अर्थजगतः शेयर बाजार में फिर बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 1,342 अंक टूटा और निवेशकों के 3 लाख करोड़ रुपए डूबे

पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण भारत में रसोई गैस (एलपीजी) की आपूर्ति को लेकर पैदा हुए संकट के बीच बिजली के चूल्हों (इंडक्शन) और इलेक्ट्रिक केतली की बिक्री में भारी उछाल आया है। इस मांग से इंडक्शन चूल्हा बनाने वाली कंपनियों के शेयर में भी तेजी देखी गई।

शेयर बाजार में फिर बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 1,342 अंक टूटा और निवेशकों के 3 लाख करोड़ रुपए डूबे
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नवजीवन डेस्क

शेयर बाजार में फिर बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 1,342 अंक टूटा

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच कच्चे तेल के दाम में तेजी से एक बार फिर बुधवार को भारतीय शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट आई और बीएसई सेंसेक्स 1,342 अंक गिर गया जबकि एनएसई निफ्टी 24,000 अंक के नीचे आ गया। शेयर बाजार में एक दिन की बढ़त के बाद यह गिरावट आई। कारोबारियों ने कहा कि इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों की पूंजी निकासी और प्रमुख बैंकों के शेयरों में बिकवाली दबाव से भी बाजार नुकसान में रहा।

तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 1,342.27 अंक यानी 1.72 प्रतिशत लुढ़क कर 76,863.71 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान इसमें 1,446.72 अंक तक की गिरावट आई थी। बीएसई में सूचीबद्ध 2,380 शेयरों में गिरावट आई जबकि 1,881 शेयर लाभ में रहे। वहीं 153 शेयर के भाव अपरिवर्तित रहे। पचास शेयरों पर आधारित एनएसई निफ्टी 394.75 अंक यानी 1.63 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,866.85 अंक पर बंद हुआ।

रेलिगेयर ब्रोकिंग लि. के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजित मिश्रा ने कहा, ‘‘पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है और उतार-चढ़ाव भी बढ़ा है, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर बना हुआ है।’’ उन्होंन कहा, ‘‘कच्चे तेल की आपूर्ति में प्रभावित होने की आशंका, बढ़ती मुद्रास्फीति और आर्थिक वृद्धि पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर चिंताएं निवेशकों को सतर्क बनाए हुए हैं। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा लगातार बिकवाली और रुपये में कमजोर रुख ने जोखिम लेने की प्रवृत्ति को और कम कर दिया है।’’

शेयर बाजार में गिरावट से निवेशकों के 3 लाख करोड़ रुपए डूबे

मध्य-पूर्व संकट के कारण बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट के कारण निवेशकों की संपत्ति को बड़ा झटका लगा। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन पिछले सत्र के लगभग 447 लाख करोड़ रुपए से घटकर करीब 442 लाख करोड़ रुपए रह गया। यानी एक ही दिन में निवेशकों को लगभग 3 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। आज इंट्राडे कारोबार में सेंसेक्स 1,396 अंक तक गिरकर 76,810.14 के निचले स्तर तक पहुंच गया, जबकि निफ्टी50 करीब 407 अंक गिरकर 23,854.35 तक लुढ़क गया। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी 1.5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।

वैश्विक बाजारों की बात करें तो, मध्य-पूर्व में जारी सैन्य कार्रवाई के बीच जहाजों पर हमले की खबरों के बाद तेल की कीमतों में फिर तेजी देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड करीब 1.8 प्रतिशत बढ़कर 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जबकि इससे पहले पिछले सत्र में इसमें लगभग 11 प्रतिशत की गिरावट आई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और युद्ध से जुड़ी अनिश्चितता फिलहाल वैश्विक वित्तीय बाजारों को प्रभावित करती रहेगी, क्योंकि लंबे समय तक संघर्ष जारी रहने पर तेल और प्राकृतिक गैस की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।


LPG संकट के बीच बिजली के चूल्हे, केतली की बिक्री बढ़ी

पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण भारत में रसोई गैस (एलपीजी) की आपूर्ति को लेकर पैदा हुए संकट के बीच बिजली के चूल्हों (इंडक्शन) और इलेक्ट्रिक केतली की बिक्री में भारी उछाल आया है। उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने यह जानकारी दी है। टाटा समूह की कंपनी क्रोमा ने पिछले कुछ दिनों में चूल्हों की मांग में तीन गुना वृद्धि दर्ज की है, जबकि 'पिजन' ब्रांड बनाने वाली कंपनी स्टोवक्राफ्ट लिमिटेड की औसत साप्ताहिक ऑनलाइन बिक्री चार गुना बढ़ गई है।

इन्फिनिटी रिटेल लिमिटेड (क्रोमा) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) और एमडी शिबाशीष रॉय ने कहा, ‘‘पिछले कुछ दिन में बिजली के चूल्हों की मांग में अचानक तेजी आई है और हमारी औसत दैनिक बिक्री दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।’’ रॉय ने सटीक आंकड़े बताए बिना कहा कि चूल्हों की औसत दैनिक बिक्री सामान्य स्तर से लगभग तीन गुना बढ़ गई है।उन्होंने कहा, ‘‘ग्राहक एक बार में कई चूल्हे खरीद रहे हैं, जो पहले सामान्य नहीं था। यह एहतियाती खरीदारी का संकेत है।’’ इसके साथ ही इलेक्ट्रिक केतली की मांग भी सामान्य से लगभग दोगुनी हो गई है।

