अर्थतंत्र की खबरें: भारतीय शेयर बाजार ने लगातार 4 दिन की गिरावट का सिलसिला तोड़ा और रुपया भी हुआ मजबूत
अमेरिका में रोजगार के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहने से अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा आक्रामक मौद्रिक रुख अपनाए जाने की आशंका कम हुई है, जिससे उभरते बाजारों में जोखिम लेने की सोच को समर्थन मिला।

मुंबई, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में तेजी से बढ़ोतरी की आशंकाओं में कमी आने के कारण वैश्विक शेयर बाजारों में तेजी आने से भारतीय शेयर बाजार ने लगातार चार दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ते हुए हरे निशान में बंद हुआ। इस दौरान, प्रमुख बेंचमार्कों में 0.66 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई।
इस बीच, बीएसई सेंसेक्स 472.77 अंक यानी 0.66 प्रतिशत बढ़कर 72,382.47 पर पहुंच गया, तो वहीं निफ्टी 50 133.80 अंक यानी 0.60 प्रतिशत बढ़कर 22,555.75 पर बंद हुआ।
निफ्टी50 इंडेक्स में सबसे ज्यादा तेजी आईटीसी में (5 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त) देखने को मिली। इसके बाद, बीएसई और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स (टीएमपीवी), श्रीराम फाइनेंस, बजाज फाइनेंस, भारती एयरटेल, इटरनल, एनटीपीसी और अदाणी पोर्ट्स के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी दर्ज की गई। वहीं इसके विपरीत, एचसीएल टेक, मैक्स हेल्थ, एचडीएफसी बैंक, अपोलो हॉस्पिटल, एशियन पेंट्स, इंफोसिस और सन फार्मा के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप में क्रमशः 0.67 प्रतिशत और 0.47 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
वहीं सेक्टरवार देखें तो, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी एफएमसीजी ने बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी फार्मा ने खराब प्रदर्शन किया।
एक मार्केट एक्सपर्ट ने कहा कि सोमवार को लगातार आठ हफ्तों की गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार में थोड़ी रिकवरी (राहत भरी बढ़त) देखने को मिली।
एक्सपर्ट के अनुसार, इस रिकवरी को कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और कमजोर जॉब्स डेटा के बाद अमेरिका में ब्याज दरों में तेजी से बढ़ोतरी की उम्मीदें कम होने से सहारा मिल रहा है।
हालांकि, दिन के उच्चतम स्तर से आई गिरावट यह बताती है कि निवेशक अभी भी सतर्क हैं, खासकर ऊंचे ग्लोबल बॉन्ड यील्ड, लगातार विदेशी निवेश की निकासी और भू-राजनीतिक जोखिमों को देखते हुए।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया पांच पैसे टूटकर 96.30 पर
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी पूंजी की लगातार निकासी के कारण अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया सोमवार को पांच पैसे की गिरावट के साथ 96.30 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा। कारोबार के दौरान भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले 96 के अहम स्तर के आसपास सीमित दायरे में रही।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि जोखिम लेने की बढ़ती धारणा ने रुपये को सहारा दिया, हालांकि कारोबारी अब विदेशी पूंजी प्रवाह और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आगामी मौद्रिक नीति निर्णय पर नजर बनाए हुए हैं।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 96.20 प्रति डॉलर पर खुला और कारोबार के दौरान फिसलकर 96.31 के निचले स्तर तक आ गया। रुपया कारोबार के अंत में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.30 (अस्थायी) पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले पांच पैसे की गिरावट है।
रुपया बृहस्पतिवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण 96 के स्तर से नीचे लुढ़ककर 96.25 पर बंद हुआ था। ‘गांधी जयंती’ के अवसर पर शुक्रवार को विदेशी मुद्रा बाजार और शेयर बाजार बंद थे।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा, ‘‘जोखिम उठाने की बढ़ती धारणा ने घरेलू मुद्रा को अतिरिक्त समर्थन दिया, हालांकि, अब सभी की निगाहें आरबीआई के मौद्रिक नीति फैसले और विदेशी पूंजी प्रवाह पर टिकी होंगी। आने वाले वक्त में रुपये के अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.95 से 96.50 के बीच रहने की संभावना है।’’
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक शुरू, रेपो दर में 0.25 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन-दिवसीय बैठक सोमवार को शुरू हो गई। इस दौरान पश्चिम एशिया संघर्ष तेज होने से घरेलू मुद्रास्फीति पर जोखिम बढ़ने के बीच नीतिगत रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी का फैसला किया जा सकता है।
एमपीसी बैठक में संभावित फैसलों को लेकर 16 अर्थशास्त्रियों और बैंकर के बीच कराए गए पीटीआई-भाषा के एक सर्वेक्षण के मुताबिक, मौद्रिक नीति समीक्षा के दौरान नीतिगत ब्याज दर में बढ़ोतरी का फैसला नीतिगत रुख में बदलाव को भी दर्शाएगा। आरबीआई ने 2025 में दरों में कटौती शुरू करने के बाद लंबे समय तक अपने मौद्रिक रुख को अपरिवर्तित रखा है।
आरबीआई ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘अंतर्दृष्टि, आकलन और आगे की दिशा जल्द सामने आएगी।’’ इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने बताया कि मौद्रिक नीति वक्तव्य सात अक्टूबर को सुबह 10 बजे जारी किया जाएगा।
आरबीआई ने आखिरी बार फरवरी, 2023 में रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि कर इसे 6.50 प्रतिशत किया था। इसके बाद उसने 2023-24 के दौरान दर को अपरिवर्तित रखा था। फिर 2025 में दरों में कटौती का सिलसिला शुरू हुआ था और रेपो दर फिलहाल 5.25 प्रतिशत पर है।
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