अर्थ जगत की 5 बड़ी खबरें: ICICI ने बेची अपनी हिस्सेदारी और भारत में MSME सेक्टर के सामने अस्तित्व बचाने का संकट

ICICI बैंक ने आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी में 3.6 प्रतिशत हिस्सेदारी लगभग 2,250 करोड़ रुपये में बेच दी है और रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की एक स्टडी में यह बात सामने आई है कि कोरोना संकट की वजह से भारत के MSME अपना अस्तित्व बचाने के संकट से जूझ रहे हैं।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

ICICI बैंक ने आईसीआईसीआई लोम्बार्ड में 3.6 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची

आईसीआईसीआई बैंक ने शुक्रवार को आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी में 3.6 प्रतिशत हिस्सेदारी लगभग 2,250 करोड़ रुपये में बेच दी है। बैंक के जनवरी-मार्च तिमाही परिणामों की घोषणा करते समय बैंक ने कहा था कि वह अपने बहीखातों को दुरुस्त करने के लिए अवसर मिलने पर यह कदम उठाएगी। विनिवेश के बाद अब आईसीआईसीआई बैंक की जनरल इंश्योरेंस में हिस्सेदारी लगभग 51.9 प्रतिशत बची है। बैंक ने एक नियामक फाइलिंग में इसकी जानकारी दी है। बैंक ने कहा कि निदेशक मंडल से मंजूरी मिलने के बाद उसने आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के 10 रुपये मूल्य वाले 1,80,00,000 शेयरों का विनिवेश किया है। यह 31 मार्च, 2020 को कंपनी में बैंक की इक्वि टी शेयर पूंजी के 3.96 प्रतिशत के बराबर है। इससे बैंक को करीब 2,250 करोड़ रुपये की राशि मिली है।

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MSME सेक्टर के सामने है अस्तित्व बचाने का संकट: क्रिसिल

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की एक स्टडी में यह बात सामने आई है कि कोरोना संकट की वजह से भारत के सूक्ष्म, लुघ और मध्यम उद्यम (MSME) अपना अस्तित्व बचाने के संकट से जूझ रहे हैं। उनकी आमदनी घटकर करीब 20 फीसदी पर पहुंच गई है। अध्ययन के मुताबिक कोरोना संकट की वजह से इस वित्त वर्ष में ज्यादातर एमएसएमई की आय में बड़ी गिरावट की आशंका है। पूरे देश में कोरोना संकट की वजह से ऐसे एमएसएमई पर सबसे बुरा असर पड़ा है जो लोगों के लिए गैर जरूरी सामान के उत्पादन (जैसे कपड़े आदि), निर्माण और निर्यात आधारित कारोबार में हैं। लॉकडाउन की वजह से करीब 75 दिन तक उत्पादन ठप रहा और सप्लाई चेन भी बाधित रहा।

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कोरोना के बीच पीएफ से जुड़ी बुरी खबर आई सामने

कोरोना संकट के बीच लोगों की नौकरियों पर तो संकट है ही, अब उनके भविष्य निधि यानी पीएफ से जुड़ी एक बुरी खबर सामने आई है। अप्रैल महीने में एक-तिहाई कंपनियों ने लोगों का पीएफ जमा नहीं किया है, यानी पैसे की तंगी की वजह से उन्होंने डिफॉल्ट कर दिया है। गौरतलब है कि लंबे समय से जारी कोरोना संकट, लॉकडाउन आदि वजहों से ज्यादातर कंपनियों की आर्थिक हालत खस्ता है। इसकी वजह से वे कर्मचारियों की छंटनी, सैलरी में कटौती जैसे कई उपाय कर रही हैं। ज्यादातर छोटे एवं मध्यम उद्यमों के पास नकदी बहुत कम बची है। ऐसे में वे अब पीएफ खाते में भी डिफॉल्ट करने लगी हैं।

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टाटा के ट्रस्ट से 100 करोड़ रुपये टैक्स वसूली पर ट्राइब्यूनल ने लगाई रोक

टाटा समूह के एक ट्रस्ट से आयकर विभाग द्वारा 100 करोड़ रुपये की टैक्स वसूली करने पर इनकम टैक्स अपीलेट ट्राइब्यूनल (ITAT) ने रोक लगा दी है। अक्टूबर 2019 के अपने आदेश में आयकर विभाग ने एक प्रावधान लागू किया था, जिसके मुताबिक अगर किसी ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन कैंसिल हो गया हो तो उसे अपनी तब तक की बढ़ी हुई आय के आधार पर टैक्स देना होगा। आयकर विभाग ने पिछले साल टाटा एजुकेशन और विकास ट्रस्ट को 100 करोड़ रुपये का टैक्स भरने का नोटिस दिया था। यह टैक्स पिछली छूट वाली आय के आधार पर ​रजिस्ट्रेशन की वजह से बनता है। आयकर विभाग का कहना था इसमें छूट मान्य नहीं होगा। असल में टाटा के छह ट्रस्ट के रजिस्ट्रेशन को रद्द कर दिया गया था।

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ED का 905 करोड़ रुपये की अवैध हेजिंग पर 6 कंपनियों को नोटिस

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के तहत कम से कम 6 फर्मों और इसके निदेशकों को 905 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्राओं के अनधिकृत बढ़ोतरी (हेजिंग) के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। हेजिंग एक जोखिम प्रबंधन रणनीति है जो संबंधित परिसंपत्ति में विपरीत स्थिति को लेकर निवेश में नुकसान की भरपाई करने के लिए नियोजित की जाती है। यह कमोडिटी की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से नुकसान से बचने का एक तरीका भी होता है। वित्तीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय ने कई फर्मों को फेमा नोटिस जारी किए हैं। इनमें संतोष प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड, पेन्नार ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड, डिलाइट सप्लायर्स प्राइवेट लिमिटेड और इसके निदेशक आदित्य सारदा और नवीन नय्यर, हेडेन वेनिजा प्राइवेट लिमिटेड (जिसे पहले मैरीगोल्ड वेनिजा के रूप में जाना जाता था) के निदेशक सचित सर्राफ और मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड के तत्कालीन सीईओ और एमडी शामिल हैं।

(आईएएनएस के इनपुट के साथ)

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