सरकार LIC में बेचेगी 6.5% हिस्सेदारी, OFS के ऐलान के बाद शेयर 8% तक टूटा

सरकार OFS के जरिए LIC में 6.5% तक हिस्सेदारी बेचेगी। घोषणा के बाद कंपनी का शेयर 8% तक गिर गया। फ्लोर प्राइस 382 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है।

फोटोः सोशल मीडिया
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सरकार ने देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी (LIC) में अपनी हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है। इस घोषणा का असर मंगलवार को शेयर बाजार में तुरंत देखने को मिला और कंपनी का शेयर शुरुआती कारोबार में 7% से ज्यादा टूट गया। दोपहर तक शेयर करीब 8% की गिरावट के साथ 393.40 रुपये पर पहुंच गया, जबकि कारोबार के दौरान यह 390.50 रुपये के निचले स्तर तक फिसल गया। सरकार यह हिस्सेदारी ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए बेचेगी।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सचेंज में दी गई जानकारी के अनुसार भारत सरकार OFS के जरिए LIC में 6.5% तक हिस्सेदारी बेचेगी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य कंपनी में न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (Minimum Public Shareholding-MPS) से जुड़े नियामकीय नियमों को पूरा करना है। देश के बाजार नियामक ने LIC को 16 मई 2027 तक कम से कम 10% पब्लिक शेयरहोल्डिंग सुनिश्चित करने की मंजूरी दी है। यदि यह ऑफर पूरी तरह सफल रहता है तो कंपनी की पब्लिक शेयरहोल्डिंग मौजूदा 3.5% से बढ़कर 10% हो जाएगी।

OFS में क्या होगा, कितनी तय हुई शेयर की कीमत?

LIC के OFS में 2% इक्विटी हिस्सेदारी का बेस ऑफर रखा गया है। इसके अलावा सरकार के पास अतिरिक्त 4.5% हिस्सेदारी बेचने का विकल्प भी रहेगा। यह ऑफर मंगलवार को नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए और बुधवार को रिटेल निवेशकों के लिए खुलेगा।

सरकार ने OFS के लिए 382 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया है। इस कीमत पर 6.5% हिस्सेदारी का कुल मूल्य करीब 314.1 अरब रुपये बैठता है। डिसइन्वेस्टमेंट सेक्रेटरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि इस बिक्री से MPS के लक्ष्य समय से पहले हासिल करने में मदद मिलेगी।


2022 के IPO के बाद पहला डिसइन्वेस्टमेंट

LIC मई 2022 में देश के सबसे बड़े IPO में से एक के जरिए शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई थी। उस समय सरकार ने कंपनी में 3.5% हिस्सेदारी बेची थी। मौजूदा OFS, लिस्टिंग के बाद LIC में सरकार का पहला डिसइन्वेस्टमेंट होगा।

यह बिक्री ऐसे समय हो रही है जब केंद्र सरकार अपने विनिवेश कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ा रही है। सरकार ने वित्त वर्ष 2027 के लिए 800 अरब रुपये के विनिवेश और एसेट मोनेटाइजेशन का लक्ष्य रखा है। इस साल अब तक सरकार 212 अरब रुपये जुटा चुकी है। इसमें NHPC, कोल इंडिया और इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन (IRFC) जैसी कंपनियों में OFS के  जरिए हिस्सेदारी बिक्री भी शामिल है।

शेयर में भारी गिरावट क्यों आई?

सरकार की हिस्सेदारी बिक्री की घोषणा के बाद निवेशकों ने तेजी से मुनाफावसूली की, जिससे LIC के शेयर में तेज दबाव देखने को मिला। मंगलवार को शेयर करीब 8% टूटकर 393.40 रुपये पर आ गया और कारोबार के दौरान 390.50 रुपये के निचले स्तर तक पहुंच गया।

बड़ी कंपनियों के वित्तीय नतीजों में कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद मुनाफा घट जाता है। ऐसे मामलों में कंपनी की लागत, खर्च और अन्य वित्तीय कारण अहम भूमिका निभाते हैं। इसी तरह, किसी कंपनी में हिस्सेदारी बिक्री जैसी बड़ी कॉरपोरेट घोषणाएं भी शेयर की कीमत पर तत्काल असर डाल सकती हैं।