अर्थतंत्र की खबरें: अमेरिका-ईरान युद्ध से सोने में 17 वर्षों में सबसे बड़ी गिरावट और 1 अप्रैल से ट्रेडिंग होगा महंगा

सोने में आई तेज गिरावट की वजह मुनाफावसूली, डॉलर इंडेक्स में तेजी आना, बॉन्ड यील्ड का बढ़ना और कच्चे तेल जैसी अन्य कमोडिटी में तेजी आना था। इन सभी फैक्टर्स ने मिलकर सोने पर दबाव बनाने का काम किया।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते सोने में मार्च में 17 वर्षों की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई है और इस दौरान कीमती घातु करीब 14.5 प्रतिशत सस्ती हो गई है। इससे पहले सोने में इतनी बड़ी गिरावट करीब 17 वर्ष पहले देखी गई थी, जब अक्टूबर 2008 में सोने का दाम करीब 16.8 प्रतिशत कम हो गया है।

मौजूदा समय में कॉमेक्स पर सोना 4,600 डॉलर प्रति औंस के आसपास है, जो कि इस महीने की शुरुआत में सोना 5,400 डॉलर प्रति औंस के आसपास था।

जानकारों का कहना है कि सोने में आई तेज गिरावट की वजह मुनाफावसूली, डॉलर इंडेक्स में तेजी आना, बॉन्ड यील्ड का बढ़ना और कच्चे तेल जैसी अन्य कमोडिटी में तेजी आना था। इन सभी फैक्टर्स ने मिलकर सोने पर दबाव बनाने का काम किया।

जानकारों ने आगे बताया कि पिछले चार वर्षों में सोने के व्यापार का तरीका बदल गया है। उन्होंने कहा, “यूक्रेन युद्ध से पहले, सोने की कीमत बॉन्ड यील्ड और अमेरिकी डॉलर के विपरीत होती थी; यानी जब ये सूचकांक गिरते थे तो सोने की कीमत बढ़ती थी, और जब ये सूचकांक बढ़ते थे तो सोने की कीमत गिरती थी।”

उन्होंने आगे कहा, “यूक्रेन युद्ध के बाद की अवधि ने इन संबंधों को पूरी तरह से उलट दिया, विशेष रूप से 2025 और 2026 की शुरुआत में जब सोने की कीमत में बहुत तेजी से वृद्धि हुई थी।” ईरान युद्ध के बाद, सोने ने अपने अधिक पारंपरिक संबंधों को फिर से अपना लिया है।

उन्होंने कहा, “बॉन्ड यील्ड और अमेरिकी डॉलर दोनों में वृद्धि हुई है, तब सोने ने इन मापदंडों के प्रति अपनी पारंपरिक विपरीत संवेदनशीलता प्रदर्शित की है, जिसके परिणामस्वरूप इसकी कीमत में गिरावट आई है।”

1 अप्रैल से एफएंडओ पर बढ़ेगा एसटीटी, लंबे समय में सीमित प्रभाव

वित्त वर्ष 2025-26 मंगलवार को समाप्त होने वाला है, ऐसे में निवेशक कई नए बदलावों के लिए तैयार हो रहे हैं, जिनमें संशोधित सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) के नियम भी शामिल हैं, जो 1 अप्रैल से लागू होंगे।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट में घोषित बदलावों के बाद ब्रोकर्स, ट्रेडर्स और डिमैट अकाउंट धारकों में फ्यूचर्स और ऑप्शंस (एफएंडओ) पर एसटीटी में हुई बढ़ोतरी को लेकर चिंता देखी जा रही है। खासतौर पर ऑप्शंस पर शुल्क में बड़ी बढ़ोतरी प्रस्तावित की गई है।

नए नियमों के तहत फ्यूचर्स पर एसटीटी को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं ऑप्शंस प्रीमियम और एक्सरसाइज पर एसटीटी को 0.10 प्रतिशत और 0.125 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत कर दिया गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, डेरिवेटिव्स सेगमेंट में एसटीटी बढ़ने से निकट अवधि में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के निवेश पर थोड़ा नकारात्मक असर पड़ सकता है, खासकर उन फंड्स पर जो हाई-फ्रीक्वेंसी और डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर निर्भर हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि बजट के बाद हुए इन बदलावों से एक्टिव ट्रेडिंग की लागत बढ़ेगी। हाल के आंकड़े भी दिखाते हैं कि जनवरी 2026 में ही एफपीआई ने भारतीय बाजार से 41,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की निकासी की है, जो वैश्विक अनिश्चितता, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और करेंसी दबाव का संकेत है।

ऐसे में एसटीटी बढ़ने से टैक्स के बाद मिलने वाला रिटर्न कम हो सकता है, जिससे शॉर्ट-टर्म और डेरिवेटिव-आधारित विदेशी निवेश के लिए भारत थोड़ा कम आकर्षक बन सकता है।


सरकार ने वित्त अधिनियम 2026 को अधिसूचित किया

सरकार ने 2026-27 के केंद्रीय बजट के वित्तीय प्रस्तावों को लागू करने के लिए वित्त अधिनियम 2026 को अधिसूचित कर दिया है।

कानून और न्याय मंत्रालय द्वारा जारी एक राजपत्र अधिसूचना में कहा गया है, "वित्त अधिनियम 2026 को 30 मार्च, 2026 को राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हुई और इसे आम सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है।"

संसद ने शुक्रवार को वित्त विधेयक 2026 को मंजूरी दे दी और राज्यसभा ने ध्वनि मत से इसे लोकसभा को वापस भेज दिया। इसके साथ ही विधायी प्रक्रिया पूरी हो गई और केंद्रीय बजट 2026-27 के प्रस्तावों को कानूनी मान्यता मिल गई, जो 1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्तीय वर्ष में लागू होंगे।

लोकसभा ने 25 मार्च को 32 संशोधनों के साथ विधेयक पारित किया था। राज्यसभा ने संक्षिप्त चर्चा और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा सांसदों द्वारा बजट प्रस्तावों पर उठाए गए प्रश्नों के उत्तर देने के बाद विधेयक को वापस भेज दिया था।

केंद्रीय बजट 2026-27 में 53.47 लाख करोड़ रुपए के कुल व्यय का प्रस्ताव रखा गया है, जो 31 मार्च को समाप्त हुए मौजूदा वित्तीय वर्ष की तुलना में 7.7 प्रतिशत अधिक है।

बजट में अर्थव्यवस्था में विकास और रोजगार सृजन के लिए बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को बढ़ावा देने हेतु 12.2 लाख करोड़ रुपए के पूंजीगत व्यय का प्रस्ताव है। यह पिछले वित्तीय वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 2.2 लाख करोड़ रुपए की वृद्धि दर्शाता है।

वित्त मंत्री ने कहा कि बड़ी परियोजनाओं के विकास में तेजी लाने के लिए एक अवसंरचना जोखिम विकास कोष स्थापित किया जाएगा।

वित्त मंत्री ने बजट में 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के 4.3 प्रतिशत तक कम करने का अनुमान लगाया है, क्योंकि सरकार स्थिर आर्थिक विकास सुनिश्चित करने के लिए राजकोषीय सुदृढ़ीकरण के पथ पर अग्रसर है।

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