अर्थजगतः चांदी 3 लाख के पार, सोना भी नए रिकॉर्ड स्तर पर और रुपया 14 पैसे टूटा, 90.92 प्रति डॉलर पर बंद हुआ
वैश्विक स्तर पर शुल्क से जुड़ी अनिश्चितताएं बढ़ने और रिलायंस एवं आईसीआईसीआई बैंक में भारी बिकवाली होने से सोमवार को स्थानीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 324 अंक के नुकसान में रहा जबकि निफ्टी 109 अंक टूटा।

चांदी पहुंची 3 लाख के पार, सोना भी नए रिकॉर्ड स्तर पर
चांदी की कीमत सोमवार को 10,000 रुपये की जोरदार उछाल के साथ राष्ट्रीय राजधानी में रिकॉर्ड तीन लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर को पार कर गई जबकि सोना भी 1,900 रुपये उछलकर 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। सोमवार को चांदी का कारोबार 3,02,600 रुपये प्रति किलोग्राम पर हुआ जो तीन लाख रुपये से ऊपर का पहला बंद भाव है। शुक्रवार को चांदी 2,92,600 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। स्थानीय सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में भी मजबूती देखी गई और यह नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई। सोना 1,48,100 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) पर पहुंच गई, जो शुक्रवार के 1,46,200 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से 1,900 रुपये अधिक है।
सर्राफा कारोबारियों ने कहा कि घरेलू और वैश्विक बाजारों में मजबूत मांग के चलते चांदी के दाम में जबर्दस्त तेजी देखी गई। विशेषज्ञों ने कहा कि कीमती धातुओं की मांग में निरंतर वृद्धि और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच निवेशक सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे सोना और चांदी दोनों के दामों में लगातार तेजी दर्ज की जा रही है।
रुपया 14 पैसे टूटकर 90.92 प्रति डॉलर पर बंद
अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया सोमवार को 14 पैसे टूटकर 90.92 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 91 के स्तर को पार कर गया था। वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच विदेशी मुद्रा निकासी में तेजी से घरेलू मुद्रा दबाव में रही। एक महीने में यह दूसरा मौका है जब रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 91 के स्तर के पार गया है।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 90.68 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले 91.01 के स्तर से नीचे चला गया था। अंत में यह डॉलर के मुकाबले 90.92 (अस्थायी) पर बंद हुआ जो पिछले बंद भाव से 14 पैसे कम है। रुपया शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.78 पर बंद हुआ था। इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.23 प्रतिशत की गिरावट के साथ 98.97 पर रहा।
भारी बिकवाली से फिसला शेयर बाजार, सेंसेक्स 324 अंक टूटा
वैश्विक स्तर पर शुल्क से जुड़ी अनिश्चितताएं बढ़ने और रिलायंस एवं आईसीआईसीआई बैंक में भारी बिकवाली होने से सोमवार को स्थानीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 324 अंक के नुकसान में रहा जबकि निफ्टी 109 अंक टूटा। कारोबारियों के मुताबिक, कंपनियों के अपेक्षाकृत कमजोर तिमाही नतीजों, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आने और शेयर बाजार से विदेशी पूंजी की निकासी जारी रहने से भी निवेशक धारणा प्रभावित हुई। बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक सेंसेक्स 324.17 अंक यानी 0.39 प्रतिशत की गिरावट के साथ 83,246.18 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 672.04 अंक तक फिसलकर 82,898.31 पर आ गया था। वहीं, एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 108.85 अंक यानी 0.42 प्रतिशत टूटकर 25,585.50 अंक पर बंद हुआ।
