अर्थतंत्र की खबरें: शेयर बाजार में लगातार तीन दिन की गिरावट का सिलसिला टूटा और सोने-चांदी में मिलाजुला कारोबार
शेयर बाजार में पिछले तीन दिन से जारी गिरावट पर बृहस्पतिवार को विराम लगा और मानक सूचकांक बीएसई सेंसेक्स 138 अंक चढ़ गया। वहीं एनएसई निफ्टी 46 अंक के लाभ में रहा। कारोबार के अंतिम घंटे में एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक जैसे प्रमुख शेयरों में लिवाली से बाजार में तेजी आई।

पश्चिम एशिया में जारी लगातार भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारतीय शेयर बाजार लगातार तीन कारोबारी सत्रों की गिरावट का सिलसिला तोड़ते हुए गुरुवार के सत्र में बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ।
इस बीच, बीएसई सेंसेक्स 138.36 अंक यानी 0.19 प्रतिशत बढ़कर 74,902.59 पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 46.30 अंक या 0.20 प्रतिशत बढ़कर 23,477.80 पर पहुंच गया। इस दौरान, करीब 1,802 शेयरों में तेजी, 2,224 शेयरों में गिरावट और 135 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
दिन के शुरुआत में सेंसेक्स अपने पिछले बंद 74,764.23 से 21.69 अंक की मामूली गिरावट के साथ 74,742.54 पर खुला और दिन के कारोबार में एक समय इसने 146.73 अंकों यानी 0.19 प्रतिशत की तेजी के साथ 74,910.96 का उच्चतम स्तर छुआ, जबकि एक समय यह 165.75 अंक यानी 0.22 प्रतिशत फिसलकर 74,598.47 के निम्नतम स्तर पर पहुंच गया था।
वहीं निफ्टी आज अपने पिछले बंद 23,431.50 से मामूली 15 अंक उछलकर 23,446.60 पर खुला। हालांकि दिन के कारोबार में एक समय यह 63.45 अंक यानी 0.27 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,494.95 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जबकि एक समय 51.40 अंक यानी 0.21 प्रतिशत फिसलकर यह 23,380.10 के इंट्रा-डे लो पर पहुंच गया था।
व्यापक बाजारों की बात करें तो, निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप क्रमशः 0.38 प्रतिशत और 0.07 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए।
वहीं, सेक्टरवार देखें तो, निफ्टी मीडिया, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी प्राइवेट बैंक ने बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि निफ्टी मेटल, निफ्टी फार्मा, निफ्टी ऑटो, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी एफएमसीजी का प्रदर्शन खराब रहा।
निफ्टी 50 इंडेक्स में एचसीएल टेक, हिंडाल्को और टाटा स्टील सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाली कंपनियां रहीं, जबकि एचडीएफसी लाइफ, पावरग्रिड, ओएनजीसी, भारतीय एयरटेल और टेक महिंद्रा के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली।
इस बीच, मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें 102 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से ऊपर बनी रहीं।
सोने और चांदी में मिलाजुला कारोबार, अमेरिका के महंगाई डेटा का इंतजार
सोने और चांदी में गुरुवार को मिलाजुला कारोबार हो रहा है, यह दिखाता है कि निवेशक दोनों कीमती धातुओं पर फैसला लेने से पहले अमेरिका के महंगाई के डेटा का इंतजार कर रहे हैं।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अक्टूबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,53,763 रुपए प्रति 10 ग्राम के मुकाबले मामूली कमजोरी के साथ 1,53,581 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला। फिलहाल यह 247 रुपए या 0.16 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,54,010 रुपए पर था।
अब तक के कारोबार में सोना ने 1,53,581 रुपए प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर और 1,54,450 रुपए प्रति 10 ग्राम का उच्चतम स्तर छुआ है। वहीं, चांदी में कमजोरी देखी जा रही है।
चांदी का 4 दिसंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,44,213 रुपए प्रति किलो के मुकाबले 2,43,292 रुपए प्रति किलो पर खुला। फिलहाल यह 523 रुपए या 0.21 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 2,43,690 रुपए प्रति किलो पर था।
अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,42,726 रुपए प्रति किलो का न्यूनतम स्तर और 2,44,300 रुपए प्रति किलो का उच्चतम स्तर छुआ है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी में मिलाजुला कारोबार हो रहा है। कॉमेक्स पर सोना 0.17 प्रतिशत की मामूली तेजी के साथ 4,467 डॉलर प्रति औंस और चांदी 0.60 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 68.2 डॉलर प्रति औंस पर थी। यह दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी दोनों कीमती धातुओं में सीमित दायरे में कारोबार हो रहा है।
एनएसई आईपीओ: इक्विटी ऑप्शंस में घटता मार्केट शेयर, सख्त होते डेरिवेटिव्स नियम और सीमित ग्रोथ के मौके बड़ी चुनौती
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ) ऐसे समय पर बाजार में कदम रखने जा रहा है, जब एक्सचेंज इक्विटी ऑप्शंस में घटते मार्केट शेयर, सख्त होते डेरिवेटिव्स नियम और सीमित ग्रोथ के मौके जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है।
एनएसई की ओर से आरएचपी में दी गई जानकारी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023-24 में इक्विटी ऑप्शंस (प्रीमियम वैल्यू) सेगमेंट में उसका मार्केट शेयर 96.9 प्रतिशत था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में घटकर 87.4 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2025-26 में 74.71 प्रतिशत रह गया है।
इस तरह बीते तीन वित्त वर्षों में इस सेगमेंट में एनएसई का मार्केट शेयर 22.2 प्रतिशत कम हो गया है। हालांकि, अन्य सेगमेंट में एनएसई की पकड़ मजबूत बनी हुई है।
दूसरी तरफ एनएसई का कैश सेगमेंट में मार्केट शेयर लगातार 90 प्रतिशत से ऊपर बना हुआ है, जो सीमित विकास के मौकों को दिखाता है।
एनएसई का मार्केट शेयर इक्विटी कैश सेगमेंट में वित्त वर्ष 2023-24 में 92.7 प्रतिशत, वित्त वर्ष 2024-25 में 93.6 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2025-26 में 92.99 प्रतिशत था।
सरकार की ओर से डेरिवेटिव्स से जुड़े नियमों को सख्त बनाना भी एनएसई के आगे एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। निवेशकों की ओर से लगातार बड़ा नुकसान करने के कारण पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग को कम करने के लिए कुछ सख्त कम उठाए हैं, इसमें सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) में वृद्धि और मार्जिन को कम करना जैसे कदम शामिल हैं। इसके अलावा, बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) भी डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग को लेकर निवेशकों में जागरूकता फैला रहा है।
कच्चे तेल के दाम चढ़ने से रुपया 38 पैसे टूटकर 95.46 प्रति डॉलर पर
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया बृहस्पतिवार को 38 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.46 (अस्थायी) पर रहा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच देश के आयात खर्च को लेकर बढ़ती चिंता से रुपये पर दबाव रहा।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि रुपये पर इस समय विपरीत दबाव है। जुलाई और अगस्त में सकारात्मक प्रवाह के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की बिकवाली फिर शुरू हो गई है और कच्चे तेल की कीमत 102 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ा है।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 95.15 पर खुला। बाद में यह कमजोर होकर 95.46 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले 38 पैसे की गिरावट है।
रुपया बुधवार को 34 पैसे टूटकर 95.08 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
कोटक सिक्योरिटीज के जिंस एवं मुद्रा शोध प्रमुख अनिंद्य बनर्जी ने कहा, ‘‘रुपया फिर से 95.45 के स्तर की ओर कमजोर हुआ है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि यह गिरावट डॉलर के कारण नहीं, बल्कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण है, क्योंकि डॉलर खुद कई महीनों के निचले स्तर पर है।’’
बनर्जी ने कहा कि मुद्रा बाजार में इस समय कई दबावों के बीच संतुलन बना हुआ है। नकारात्मक कारकों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली, 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कच्चे तेल की कीमत और ऊंचा अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल शामिल है।
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