अर्थतंत्र की 5 बड़ी खबरें: 'लॉकडाउन से गोवा पर्यटन को 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान' और प्याज के दाम पर लगी लगाम

देशभर में लगाए गए लॉकडाउन का प्रतिकूल प्रभाव लगभग सभी स्तरों पर पड़ा है। गोवा भी इससे अछूता नहीं रहा है। लॉकडाउन के चलते यहां के पर्यटन उद्योग को 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।

फोटो: सोशल मीडिया
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विनय कुमार

प्याज के भंडारण की सीमा निर्धारित होने से आसमान छूते दाम पर तत्काल लगाम लग गई है, लेकिन उपभोक्ता को सस्ता प्याज तभी मिल पाएगा, जब घरेलू उत्पाद की आवक बढ़ेगी, क्योंकि आयातित प्याज भी ऊंचे भाव पर ही आ रहा है। हालांकि, भाव ऊंचा होने से आयात धीरे-धीरे जोर पकड़ता जा रहा है। कारोबारियों से मिली जानकारी के अनुसार, नवंबर के पहले सप्ताह में 8000 टन आयातित प्याज भारत पहुंचेगा। केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों और विदेशी प्याज के घरेलू बाजार में उतरने से प्याज की महंगाई पर लगाम लगी है और अगले महीने कीमतों में कुछ और नरमी की उम्मीद की जा रही है, हालांकि कारोबारी बताते हैं कि विदेशों से जो प्याज आ रहा है उसकी लागत 40 रुपये प्रति किलो से उपर पड़ रही है, ऐसे में उपभोक्ताओं को बहुत राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।

मुंबई के कारोबारी और हॉर्टिकल्चर प्रोड्यूस एक्सपोटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजित शाह ने आईएएनएस को बताया, "प्याज आयात की लागत इस समय 40 रुपये प्रति रुपये किलो से उपर आ रही है। इस भाव पर आयात अभी बढ़ेगा, क्योंकि देश के किसानों को भी फिलहाल आयात से कोई नुकसान नहीं है। अगर, प्याज का आयात नहीं होता तो दाम और बढ़ जाता क्योंकि घरेलू आपूर्ति का टोटा बना हुआ है।"

अजित शाह ने बताया, "देशभर में इस समय अच्छी क्वालिटी के प्याज का थोक भाव करीब 55 रुपये से 65 रुपये प्रति किलो चल रहा है। अगले महीने के पहले सप्ताह में करीब 8000 टन प्याज विदेशों से आने वाला है। भारत इस समय ईरान, हॉलैंड, मिश्र और टर्की से प्याज मंगा रहा है। इसके अलावा, अफगानिस्तान से पंजाब के रास्ते प्याज आ रहा है।"

उधर, बाजार सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, प्याज का भाव उंचा होने से किसान खेतों से अपनी फसल समय से पहले निकालने लगे हैं जिससे नवंबर में घरेलू आवक भी बढ़ जाएगी।

एशिया में फलों और सब्जियों की सबसे बड़ी मंडी में शुमार दिल्ली की आजादपुर मंडी स्थित कृषि उपज विपणन समिति यानी एपीएमसी की कीमत सूची के अनुसार, "मंगलवार को लगातार तीसरे दिन प्याज का थोक भाव 12.50 रुपये 35 रुपये प्रति किलो पर स्थिर रहा। इससे पहले 22 अक्टूबर को आजादपुर मंडी में प्याज का भाव 40 रुपये प्रति किलो तक चला गया था, लेकिन 23 अक्टूबर को केंद्र सरकार द्वारा प्याज भंडारण की सीमा तय करने के बाद कीमत में थोड़ी नरमी आई है। हालांकि देश की राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाके में प्याज का खुदरा भाव अभी भी 70 रुपये से 90 रुपये प्रति किलो है।"

हालांकि, आजादपुर मंडी पोटैटो ऑनियन मर्चेंट एसोसिएशन यानी पोमा के जनरल सेक्रेटरी राजेंद्र शर्मा का कहना है कि प्याज के दाम में नरमी तभी आएगी, जब घरेलू आवक बढ़ेगी। सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से कीमतों में हो रही वृद्धि थम गई है, लेकिन अभी भाव घटा नहीं है। इस समय आयातित पीला प्याज 40 रुपये से 45 रुपये प्रति किलो जबकि लाल प्याज 50 रुपये से 55 रुपये प्रति किलो थोक में बिक रहा है।"

महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई प्याज उत्पादक जिलों में भारी वर्षा के चलते प्याज की खरीफ फसल खराब हो जाने से देश में प्याज की कीमतों में हो रही वृद्धि को देखते हुए केंद्र सरकार ने पहले 14 सितंबर को प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया। उसके बाद 23 अक्टूबर को प्याज भंडारण की सीमा तय कर दी गई। इस सीमा के मुताबिक 31 दिसंबर तक थोक विक्रेता के लिए अधिकतम 25 टन और खुदरा विक्रेता अधिकतम दो टन प्याज का स्टॉक रखने की इजाजत दी गई है।

केंद्र सरकार ने कहा कि आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम, 2020 में यह प्रावधान है कि कुछ खास परिस्थितियों में जब कीमतें सामान्य से ज्यादा बढ़ जाएं तो सरकार स्टॉक लिमिट लगा सकती है।

केंद्र सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, देश में प्याज की औसत खुदरा कीमतों में 21 अक्टूबर तक विविधता देखी गई है जो कि पिछले साल की तुलना में 22.12 प्रतिशत (45.33 रूपए से 55.60 रूपए प्रति किलो) और पिछले पांच सालों की तुलना में 114.16 प्रतिशत (25.87 से 55.60 रूपए प्रति किलो) रही है। इस तरह पिछले पांच साल की कीमतों से तुलना में प्याज की कीमतों में 100 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है और आवश्यक वस्तु अधिनियम के मुताबिक ये कीमतों में वृद्धि को छू गई है। इसलिए प्याज पर आज से स्टॉक लिमिट लगाई गई है।

इसके अलावा, नेफेड के पास पड़े बफर स्टॉक से भी प्याज निकाला जा रहा है। नेफेड ने बीते फसल वर्ष में एक लाख टन प्याज का बफर स्टॉक रखा था, लेकिन बताया जा रहा है कि उसमें से करीब 25 फीसदी प्याज खराब हो गया।

रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर के दूसरे हफ्ते से प्याज को देश की बड़ी मंडियों के साथ-साथ खुदरा वितरण केंद्रों जैसे सफल, केंद्रीय भंडार, एनसीसीएफ, टीएएनएचओडीए एवं टीएएनएफईडी (तमिलनाडु सरकार), और बड़े शहरों में और राज्यों में एनएएफईडी केंद्रों तक तेजी से पहुंचाया जा रहा है।

प्याज के आयात के लिए निजी आयातकों को बढ़ावा देने के लिए यह भी तय किया गया कि एमएमटीसी लाल प्याज का आयात करेगा, ताकि आपूर्ति में आ रही कमी को पूरा किया जा सके।

'लॉकडाउन से गोवा पर्यटन को 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान'

देशभर में लगाए गए लॉकडाउन का प्रतिकूल प्रभाव लगभग सभी स्तरों पर पड़ा है। गोवा भी इससे अछूता नहीं रहा है। लॉकडाउन के चलते यहां के पर्यटन उद्योग को 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। गोवा में चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष मनोज काकुलो ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी और साथ ही राजस्व की कमी को पूरा करने व अधिक रोजगार सृजन के लिए राज्य सरकार से तत्काल प्रभाव से खनन कार्यो को शुरू करने की अपील की।

काकुलो ने यहां अपने एक बयान में कहा, "विभिन्न एजेंसियों द्वारा यह अनुमान लगाया गया है कि राज्य का पर्यटन उद्योग यहां के लिए राजस्व कमाने का सबसे बड़ा स्रोत है। लॉकडाउन के चलते इसे 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।"

काकुलो ने गोवा में खनन गतिविधियों को फिर से शुरू करने के लिए मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा उठाए गए 'सक्रिय कदम' का स्वागत किया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय खान मंत्री प्रह्लाद जोशी संग बैठकें शामिल हैं।

उन्होंने आगे कहा, "खनन गतिविधियों के पुन: संचालन से रॉयल्टी और करों के रूप में राज कोष में वृद्धि होगी, जिसकी अभी बहुत ज्यादा जरूरत है और साथ ही महामारी की इस चुनौतीपूर्ण घड़ी में गोवा के हजारों निवासियों को आजीविका का एक अहम स्रोत भी प्राप्त होगा।"

काइनेटिक ग्रीन ने 500 केजी ईवी कार्गो कैरियर लॉन्च किया, कीमत 2.5 लाख रुपये

इलेक्ट्रिक व्हीकल मेकर काइनेटिक ग्रीन एनर्जी एंड पावर सॉल्यूशंस लिमिटेड ने एक कार्गो थ्री व्हीलर कैरियर लॉन्च किया है, जिसकी पेलोड क्षमता 500 केजी है और इसकी कीमत 2.5 लाख रुपये रखी गई है। कम्पनी के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि नए थ्री व्हीलर को खासतौर पर ई-कॉमर्स और ऑनलाइन ग्रॉसरी कम्पनियों की मांग को ध्यान में रखते हुए लॉन्च किया गया है।

