99 प्रतिशत की कमजोरी देखी गई।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

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भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के कारोबारी सत्र में लाल निशान में बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 116.67 अंक या 0.16 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 74,243.34 और निफ्टी 49.85 अंक या 0.21 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,366.70 पर था।

बाजार पर दबाव बनाने का काम मेटल और आईटी स्टॉक्स ने किया। सूचकांकों में निफ्टी मेटल में 1.60 प्रतिशत और निफ्टी आईटी में 0.99 प्रतिशत की कमजोरी देखी गई। इसके अलावा निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी ऑयलएंडगैस, निफ्टी पीएसई, निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग और निफ्टी इन्फ्रा लाल निशान में बंद हुआ।

वहीं, निफ्टी मीडिया, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी फार्मा, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी एफएमसीजी और निफ्टी ऑटो हरे निशान में बंद हुए।

सेंसेक्स पैक में एचयूएल, एक्सिस बैंक, अदाणी पोर्ट्स, बजाज फाइनेंस, एशियन पेंट्स, इटरनल, एमएंडएम, आईसीआईसीआई बैंक, टाइटन, सन फार्मा, एलएंडटी, पावर ग्रिड और आईटीसी गेनर्स थे। ट्रेंट, टीसीएस, टाटा स्टील, एनटीपीसी, एचसीएल टेक, भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक, इंडिगो, कोटक महिंद्रा बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट और बजाज फिनसर्व लूजर्स थे।

एसबीआई सिक्योरिटीज के टेक्निकल और फंडामेंटल रिसर्च हेड सुदीप शाह ने कहा कि सत्र के दौरान बेंचमार्क निफ्टी कमजोरी के साथ बंद हुआ। डेली चार्ट पर निफ्टी ने एक छोटी कमजोरी की कैंडल बनाई है, जो दिखाता है कि बाजार में मजबूत दिशात्मक गति का आभाव है।

उन्होंने आगे कहा कि निफ्टी के लिए 23,230-23,200 का जोन एक समर्थन का स्तर है। अगर यह 23,200 के नीचे जाता है तो यह 23,050 के स्तर तक जा सकता है। तेजी की स्थिति में 23,530-23,550 का जोन रुकावट का स्तर होगा। अगर निफ्टी 23,550 को पार करता है तो 23,700 के स्तर तक जा सकता है।

आरबीआई के निवेश नियमों में ढील के बाद डॉलर के मुकाबले 50 पैसे मजबूत हुआ रुपया

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए निवेश नियमों में ढील देने और पूंजी प्रवाह बढ़ाने के उद्देश्य से कई उपायों की घोषणा के बाद शुक्रवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती के साथ कारोबार करता दिखा।

घरेलू मुद्रा रुपया अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में 95.72 के स्तर पर खुला और दिन के कारोबार के दौरान 50 पैसे मजबूत होकर 95.24 प्रति डॉलर पर पहुंच गया।

पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 95.74 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ था।

रुपए में यह तेज मजबूती ऐसे समय आई है जब आरबीआई ने लगातार दूसरी मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रखा और साथ ही निवेश प्रवाह तथा बाजार विश्वास को मजबूत करने के लिए कई कदमों की घोषणा की।

वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने सर्वसम्मति से रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला किया है। साथ ही तटस्थ (न्यूट्रल) नीति रुख भी बनाए रखा गया है।

केंद्रीय बैंक ने अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) और भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों (ओसीआई) के लिए इक्विटी साधनों में निवेश की सीमा बढ़ा दी है। इसके अलावा, सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के निवेश से जुड़े नियमों को भी आसान बनाया गया है।


आरबीआई ने रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर रखा बरकरार, महंगाई और पश्चिम एशिया संकट के बीच अपनाया सतर्क रुख

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने शुक्रवार को अपनी बहुप्रतीक्षित मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला किया। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि छह सदस्यीय समिति ने 3, 4 और 5 जून को हुई बैठक में आर्थिक और वित्तीय परिस्थितियों की विस्तृत समीक्षा के बाद सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया है। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपनी नीति का रुख (पॉलिसी स्टांस) भी 'न्यूट्रल' बनाए रखा है।

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि अप्रैल की पिछली मौद्रिक नीति बैठक के बाद वैश्विक आर्थिक माहौल और चुनौतीपूर्ण हो गया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और नाजुक युद्धविराम की स्थिति के कारण ऊर्जा कीमतों में तेज वृद्धि हुई है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। इसका असर आर्थिक विकास और महंगाई दोनों पर पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि बढ़ती ऊर्जा लागत और आपूर्ति बाधाओं के कारण आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि भारत की अर्थव्यवस्था इन झटकों का सामना करने में सक्षम है और देश की आर्थिक मजबूती को और बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

संजय मल्होत्रा ने बताया कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद खुदरा महंगाई (सीपीआई) अभी आरबीआई के लक्ष्य स्तर से नीचे बनी हुई है। इसका कारण यह है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों का पूरा असर अभी घरेलू बाजारों तक नहीं पहुंचा है। हालांकि आने वाले महीनों में महंगाई बढ़ने की आशंका है और यह आरबीआई की निर्धारित ऊपरी सीमा के करीब पहुंच सकती है।

देश का विदेशी मुद्रा भंडार 93.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 682 अरब डॉलर पर: आरबीआई

देश का विदेशी मुद्रा भंडार 28 मई को समाप्त सप्ताह में 93.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 682.32 अरब डॉलर हो गया। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। इसके एक सप्ताह पहले यह भंडार 7.51 अरब डॉलर घटकर 681.38 अरब डॉलर रह गया था।

इस साल 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 728.49 अरब डॉलर के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। लेकिन पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने और डॉलर के मुकाबले रुपये के दबाव में आने से इस भंडार में कई सप्ताह तक गिरावट दर्ज की गई।

आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, 29 मई को समाप्त सप्ताह में मुद्रा भंडार का प्रमुख हिस्सा विदेशी मुद्रा आस्तियां (एफसीए) 3.12 अरब डॉलर बढ़कर 546.15 अरब डॉलर हो गईं।

डॉलर के संदर्भ में व्यक्त ये विदेशी मुद्रा आस्तियां यूरो, पाउंड और येन जैसी अन्य मुद्राओं के मूल्य परिवर्तन के प्रभाव को भी शामिल करती हैं।

आरबीआई ने कहा कि समीक्षाधीन अवधि में देश का स्वर्ण भंडार 2.18 अरब डॉलर की गिरावट के साथ 112.6 अरब डॉलर रह गया।

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