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लालच, लोभ और रिश्वत का परिणाम है आईसीआईसीआई-वीडियोकॉन मनी लॉड्रिंग केस, जानिए कैसे हुई इस घोटाले की शुरुआत

यह 1994 की बात थी, जब स्वामित्व बदलकर कोचर बंधुओं के पास आ गया। संयोग से इसी साल चंदा को आईसीआईसीआई लिमिटेड में प्रोन्नति पाकर एजीएम बनी। एबीएस के अधिकांश हिस्सेदारी राजीव कोचर के पास थी। 

फोटो: सोशल मीडिया

आईएएनएस

अगर आप मुर्गी के दरबे की रखवाली का जिम्मा लोमड़ी को सौपेंगे तो क्या होगा? क्या होता है जब आप मुर्गी की रखवाली के लिए लोमड़ी लेकर आते हैं? भविष्य में जांचकर्ताओं को उलझाने और गड़बड़ियों की भनक से दूर रखने के मकसद से कंपनियों को पेंचीदा और जटिल सांचे में ढालते हुए कोचर बंधु एक साधारण बात भूल गए कि दस्तावेजी साक्ष्यों को अब छिपाया नहीं जा सकता है, क्योंकि डेटाबेस की जांच और अनुपालन की जिम्मेदारी कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय (एमसीए) के पास है। धोखाधड़ी में लिप्त रहने वाली शेल कंपनियां या सूटकेस कंपनियां अक्सर कागजी साक्ष्य का निशान छोड़ जाती हैं। कोचर परिवार के साथ कुछ ऐसा ही हुआ।

बात मॉडर्न फैशंस से शुरू होती है। यह कंपनी कोचर बंधुओं की जुड़वां क्रेडेंशियल में मुख्य शेयरधारक थी। इसके साथ दो अन्य कंपनियां थीं -एबीएस कंपोनेंट्स प्राइवेट लिमिटेड और केजी कंप्यूटर्स प्राइवेट लिमिटेड। मॉडर्न की तरह शेल कंपनी रही एबीएस ने आखिरी बार 2005 में रिटर्न फाइल की। मॉडर्न फैशन की तरह यह नोटबंदी की शिकार बन गई और कंपनीज रजिस्ट्रार यानी आरओसी की कवायद में फंस गई।

कोचर परिवार के कारोबार पर आईएएनएस की अन्वेषणात्मक श्रंखला में जिक्र की गई कंपनी क्रेडेंशियल फाइनेंस लिमिटेड यानी सीएफएल-1 का तुलन पत्र 30 सितंबर, 2000 को दर्शाता है कि कंपनी ने अधिमान शेयरों में 1.25 करोड़ रुपए का निवेश किया और 98.13 लाख रुपए सीएफएल के इक्विटी शेयर में लगाया। इस प्रकार सीएफएल में 2.23 करोड़ रुपए का निवेश किया गया।

राजीव गुप्ता और राजीव गर्ग को 19 मई, 1998 को एबीएस में 1,000 करोड़ रुपए की पूंजी के साथ जोड़ा गया। इसका पंजीकरण कार्यालय मॉडर्न फैशन की तरह बी-33 एसएफएस हाउस शेखसराय-1 नई दिल्ली-17 दिखाया गया।

यह 1994 की बात थी, जब स्वामित्व बदलकर कोचर बंधुओं के पास आ गया। संयोग से इसी साल चंदा को आईसीआईसीआई लिमिटेड में प्रोन्नति पाकर एजीएम बनी। एबीएस के अधिकांश हिस्सेदारी राजीव कोचर के पास थी। उनके पास 10 रुपए प्रति शेयर मूल्य के 2,75,100 शेयर थे, जबकि बाकी 2,75,100 शेयर कोचर परिवार और रिश्तेदारों के पास थे।

धोखाधड़ी की शुरुआत यहीं से होती है। वर्ष 2004-05 के लिए आरओसी के पास 13 अप्रैल, 2006 को दाखिल फार्म 20बी दशार्ता है कि अधिकृत पूंजी 75 लाख रुपए है और भुगतान पूंजी 55.01 लाख रुपए। अप्रैल 2006 में इस कंपनी ने सिर्फ एक बार 2003-04 और 2004-05 के लिए ऑनलाइन रिटर्न दाखिल किया। कंपनी ने भुगतान पूंजी 91.61 लाख रुपए घोषित की, जो अधिकृत पूंजी 75 लाख रुपए से अधिक थी। नोटबंदी के बाद एक सितंबर, 2017 को आरओसी दिल्ली की गाज जिन 24,945 कंपनियों पर गिरी, उनमें इसका नंबर 366 था।