वहीं, अमेजन इंडिया के प्रवक्ता ने बताया कि पिछले दो दिन में इंडक्शन चूल्हों की बिक्री 30 गुना बढ़ गई है, जबकि चावल पकाने वाला कुकर (राइस कुकर) और इलेक्ट्रिक प्रेशर कुकर की बिक्री में चार गुना उछाल आया है। एयर फ्रायर और इलेक्ट्रिक केतली की बिक्री भी दोगुनी हो गई है। प्रवक्ता ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और बेंगलुरु के कुछ हिस्सों में ग्राहक 'अमेजन नाउ' के जरिये कुछ ही मिनट में ये चूल्हे और अन्य उत्पाद प्राप्त कर रहे हैं।

स्टोवक्राफ्ट के प्रबंध निदेशक राजेंद्र गांधी ने भी कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव शुरू होने के बाद से ऑनलाइन बिक्री मंच पर बिजली के चूल्हों की औसत साप्ताहिक बिक्री में चार गुना का उछाल आया है। कंपनी वर्तमान में कर्नाटक के हारोहल्ली स्थित अपने संयंत्र में प्रति माह लगभग दो लाख चूल्हे बनाती है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारी योजना आगामी वित्त वर्ष में चूल्हों की उत्पादन क्षमता को और बढ़ाने की है।’’ कंपनी को उम्मीद है कि उपभोक्ता भविष्य में भी ऊर्जा-कुशल और वैकल्पिक चूल्हों को प्राथमिकता देना जारी रखेंगे।

कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के नीचे लुढ़की

कच्चे तेल की कीमत में बुधवार को गिरावट देखने को मिली और यह 90 डॉलर प्रति बैरल के नीचे फिसल गया है। इसकी वजह आईईए द्वारा इमरजेंसी रिजर्व जारी कर कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाने के प्रस्ताव को माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी-ईरान युद्ध के बाद बढ़ी हुई कच्चे तेल की कीमतों को कम करने के लिए इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) इमरजेंसी रिजर्व से कच्चे तेल की आपूर्ति पर विचार कर रहा है। कई रिपोर्ट्स के अनुसार, इमरजेंसी रिजर्व से प्रस्तावित आपूर्ति 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण के बाद दो चरणों में जारी किए गए 182 मिलियन बैरल से अधिक होगी। जी7 देशों ने आईईए से इस तरह के कदम के लिए तैयार रहने का अनुरोध किया है। इन रिपोर्ट्स के बाद ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 0.99 प्रतिशत गिरकर 86.93 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) वायदा 0.75 प्रतिशत गिरकर 82.82 डॉलर हो गया।

हाल के दिन में होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के कारण ब्रेंट क्रूड में करीब 50 प्रतिशत तक की तेजी देखी गई थी और यह 119 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया था। होर्मुज जलडमरूमध्य, मध्य पूर्व में प्रमुख समुद्री व्यापारिक मार्ग पर स्थित एक संकरा रास्ता है, जिससे दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल होकर जाता है। कच्चे तेल में गिरावट की एक वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान को माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने कहा कि अमेरिका का ईरान के साथ युद्ध जल्द समाप्त हो सकता है। हालांकि, अमेरिका-ईरान युद्ध दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और समाधान के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं।


एलपीजी संकट के बीच भागे इंडक्शन चूल्हा बनाने वाली कंपनियों के शेयर

मध्य पूर्व में तनाव के चलते एलपीजी की कमी की रिपोर्ट्स के बाद देश में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर इलेक्ट्रिक इंडक्शन चूल्हे की मांग में तेजी देखी जा रही है और इससे बुधवार को होम अप्लायंसेज बनाने वाली कंपनियों के शेयर में तेजी देखी गई। बटरफ्लाई गांधीमथी अप्लायंसेज के शेयर इंट्राडे में दोपहर 12:45 पर 7.93 प्रतिशत की तेजी के साथ 651 रुपए पर था। दिन के दौरान शेयर ने 660 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ। टीटीके प्रेस्टीज का शेयर 9.40 प्रतिशत की तेजी के साथ 530 रुपए पर था। अब तक के कारोबार में इसने 556 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ है। पिजन नाम से प्रोडक्ट्स बेचने वाली कंपनी स्टोव क्राफ्ट का शेयर 5.05 प्रतिशत की तेजी के साथ 510 रुपए पर था। अब तक के कारोबार में शेयर ने 525 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ है।

दूसरी तरफ, इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि एलपीजी संकट के देखते हुए शहरी परिवारों को इलेक्ट्रिक इंडक्शन स्टोव से खाना पकाने के लिए प्रोत्साहित और प्रेरित किया जाना चाहिए। सीईईडब्ल्यू के फेलो अभिषेक कार ने कहा कि भारत अपनी एलपीजी का लगभग दो-तिहाई हिस्सा आयात करता है, जिसमें से 90 प्रतिशत से अधिक पश्चिम एशियाई देशों जैसे यूएई, कतर और सऊदी अरब से आता है। कर ने सुझाव दिया, "घरेलू खाना पकाने के लिए एलपीजी आपूर्ति को प्राथमिकता देने हेतु आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू करना पहला, लेकिन एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार को अब एलपीजी सब्सिडी के लिए चलाए गए 'गिव इट अप' अभियान की तर्ज पर एलपीजी उपयोग पर एक नया 'गिव इट अप' अभियान शुरू करना चाहिए, जो उन परिवारों को टारगेट करे जिनके पास इलेक्ट्रिक इंडक्शन स्टोव हैं या जो इसे वहन कर सकते हैं। इससे घरेलू एलपीजी की मांग पर दबाव कम होगा।"

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