नोटबंदी-जीएसटी से कर बढ़ने के दावों की खुली पोल, सरकार ने 6 महीने में ही वित्तीय घाटे का 91 फीसदी किया पार

जीएसटी और नोटबंदी से कर दायरा बढ़ने के सरकार के दावों की पोल खुल गई है। आंकड़ों के मुताबिक पहली छमाही में ही वित्तीय घाटे के लक्ष्य का 91 फीसदी छू लिया है। ये घाटा आमदनी और खर्च का अंतर बताता है।

नोटबंदी-जीएसटी से कर बढ़ने के दावों की खुली पोल, सरकार ने 6 महीने में ही वित्तीय घाटे का 91 फीसदी किया पार
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IANS

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जीएसटी और नोटबंदी के तमाम दावों में एक दावा यह भी था कि पूरी अर्थव्यवस्था औपचारिक हो रही है और ज्यादा लोग और कंपनियां कर के दायरे में आ रहे हैं। सरकार और उसके मंत्रियों ने प्रेस कांफ्रेंस कर-कर के ऐसे दावे किए। लेकिन इन दावों की पोल अब खुल गई है। ये पोल किसी और ने नहीं, बल्कि वित्त मंत्रालय के महालेखा नियंत्रक यानी सीजीए ने खोली है। सीजीए से जारी आंकड़ों के मुताबिक मोदी सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष के पहले छह महीने में ही वित्तीय घाटे के 91.3 फीसदी लक्ष्य को छू लिया है। वित्तीय घाटा वो होता जो सरकार की राजस्व (टैक्स आदि) से आमदनी और सरकारी खर्च के बीच का अंतर होता है।

मंगलवार को जारी आंकड़ों में बताया गया है कि पहली छमाही के दौरान देश का वित्तीय घाटा बजटीय लक्ष्य का 91 फीसदी से अधिक है, जो 4.99 लाख करोड़ रुपये है। जबकि पूरे वित्त वर्ष के लिए 5.46 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया था। वित्त मंत्रालय के महालेखा नियंत्रक यानी सीजीए से जारी जारी आंकड़े में कहा गया है कि पिछले वित्त वर्ष की अप्रैल-सितंबर छमाही के दौरान वित्तीय घाटा बजटीय लक्ष्य का 83.9 फीसदी था।

सीजीए के आंकड़ों के मुताबिक, इस वित्त वर्ष की पहली छमाही में कर राजस्व कुल 6.23 लाख करोड़ रुपये रहा, जो कि बजट अनुमान का 41.1 फीसदी है। वहीं, राजस्व और गैर ऋण पूंजी मिलाकर कुल आमदनी चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में 6.50 लाख करोड़ रुपये रही, जो कि वर्तमान वित्त वर्ष के अनुमान का 40.6 फीसदी है।

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Published: 31 Oct 2017, 6:31 PM