काइनेटिक ग्रीन एनर्जी एंड पावर सॉल्यूशंस लिमिटेड की संस्थापिका और सीईओ सुलज्जा फिरोजिया मोटवानी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडियाकर्मियों से कहा, "मौजूदा समय में घरों तक डिलिविरी का काम डीजल से चलने वाले थ्री व्हीलर्स या फिर लाइट कॉमर्शियल व्हीक्ल्स से की जा रही है। लेकिन हालात बदल रहे हैं और हमारे शोध के मुताबिक अब ई-कॉमर्स कम्पनियां लॉजिस्टिक्स के लिए इलेक्ट्रिक गाड़ियां खोज रही हैं।"

कम्पनी ने अपने नए थ्री व्हीलर को काइनेटिक सफर जम्बो नाम दिया है और यह वन टन ग्रास व्हीकल वेट (जीवीडब्ल्यू) मॉडल है।

मोटवानी ने कहा कि यह 500 किलोग्राम तक वजन वहन कर सकता है और फ्लेम 2 स्टेडी के बाद इसकी कीमत 2.5 लाख रुपये तय की गई है।

मोटवानी ने कहा कि जम्बो स्टील से पूरी तरह कवर किए गए बॉडी से लैस है और यह किसी भी प्रकार के कार्गो को कैरी कर सकता है।

मारुती सुजुकी ने 5 सालों में बेचे 8 लाख बलेनो

वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने घोषणा की है कि उसने पांच सालों के दौरान आठ लाख से ज्यादा प्रीमियम हैचबैक बलेनो की बिक्री की है। हैचबैक बलेनो को भारत में 2015 में पेश किया गया था।

इस कार में कंपनी बीएस6 कंम्पलाइंट 1.2 लीटर डुअल जेट डुअल वीवीटी इंजन का प्रयोग करती है।

मारुति सुजुकी इंडिया के कार्यकारी निदेशक (विपणन एवं बिक्री) शशांक श्रीवास्तव ने कहा, "बलेनो ने हमें मारुति सुजुकी परिवार में नए ग्राहकों को लाने में मदद की।"

उन्होंने कहा, "5 साल की छोटी अवधि के दौरान बलेनों के 8 लाख प्रसन्न ग्राहकों को परिवार में शामिल होना एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।"

फेस्टिव सेल के दौरान हर मिनट बिके 1.5 करोड़ रुपये के फोन

एक बार फिर स्मार्टफोन्स ने किफायती कीमतों और नए लॉन्च हुए मॉडलों के कारण 7 दिन की अवधि (15-21 अक्टूबर) में कुल फेस्टिव सेल के 47 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा जमाया। बेंगलुरु स्थित मार्केट रिसर्च फर्म रेडसीर के अनुसार, फेस्टिव सेल के पहले सप्ताह में ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों पर हर मिनट 1.5 करोड़ रुपये मूल्य के स्मार्टफोन बेचे गए।

रेडसीर कंसल्टिंग के निदेशक मृगांक गुटगुटिया ने कहा, "कई पहलुओं में यह वास्तव में भारतीय ई-कामर्स के लिए एक फेस्टिवल ऑफ फर्स्ट है जो इसके भविष्य के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगा।"

पिछले साल की तरह फैशन श्रेणी को इस बार में सेल में बड़ा योगदान नहीं रहा, इसकी सेल 14 फीसदी ही रही। रिपोर्ट में कहा गया है, "घर और होम फर्निशिंग्स वाली श्रेणियों में नतीजे अच्छे रहे। इसमें वर्क-फ्रॉम-होम और स्टडी-फ्रॉम-होम के लिए बुनियादी चीजों की मांग ज्यादा रही।"

फोन को लेकर बात करें तो स्मार्टफोन ब्रांड एमआई इंडिया ने पिछले हफ्ते कहा था कि उसने एमेजॉन, फ्लिपकार्ट और एमआई डॉट कॉम प्लेटफार्मों पर 7 दिन की फेस्टिवल सेल में 50 लाख हैंडसेट बेचे। वहीं चीनी स्मार्टफोन ब्रांड पोको ने फ्लिपकार्ट पर इसी अवधि में 10 लाख से अधिक स्मार्टफोन बेचे। फ्लिपकार्ट ने पहले कहा था कि मोबाइल श्रेणी में प्लेटफॉर्म ने ग्राहकों की संख्या में दोगुनी वृद्धि दर्ज की है।

स्मार्टफोन के प्रीमियम सेगमेंट में 3.2 गुना की वृद्धि देखी गई, जिसमें मुख्य रूप से एप्पल, गूगल और सैगसंग के फोन शामिल हैं।

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