Gold-Silver Price Today: सोने ने फिर पकड़ी रफ्तार, जानिए आपके शहर में क्या है नया रेट
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सोने की कीमतों में तेजी आई है। एमसीएक्स और घरेलू बाजार में सोना 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गया है।

अमेरिका, इजरायल-ईरान तनाव के बीच एक बार फिर निवेशकों का रुझान सोने की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। इसका असर घरेलू बाजार और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) दोनों पर देखने को मिला है। मंगलवार, 2 जून को शुरुआती कारोबार में सोना मजबूती के साथ खुला और इसकी कीमत 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर गई। पिछले कुछ समय से सोने में गिरावट का रुख देखने को मिल रहा था, लेकिन वैश्विक घटनाक्रमों ने बाजार की दिशा बदल दी है।
अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी सुरक्षित निवेश की मांग
कमोडिटी मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता का सीधा असर सोने की कीमतों पर पड़ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया घटनाक्रम के बाद निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में सोने में खरीदारी बढ़ा दी है। इसी वजह से एमसीएक्स पर सोने की कीमतों में शुरुआती कारोबार से ही तेजी देखने को मिली।
सोने के साथ-साथ चांदी में भी मजबूती दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, औद्योगिक मांग बढ़ने और वैश्विक तनाव के माहौल में सुरक्षित निवेश के तौर पर चांदी की मांग बढ़ी है, जिससे इसके दाम भी ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं।
बड़े शहरों में क्या हैं सोने के ताजा भाव?
देश के प्रमुख शहरों में सोने की कीमतों में भी तेजी का असर साफ दिखाई दिया। दिल्ली में सोना 1,56,370 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। मुंबई और कोलकाता में इसका भाव 1,56,220 रुपये है, जबकि चेन्नई में सोना 1,58,180 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा है। पटना में 1,56,270 रुपये, जबकि लखनऊ, मेरठ, अयोध्या, कानपुर, गाजियाबाद, नोएडा और गुरुग्राम में सोने का भाव 1,56,370 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया।
विशेषज्ञों का क्या कहना है?
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर जारी उथल-पुथल और अमेरिका-ईरान संबंधों में बढ़ी अनिश्चितता ने बाजार में सतर्कता बढ़ा दी है। पहले दोनों देशों के बीच शांति समझौते की उम्मीद थी, लेकिन हालिया घटनाओं के बाद निवेशकों का रुख बदलता दिख रहा है।
हालांकि, जानकारों का कहना है कि सोने ने लंबे समय में बेहतर रिटर्न दिया है, लेकिन मौजूदा ऊंचे स्तरों को देखते हुए नए निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए। एकमुश्त निवेश करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से एसआईपी मॉडल अपनाने से जोखिम कम किया जा सकता है और निवेश भी संतुलित तरीके से बढ़ाया जा सकता है।
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