Income Tax Rules 2026: कैश, गाड़ी, प्रॉपर्टी और होटल बिल… जानिए 1 अप्रैल 2026 से किन लेन-देन में देना होगा पैन

Income Tax Rules 2026 के ड्राफ्ट में PAN से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव है। अब 10 लाख सालाना कैश ट्रांजैक्शन, 20 लाख प्रॉपर्टी डील और 5 लाख से महंगी गाड़ी पर ही पैन जरूरी होगा। जानिए 1 अप्रैल 2026 से क्या बदल सकता है।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

सरकार पैन कार्ड (PAN Card) से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने नए इनकम टैक्स रूल्स 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है, जो नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 से जुड़े हैं। प्रस्ताव है कि ये नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू किए जाएं।

इन बदलावों का मकसद छोटे और रोजमर्रा के लेन-देन को आसान बनाना और बड़े ट्रांजैक्शन पर निगरानी को मजबूत करना है। ड्राफ्ट पर फिलहाल आम लोगों और स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगे गए हैं। अंतिम नियम मार्च की शुरुआत में अधिसूचित किए जा सकते हैं।

बैंक में कैश जमा या निकासी: अब सालाना लिमिट पर नजर

ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, पैन कार्ड तभी देना होगा जब कोई व्यक्ति एक वित्तीय वर्ष में अपने एक या अधिक बैंक खातों से कुल मिलाकर 10 लाख रुपये या उससे ज्यादा कैश जमा या निकालता है।

अभी के नियम में अगर एक दिन में 50,000 रुपये से ज्यादा कैश जमा किया जाता है तो पैन देना जरूरी होता है।

क्या बदलेगा?

डेली लिमिट की जगह साल भर के कुल लेन-देन को आधार बनाया जाएगा।

इससे छोटे-छोटे ट्रांजैक्शन करने वालों को राहत मिल सकती है।

लेकिन बड़ी रकम के मूवमेंट पर नजर और स्पष्ट होगी।


इंश्योरेंस पॉलिसी

ड्राफ्ट में इंश्योरेंस सेक्टर के लिए भी नया प्रावधान है। प्रस्ताव के मुताबिक, जब कोई व्यक्ति किसी इंश्योरेंस कंपनी के साथ अकाउंट आधारित रिश्ता शुरू करेगा, तब पैन देना अनिवार्य होगा।

फिलहाल नियम यह है कि लाइफ इंश्योरेंस का सालाना प्रीमियम 50,000 रुपये से ज्यादा होने पर पैन मांगा जाता है।

नए प्रस्ताव का मतलब:

इंश्योरेंस से जुड़े लेन-देन की निगरानी मजबूत होगी।

केवल प्रीमियम लिमिट के बजाय संबंध की शुरुआत पर ही पैन जरूरी होगा।

कार और बाइक खरीदना: 5 लाख रुपये से ऊपर पर ही पैन

गाड़ी खरीदने वालों के लिए राहत का प्रस्ताव है। ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक, अब पैन तभी देना होगा जब कार या बाइक की कीमत 5 लाख रुपये से ज्यादा हो।

अभी तक किसी भी कीमत की गाड़ी खरीदने पर पैन देना जरूरी था। दोपहिया वाहनों के मामले में स्पष्टता भी कम थी।

संभावित असर:

सस्ती कार या बाइक खरीदने वालों को कागजी झंझट से राहत।

डीलर और खरीदार दोनों के लिए प्रक्रिया आसान।


प्रॉपर्टी डील: लिमिट 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख का प्रस्ताव

घर, प्लॉट खरीदने-बेचने या गिफ्ट के रूप में संपत्ति ट्रांसफर करने के मामलों में भी बदलाव सुझाया गया है।

ड्राफ्ट के अनुसार, अब 20 लाख रुपये से ज्यादा की प्रॉपर्टी डील पर ही पैन देना होगा। अभी यह सीमा 10 लाख रुपये है।

क्यों अहम है यह बदलाव?

प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतों को देखते हुए लिमिट बढ़ाने का प्रस्ताव।

मध्यम वर्गीय खरीदारों को राहत मिल सकती है।

होटल, बैंक्वेट हॉल और इवेंट पेमेंट: लिमिट 1 लाख रुपये

होटल, रेस्टोरेंट, बैंक्वेट हॉल, कन्वेंशन सेंटर या इवेंट मैनेजर को पेमेंट के मामले में भी बदलाव का सुझाव है।

अब पैन तभी देना होगा जब बिल 1 लाख रुपये से ज्यादा हो। अभी यह सीमा 50,000 रुपये है।

इसका फायदा:

शादी-ब्याह या पारिवारिक कार्यक्रमों में बार-बार पैन देने की जरूरत कम हो सकती है।

सामान्य होटल स्टे पर भी राहत।


नौकरीपेशा लोगों के लिए भी बदलाव

ड्राफ्ट नियमों में यह भी सुझाव है कि एम्प्लॉयर के जरिए मिलने वाले कुछ फायदों (बेनिफिट्स) की वैल्यू लिमिट बढ़ाई जाए।

इससे सैलरी और बेनिफिट स्ट्रक्चर को सरल बनाने में मदद मिल सकती है और नौकरीपेशा लोगों को अनुपालन में थोड़ी आसानी हो सकती है।

सिर्फ पैन नहीं, क्रिप्टो और डिजिटल रुपया भी शामिल

ड्राफ्ट नियमों में अन्य अहम प्रस्ताव भी हैं:

  • क्रिप्टो एक्सचेंज को इनकम टैक्स विभाग के साथ ट्रांजैक्शन की जानकारी साझा करने का प्रस्ताव। 

  • डिजिटल रुपया (CBDC) को वैध इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के रूप में मान्यता देने की बात।

  • यह कदम भविष्य के डिजिटल भुगतान ढांचे को मजबूत करने की दिशा में माना जा रहा है।


कब से लागू होंगे नए नियम?

  • ड्राफ्ट नियम बजट 2026 के बाद जारी किए गए हैं।

  • आम लोगों और स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगे गए हैं।

  • रिपोर्ट्स के मुताबिक, मार्च की शुरुआत में अंतिम नियम अधिसूचित हो सकते हैं।

  • नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 और उससे जुड़े नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे।

  • तब तक लोगों और व्यवसायों के पास तैयारी का समय रहेगा।

आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

अगर ड्राफ्ट नियम मौजूदा रूप में लागू होते हैं तो:

  • छोटे और रोजमर्रा के लेन-देन आसान हो सकते हैं।

  • बड़े ट्रांजैक्शन पर निगरानी और स्पष्ट होगी।

  • टैक्स अनुपालन की प्रक्रिया ज्यादा व्यवस्थित और पारदर्शी बन सकती है।

सरकार का फोकस छोटे खर्चों में राहत और बड़े लेन-देन पर सख्ती का संतुलन बनाने पर दिखता है। 1 अप्रैल 2026 से पहले इन प्रस्तावों पर अंतिम फैसला होगा, लेकिन फिलहाल यह बदलाव पैन से जुड़े नियमों में बड़ा मोड़ साबित हो सकते हैं।

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