अब हम पंजीकृत कार्यालय के पते पर आ जाएं। इसमें भी असंगति और अंतर है। फार्म की स्कैन की हुई प्रतिलिपि दशार्ती है कि 20 मार्च, 2006 से एबीएस के पंजीकृत कार्यालय का पता मॉडर्न फैशंस की तरह बदलकर 24 स्कूल लेन, हालीडे इन के सामने, बाराखंबा रोड नई दिल्ली-1 हो गया।

आईएएनएस उस पते पर जाने के बाद पाया कि असल में ऐसा कोई पता है ही नहीं। यूबी-4 और 7 विद्यमान हैं, लेकिन यूबी-5 नहीं है। इसका साफ मतबलब है कि पता गलत है, जो इसे सूटकेस कंपनी या शेल कंपनी साबित करती है। ऑनलाइन दाखिल फार्म-18 में कंपनी में शेखसराय का पता है।

केजी कंप्यूटर्स प्राइवेट लिमिटेड :

सीएफएल में अंशधारक और निवेशक एक अन्य कंपनी केजी कंप्यूटर्स नोटबंदी के बाद बंद हो गई। सीएफएल के तुलन पत्र के मुताबिक केजी कंप्यूटर्स ने अधिमान शेयर में 8.75 लाख रुपए और इक्विटी शेयर में 45.60 लाख रुपए का निवेश किया। इस प्रकार कंपनी का कुल निवेश 54.35 लाख रुपए था।

राजिंदर कुमार गर्ग और अमित गुप्ता द्वारा 19 मई, 1988 को 1,000 रुपए की पूंजी के साथ केजी को शामिल किया गया था। इसका पंजीकृत कार्यालय शेख सराय दिखाया गया है। यह वही पता है, जो मॉडर्न और एबीएस का था। कंपनी 1994 में कोचर परिवार के हाथ में आ गई। राजीव और दीपक कोचर द्वारा आठ सितंबर, 1994 को 200 रुपए से शामिल की गई कंपनी क्रेडेंशियल होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड के पास केजी कंप्यूटर्स के अधिकांश शेयर थे। अगर आपको लगता है कि इस जटिल दस्तावेजी साक्ष्य का अन्वेषण विलक्षण है तो यह भी जान लीजिए कि इन सबका आधार व डीएनए काफी समान है।

एबीएस और केजी शेल कंपनियां हैं, जो उलझाने के लिए बनाई गई थीं। आरओसी दिल्ली द्वारा एक सितंबर, 2017 को जिन 24,945 कंपनियों पर गाज गिरी, उनमें केजी की क्रम संख्या 10,450 थी। केजी कंप्यूटर्स का भी पता पहले की दो कंपनियों की तरह यूबी-5 अरुणाचल भवन बाराखंबा रोड नई दिल्ली-1 है।

क्रेडेंशियल होल्डिंग्स :

सीएफएल-1 और सीएफएल-2 के अलावा क्रेडेंशियल होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है, जिसकी अधिकृत पूंजी पांच लाख रुपये और भुगतान पूंजी करीब एक लाख रुपये थी। सीएफएल का सालाना रिटर्न दर्शाता है कि सीएचपीएल ने अधिमान शेयरों में 1.25 करोड़ रुपए और इक्विटी शेयर में 84.97 लाख रुपए निवेश किया था। इस प्रकार सीएफएल में सीएचपीएल का कुल निवेश 2.30 करोड़ रुपए हुआ। सीपीएचएल को आठ सितंबर, 1994 को दीपक और राजीव कोचर ने फिर 200 रुपए के निवेश के साथ शामिल किया था।

दोनों ने एक समान पता दर्शाया है और खुद को बिजनेस एग्जिक्यूटिव बताया है। कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के डेटाबेस में यह कंपनी सक्रिय है और इसका पंजीकृत कार्यालय जी-8 मेकर चैंबर्स-5 मुंबई-21 है।

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