अर्थतंत्र की खबरें: क्रूड ऑयल में तेजी से डरा शेयर बाजार और इस जन्माष्टमी 40 हजार करोड़ पार जाएगा देश का कारोबार

भारतीय शेयर बाजार गुरुवार के कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 417.49 अंक या 0.55 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 76,152.86 और निफ्टी 41 अंक या 0.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,873.45 पर था।

फाइल फोटोः सोशल मीडिया
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घरेलू शेयर बाजार में बृहस्पतिवार को लगातार चौथे दिन गिरावट आई। कच्चे तेल के दाम में तेजी तथा आईटी शेयरों में बिकवाली से दोनों मानक सूचकांक नुकसान में रहे। बीएसई सेंसेक्स 417 टूटा जबकि एनएसई निफ्टी 41 अंक फिसल गया। कारोबारियों के अनुसार, कारोबार के अंतिम घंटे में मुनाफावसूली से भी बाजार नीचे आया।

तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 417.49 अंक यानी 0.55 प्रतिशत टूटकर 76,152.86 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स बढ़त के साथ खुला और एक समय 354.13 अंक चढ़कर 76,924.48 अंक के उच्च स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, बाद में इसने अपनी बढ़त गंवा दी।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों वाला निफ्टी भी 41 अंक यानी 0.17 प्रतिशत फिसलकर 23,873.45 अंक पर बंद हुआ।

सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में टाइटन, ट्रेंट, आईटीसी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, टेक महिंद्रा, सन फार्मास्युटिकल्स, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, अल्ट्राटेक सीमेंट और बजाज फाइनेंस प्रमुख रूप से नुकसान में रहीं।

दूसरी ओर, लाभ में रहने वाले शेयरों में एक्सिस बैंक, अदाणी पोर्ट्स, एशियन पेंट्स, एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लि. और टाटा स्टील शामिल हैं। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 1.57 प्रतिशत बढ़कर 97.13 डॉलर प्रति बैरल हो गया।

जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लि. के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘कच्चे तेल की कीमतों में तेजी घरेलू बाजार के लिए प्रमुख दबाव का कारक हुआ है।’’

उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर मिले सकारात्मक संकेतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लिवाली के बावजूद लगातार बनी वैश्विक चिंताओं और वैश्विक बॉन्ड प्रतिफल ऊंचा रहने के कारण बाजार में सुधार की कोशिश फीकी पड़ गई।

रुपया 14 पैसे की मजबूती के साथ 94.59 प्रति डॉलर पर

रुपया बृहस्पतिवार को 14 पैसे की मजबूती के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.59 (अस्थायी) पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा जमा में उम्मीद से काफी अधिक राशि जुटने से रुपये को समर्थन मिला। भारतीय रिजर्व बैंक ने एक विशेष कार्यक्रम के तहत एफसीएनआर (बी) यानी विदेशी मुद्रा प्रवासी (बैंक) जमा के जरिये 127.23 अरब डॉलर जुटाए हैं।

आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा में विदेशों से लिए गए कर्ज (ओएफसीबी) और विदेशी वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) सहित इन उपायों के तहत कुल पूंजी प्रवाह 136.377 अरब डॉलर रहा।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 94.30 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान यह 94.26 के ऊंचे स्तर तक गया और 94.59 के निचले स्तर तक आया।

कारोबार के अंत में रुपया बृहस्पतिवार को 94.59 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा, जो पिछले बंद भाव से 14 पैसे की बढ़त है। रुपया बुधवार को 22 पैसे की तेजी के साथ 94.73 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

इससे पहले मंगलवार को रुपया 27 पैसे मजबूत होकर 94.95 प्रति डॉलर पर रहा था। वहीं सोमवार और शुक्रवार को भी रुपये में क्रमश: 21 पैसे और दो पैसे की तेजी दर्ज की गई थी।

मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, ‘‘भारी एफसीएनआर जमा प्रवाह और एफआईआई की खरीदारी से रुपये में तेज मजबूती आई। अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में नरमी तथा येन में तेज मजबूती ने भी रुपये को समर्थन दिया।’’


होर्मुज स्ट्रेट से मालवाहक जहाजों का गुजरना हुआ कम, आईएमएफ चीफ बोलीं- 'विकासशील देशों को होगा ज्यादा नुकसान'

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से बुधवार को केवल छह कमोडिटी जहाज गुजरे। यह संख्या एक दिन पहले के 11 जहाजों के मुकाबले काफी कम है और पिछले 10 दिनों के करीब 13 जहाज प्रतिदिन के औसत से भी नीचे है। इस बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) चीफ क्रिस्टालिना जॉर्जिवा ने इस स्थिति से होने वाले नुकसान की ओर दुनिया का ध्यान दिलाया है।

शिप-ट्रैकिंग कंपनी केप्लर के ताजा आंकड़ों का हवाला देते हुए रॉयटर्स ने बताया कि बुधवार को जलडमरूमध्य से गुजरने वाले छह जहाजों में दो बहुत बड़े गैस कैरियर, दो लॉन्ग-रेंज टैंकर, एक सुप्रामैक्स टैंकर और एक पैनामैक्स टैंकर शामिल थे।

जहाजों की आवाजाही में यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव फिर बढ़ गया है। अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई ने क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग है।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर देशभर में 40 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा व्यापार होने की उम्मीद

देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां जोरों पर है। बड़े पैमाने पर लोग खरीदारी कर रहे हैं। घरों और मंदिरों को सजाया है। जन्माष्टमी सिर्फ आस्था का ही त्योहार नहीं है, बल्कि भारत की 'सनातन अर्थव्यवस्था' का एक जीता-जागता प्रतीक है। इस वर्ष जन्माष्टमी के दौरान देशभर में 40 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा व्यापार होने की उम्मीद की जा रही है।

रक्षाबंधन के दौरान हुए जबरदस्त व्यापार के बाद इस वर्ष श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर देशभर में 40 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा व्यापार होने का अनुमान है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) की ओर से यह अनुमान अलग-अलग सेक्टर में होने वाली संभावित बिक्री, घर और धार्मिक कामों के लिए खरीदारी, मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर होने वाले खर्च, देशभर में बड़े पैमाने पर होने वाले जश्न और धार्मिक पर्यटन से जुड़े खर्चों पर आधारित है।

सीएआईटी के सेक्रेटरी जनरल और भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव सिर्फ भक्ति और आस्था का त्योहार नहीं है, बल्कि यह भारत की संस्कृति, परंपराओं, सामाजिक भागीदारी और आर्थिक गतिविधियों का एक अद्भुत संगम भी है। जन्माष्टमी एक अनोखा त्योहार है जहां आस्था सीधे तौर पर आर्थिक गतिविधियों में बदल जाती है।

भारतीय उत्पादों को ज्यादा प्राथमिकता मिल रही है। जिससे स्थानीय व्यापार, कुटीर उद्योगों, हस्तशिल्प और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को काफी बढ़ावा मिल रहा है। पूजा के सामान से लेकर सजावट और धार्मिक उत्पादों तक, जन्माष्टमी के दौरान स्वदेशी सामान की भारी मांग रहती है। प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि जन्माष्टमी से जुड़ी हर रस्म और जश्न लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा है। किसान, डेयरी उत्पादक, फूल उगाने वाले, मिठाई बनाने वाले, कपड़े के व्यापारी, मूर्तिकार, कारीगर, महिला उद्यमी, ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर, होटल और रेस्टोरेंट के मालिक और कई तरह की सेवाएं देने वाले लोग इस त्योहार से सीधे या परोक्ष रूप से फायदा उठाते हैं।