Gold-Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में आई गिरावट, जानें क्या हैं नई कीमत?

सोने और चांदी ने बीते एक साल में वैश्विक अस्थिरता के बीच निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। डॉलर में बीते एक साल में सोने 40 फीसदी से ज्यादा, 6 महीनों में 18 फीसदी से अधिक का रिटर्न दिया है।

फोटोः सोशल मीडिया
i
user

नवजीवन डेस्क

सोना और चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। आज (सोमवार) कमोडिटी मार्केट (MCX) खुलते ही सोना-चांदी के दाम में हल्की गिरावट दर्ज की गई। MCX पर सोना का 5 जून 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,52,699 रुपये के मुकाबले 1,52,695 रुपये पर खुला। चांदी का 5 मई 2026 का कॉन्ट्रैक्ट अपनी पिछली क्लोजिंग 2,44,636 रुपये के मुकाबले 2,43,675 रुपये पर खुला। सोना सुबह 11:35 बजे सोना 0.21 फीसदी या 317 रुपये की गिरावट के साथ 1,52,382 रुपये के भाव पर ट्रेड कर रहा था। चांदी 0.53 फीसदी या 1,290 रुपये की गिरावट के साथ 2,43,346 रुपये/किलो के भाव पर ट्रेड करती दिखी।

जंग के माहौल में कैसी रही सोने-चांदी की चाल?

सोने और चांदी ने बीते एक साल में वैश्विक अस्थिरता के बीच निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। डॉलर में बीते एक साल में सोने 40 फीसदी से ज्यादा, 6 महीनों में 18 फीसदी से अधिक का रिटर्न दिया है। वहीं, बात करें चांदी की तो बीते 1 साल में 128 फीसदी से अधिक और बीते 6 महीने में 61 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न निवेशकों को दिया। सोने-चांदी ने इस साल फरवरी के आखिरी हफ्ते में ऑल टाइम हाई का रिकॉर्ड बनाया था। हालांकि मिडिल ईस्‍ट जंग के बीच सोने-चांदी का अलग ही ट्रेंड देखने को मिला है। जंग के बीच जहां, सोने-चांदी के दाम लगातार बढ़ते हैं, वहीं इस बार ऐसा देखने को नहीं मिला। जानकारों का कहना है कि इसके पीछे की वजह एक्‍सपर्ट मार्केट में वॉलेटिलिटी और डॉलर बेस्‍ड इन्‍वेस्‍टमेंट वजह रहा है।


आगे कैसी रहेगी चाल?

विश्लेषकों के मुताबिक, छुट्टियों की वजह से इस हफ्ते सोने और चांदी की कीमतों में कुछ बिकवाली का दबाव देखने को मिल सकता है। कारोबारी इस दौरान अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता, कच्चे तेल की दरों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले पर नजर बनाए रखेंगे।

जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के ईबीजी - कमोडिटी एंड करेंसी रिसर्च के उपाध्यक्ष प्रणव मेर के मुताबिक, इस हफ्ते अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की प्रगति और तेल, सोने और व्यापक वित्तीय बाजारों पर उनके संभावित प्रभाव पर रहेगा।

कारोबारी, आर्थिक मोर्चे, अमेरिकी फेडरल रिजर्व, बैंक ऑफ जापान, बैंक ऑफ इंग्लैंड और यूरोपीय सेंट्रल बैंक के मौद्रिक नीति फैसलों पर नजर बनाए रखेंगे। साथ ही हप्ते के आखिर में आवास, व्यक्तिगत उपभोग व्यय (PCE) मुद्रास्फीति और उपभोक्ता विश्वास पर प्रमुख अमेरिकी डेटा के साथ प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के फैक्ट्री गतिविधि के आंकड़े भी बाजार की चाल पर असर डाल सकते हैं।