सेंसेक्स के समूह में शामिल कंपनियों में से रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में सर्वाधिक 3.04 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। कंपनी ने तीसरी तिमाही में 18,645 करोड़ रुपये का लगभग स्थिर शुद्ध लाभ दर्ज किया है। गैस उत्पादन में गिरावट और खुदरा कारोबार की कमजोरी ने अन्य क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन को संतुलित कर दिया। इसके अलावा आईसीआईसीआई बैंक के शेयर में भी 2.26 प्रतिशत की गिरावट आई। बैंक का दिसंबर तिमाही का एकीकृत लाभ 2.68 प्रतिशत घटकर 12,537.98 करोड़ रुपये रहा। इसके अलावा टाइटन, अदाणी पोर्ट्स, टीसीएस और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयर भी नुकसान में रहे। दूसरी तरफ, इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो), टेक महिंद्रा, हिंदुस्तान यूनिलीवर और बजाज फाइनेंस के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई।
विप्रो ने 250 से अधिक चयनित युवाओं को अब तक काम पर नहीं रखा
सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों की संस्था एनआईटीईएस ने सोमवार को श्रम मंत्री मनसुख मांडविया को लिखित शिकायत दर्ज कर विप्रो लिमिटेड पर 250 से अधिक नव-चयनित कर्मचारियों को कई महीने बाद भी काम पर नहीं रखने का आरोप लगाया। आईटी कर्मचारियों के निकाय ने एक बयान में कहा कि केंद्र सरकार से मामले में हस्तक्षेप करने और विप्रो से स्पष्ट जवाब तलब करने का आग्रह किया गया है। इसमें यह भी कहा गया है कि कंपनी को सभी प्रभावित उम्मीदवारों को स्पष्ट लिखित जानकारी देनी चाहिए, चाहे वह नियुक्ति की निश्चित तारीख की पुष्टि हो या कारण सहित समापन।
एनआईटीईएस की शिकायत में कहा गया है कि प्रभावित उम्मीदवार विभिन्न राज्यों में विप्रो की तरफ से संचालित 'टर्बो' और 'नेक्स्टजेन टैलेंट हायरिंग' कार्यक्रम के तहत चयनित किए गए थे।शिकायत के मुताबिक, इन उम्मीदवारों को मई, 2025 में चयन की पुष्टि करने वाले आशय पत्र जारी किए गए थे जिनमें पद, वेतन और नौकरी शुरू करने से संबंधित प्रक्रिया का विवरण था।कई मामलों में कंपनी ने औपचारिक ऑनबोर्डिंग सूचना भी भेजी थी जिसमें नौकरी शुरू करने की तारीख, कार्य स्थान और दस्तावेज पूरा करने की प्रक्रिया शामिल थी। इसके बावजूद, उम्मीदवारों को निर्धारित समय पर शामिल नहीं किया गया, जबकि उन्होंने पृष्ठभूमि सत्यापन समेत सभी शर्तें पूरी कर ली थीं।
एनआईटीईएस ने कहा, "उम्मीदवारों को लंबे समय तक अनिश्चित प्रतीक्षा, सामान्य जवाब और बदलती व्याख्याओं के बीच छोड़ा गया। कई उम्मीदवारों को कॉलेज परिसर भर्ती नियमों के कारण अन्य नौकरी के अवसर स्वीकार करने से रोक दिया गया, जबकि कई युवाओं ने इस दौरान दूसरी नौकरी की पेशकश ठुकरा दी।" कर्मचारी संगठन के मुताबिक, कंपनी की तरफ से कोई जवाब न आने का नतीजा यह हुआ कि कई उम्मीदवार छह से आठ महीने तक बेरोजगार रहे हैं जिससे उन पर वित्तीय दबाव और मानसिक तनाव बढ़ा। संस्था ने अपने पत्र में चयनित उम्मीदवारों को अनिश्चितकाल तक रोककर अन्य उम्मीदवारों को काम पर रखने को 'अन्यायपूर्ण भर्ती प्रथा और सेवा में कमी' बताया है। एनआईटीईएस ने कहा कि यदि इस मामले में सरकार के स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आईटी उद्योग में सामान्य प्रथा बन सकती है और भारत के युवा कार्यबल को दीर्घकालिक नुकसान पहुंचा सकती है।
चीन की अर्थव्यवस्था 2025 में पांच प्रतिशत की वृद्धि दर से बढ़ी
चीन की अर्थव्यवस्था 2025 में मजबूत निर्यात के दम पर पांच प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ी।सरकार ने सोमवार को बताया कि साल की आखिरी तिमाही में हालांकि वृद्धि दर धीमी होकर 4.5 प्रतिशत रह गई। कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान 2022 के अंत के बाद से यह सबसे धीमी तिमाही वृद्धि थी। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था पिछली तिमाही में 4.8 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ी थी।
चीन के नेता संपत्ति बाजार में आई मंदी और वैश्विक महामारी के कारण अर्थव्यवस्था में आए व्यवधानों के बाद अर्थव्यवस्था को और अधिक गति देने के प्रयास कर रहे हैं। मजबूत निर्यात ने कमजोर उपभोक्ता खर्च और व्यावसायिक निवेश की भरपाई करने में मदद की जिससे 1200 अरब अमेरिकी डॉलर का रिकॉर्ड व्यापार अधिशेष प्राप्त हुआ। उम्मीद के मुताबिक, पिछले वर्ष की वार्षिक वृद्धि सरकार के ‘‘करीब पांच प्रतिशत’’ के आधिकारिक लक्ष्य के अनुरूप रही।
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