सोना खरीदने या बेचने जा रहे हैं, तो पहले समझ लें टैक्स के नियम, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान!

सोना भले ही सुरक्षित निवेश माना जाता हो, लेकिन टैक्स नियमों को नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता है। इसलिए सोने में निवेश से पहले टैक्स की पूरी जानकारी रखना जरूरी है, ताकि मुनाफे पर किसी तरह का नुकसान न उठाना पड़े।

सोना खरीदने या बेचने जा रहे हैं, तो पहले समझ लें टैक्स के नियम, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान!
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नवजीवन डेस्क

भारत में सोना सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे सुरक्षित निवेश और परंपरा दोनों माना जाता है। शादी-ब्याह, त्योहारों और भविष्य की बचत के लिए लोग बड़ी मात्रा में सोना खरीदते हैं। लेकिन अक्सर निवेशक यह भूल जाते हैं कि सोना खरीदने, रखने और बेचने के हर चरण में टैक्स से जुड़े नियम लागू होते हैं। अगर इन नियमों की सही जानकारी न हो तो कमाई का बड़ा हिस्सा टैक्स में चला सकता है। ऐसे में सोने में निवेश से पहले टैक्स की पूरी समझ होना बेहद जरूरी है।

सोना खरीदते समय सबसे पहले जीएसटी का बोझ आता है। चाहे आप गोल्ड ज्वेलरी खरीदें, गोल्ड कॉइन लें या डिजिटल गोल्ड में निवेश करें, सोने की कीमत पर 3 प्रतिशत जीएसटी देना होता है। इसके अलावा, अगर आप ज्वेलरी खरीदते हैं तो उस पर लगने वाले मेकिंग चार्ज पर 5 प्रतिशत जीएसटी अलग से देना पड़ता है। यानी सोना खरीदते वक्त ही आपकी कुल लागत बढ़ जाती है।

इसके बाद जब आप सोना बेचते हैं, तब उस पर इनकम टैक्स (कैपिटल गेन्स टैक्स) लगता है। यह टैक्स बिक्री कीमत पर नहीं, बल्कि आपके मुनाफे पर लगाया जाता है। टैक्स की दर इस बात पर निर्भर करती है कि आपने सोना कितने समय तक अपने पास रखा। अगर आप सोना 3 साल (36 महीने) के भीतर बेचते हैं, तो इससे होने वाला मुनाफा शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (एसटीसीजी) माना जाता है और यह आपकी सालाना आय में जुड़कर आपके टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्सेबल होता है।


वहीं, अगर सोना 3 साल से ज्यादा समय बाद बेचा जाता है, तो उस पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (एलटीसीजी) टैक्स लगता है। इसमें 20 प्रतिशत टैक्स देना होता है, लेकिन साथ ही इंडेक्सेशन का फायदा भी मिलता है। इंडेक्सेशन के जरिए महंगाई के अनुसार खरीद कीमत बढ़ा दी जाती है, जिससे टैक्सेबल मुनाफा कम हो जाता है। लंबे समय के निवेशकों के लिए यह ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।

विरासत में मिले सोने को लेकर भी लोगों के मन में कई सवाल होते हैं। इनकम टैक्स नियमों के मुताबिक, विरासत में सोना मिलने पर कोई टैक्स नहीं लगता। लेकिन अगर आप उस सोने को बाद में बेचते हैं, तो उस पर कैपिटल गेन्स टैक्स देना होगा। खास बात यह है कि यहां होल्डिंग पीरियड आपकी खरीद तारीख से नहीं, बल्कि उस व्यक्ति की खरीद तारीख से गिना जाएगा, जिससे आपको वह सोना मिला है।

इनकम टैक्स विभाग घर में रखे जाने वाले सोने की एक सीमा भी तय करता है, बशर्ते सोने का स्रोत वैध हो। आमतौर पर बिना पूछताछ के विवाहित महिला 500 ग्राम, अविवाहित महिला 250 ग्राम और पुरुष 100 ग्राम तक सोना रख सकते हैं। इससे ज्यादा सोना रखने की स्थिति में यह साबित करना होता है कि वह विरासत में मिला है या घोषित आय से खरीदा गया है।

डिजिटल गोल्ड पर टैक्स के नियम भी लगभग फिजिकल गोल्ड जैसे ही हैं। इसे खरीदते समय 3 प्रतिशत जीएसटी लगता है और बेचते समय होल्डिंग पीरियड के आधार पर एसटीसीजी या एलटीसीजी टैक्स देना होता है। कुल मिलाकर, सोना भले ही सुरक्षित निवेश माना जाता हो, लेकिन टैक्स नियमों को नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता है। इसलिए सोने में निवेश से पहले टैक्स की पूरी जानकारी रखना जरूरी है, ताकि मुनाफे पर किसी तरह का नुकसान न उठाना पड़े।

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