मोदी सरकार में मोबाइल हैंडसेट सेक्टर की टूटी कमर, दो साल में गईं 2.50 लाख लोगों की नौकरियां, बाजार पर चीन का कब्जा

मोदी सरकार के कार्यकाल में हर सेक्टर में नौकरियों को लेकर बुरा हाल है। हालात यह है कि युवाओं को नौकरियां मिलने की बजाए उल्टे नौकरियां जा रही हैं। इस बीच मोबाइल हैंडसेट सेक्टर से बुरी खबर आई है। जहां 2,50,000 से अधिक लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

मोदी सरकार में देश में बेरोजगारी दर रिकॉर्ड छू रही है। अब हालत यह है कि कई सेक्टरों में लोगों को अपनी नौकरियों से हाथ धोने के लिए मजबूर होना पड़ा रहा है। कई ऐसे सेक्टर है कि नौकरियों पर संकट बनी हुई है। ताजा मामला मोबाइल हैंडसेट सेक्टर का है। जहां बीते दो सालों में इस सेक्टर में काम करने वाले 2,50,000 से अधिक लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है।

उद्योग जगत के एक्सपर्ट मानते हैं कि इसके पीछे दो वजह हैं। पहली यह कि ई कॉमर्स वेबसाइट के बढ़ते असर की वजह से रिटेल दुकानों पर बेहद बुरा असर पड़ा है। दूसरी वजह यह है कि चीन की कंपनियों का भारतीय बाजारों में लगातार बढ़ते दबदबा है। इससे देसी मैन्युफैक्चरर्स पर चोट पड़ी है। इसलिए लोगों की नौकरियां जा रही हैं।

इकॉनमिक टाइम्स ने उद्योग जगत के लोगों से बात करने के बाद बताया कि नौकरी गंवाने वाले ज्यादातर लोग इन-शॉप प्रमोटर थे, जो रिटेल और डिस्ट्रीब्यूशन बिजनस का हिस्सा है। कुल वर्क फोर्स में 15 फीसदी कटौती की वजह तो हजारों छोटे बड़े फोन रिटेल शॉप का बंद हो जाना है। इसकी वजह से इन दुकानों में काम करने वाले ब्रांड प्रमोटर्स की नौकरियां चली गईं। कई ब्रांड्स अब प्रॉफिट पर अधिक ध्यान दे रहे हैं और इस वजह से उन्होंने रिटेल खर्च में कटौती की है। माइक्रोमैक्स और इंटेक्स जैसी कंपनियों ने मैन्युफैक्चरिंग डिपार्टमेंट से कई लोगों की छंटनी की है।

इंडियन सेल्युलर ऐंड इलेक्ट्रॉनिक्स असोसिएशन (आईसीईए) के प्रेसिडेंट पंकज महिंद्रू ने बताया, “दो सालों के अंदर 2.5 लाख से ज्यादा नौकरियां चली गई हैं। नौकरियों की जाने की वजह कई रिटेल शॉप बंद हो जाना है। जिससे इन शॉप में मौजूद रहने वाले प्रमोटरों की नौकरियां चली गईं। उन्होंने बताया कि हैंडसेट मैनुफैक्चरिंग के क्षेत्र में भी 20 से 25 हजार लोगों की नौकरियां गई हैं। हालांकि, रिटेल और डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है।

ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स असोसिएशन का दावा है कि आईसीईए का रिटेल जॉब लॉस का आंकड़ा 'कंजर्वेटिव' है यानी छंटनी कहीं अधिक हुई है। ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स असोसिएशन (एआईएमआरए) का कहना है कि किसी भी स्टोर पर कस्टमर को अटेंड करने वालों की संख्या पहले से लगभग आधी रह गई है। खरीदार अब ऑनलाइन खरीदारी करने में ज्यादा रुची दिखाते हैं।

गौरतलब है कि भारतीय बाजारों पर चीनी कंपनियों का 75 फीसदी कब्जा है। वहीं, रिलायंस जियो इन्फोकॉम के सस्ते 4जी फीचर फोन ने माइक्रोमैक्स और लावा जैसे स्थानीय मोबाइल निर्माताओं को हाशिए पर ढकेल दिया है। वहीं, इंटेक्स और कार्बन जैसी कंपनियां अब रेस कहां है, ये भी नहीं पता।

इससे पहले ऑटो सेक्टर को लेकर बुरी खबर आई थी। खबरों के मुताबिक, ऑटो सेक्टर में 10 लाख नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है। मोदी सरकार के ताजा फैसले से ऑटो सेक्टर में मंदी छाई है। कंपनियों ने उत्पादन कम कर दिया है। दरअसल गाड़ियों और उनके पार्ट्स पर 28 फीसदी जीएसटी लगता है। इससे गाड़ियों का उत्पादन मूल्य काफी बढ़ जाता है।

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एक रिपोर्ट के मुताबिक खबर सामने आई थी। मार्केटिंग, एडवरटाइजिंग, कृषि, एग्रोकेमिकल, टेलीकम्यूनिकेशंस, बीपीओ, आईटी, मीडिया, एंटरटेनमेंट, हेल्थकेयर और फार्मास्यूटिकल जैसे अहम क्षेत्रों में भी नौकरियों की कमी हो सकती है। मतलब साफ है कि मोदी सरकार में कई ऐसे सेक्टर है जहां लोगों की नौकरियां दाव पर लगी हुई है।

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