अर्थ जगत की खबरेंः HDIL संपत्तियों की बिक्री के आदेश पर ‘सुप्रीम’ रोक, हफ्ते के आखिरी दिन हांफता नजर आया बाजार

आरबीआई ने चालू वित्तवर्ष की आखिरी तिमाही में खुदरा महंगाई दर 6.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। आगामी वित्तवर्ष 2020-21 की पहली छमाही में मंहगाई दर 5.4 फीसदी से पांच फीसदी तक रहने का अनुमान लगाया गया है।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

PMC घोटाला: HDIL संपत्तियों की बिक्री के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को संकटग्रस्त पंजाब और महाराष्ट्र कोऑपरेटिव(पीएमसी) बैंक के बकाया चुकाने की सुविधा देने के उपाय के तहत बंबई हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें दिवालिया हो चुके हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एचडीआईएल) की संपत्तियों की बिक्री के आदेश दिए गए थे। भारतीय रिजर्व बैंक ने बंबई हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया था।

प्रधान न्यायाधीश एस.ए. बोबडे, न्यायमूर्ति बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने इस याचिका का संज्ञान लिया और आरबीआई की याचिका पर सरोश दमानिया समेत अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया। दमानिया ने पीएमसी बैंक के खाताधारकों के बकाये राशियों के भुगतान के लिए बंबई हाईकोर्ट का रुख किया था।

आरबीआई के अनुसार, पीएमसी बैंक ने एचडीआईएल समेत 44 समस्याग्रस्त ऋण खातों को छुपाने के लिए अपने कोर बैंकिंग प्रणाली का चालाकी से प्रबंध किया था। इन खातों तक सीमित कर्मचारियों की ही पहुंच थी। प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) और मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने एचडीआईएल प्रमोटर्स और बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

बंबई हाईकोर्ट ने एचडीआईएल की संपत्तियों के मूल्यांकन और बिक्री के लिए उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तीन सदस्यीय समिति गठित की थी। हाईकोर्ट को इसके जरिए बकायों के मिलने की उम्मीद थी, जिसे कंपनी द्वारा पीएमसी बैंक को दिया जाना था।

सितंबर 2019 को, आरबीआई ने पाया कि पीएमसी बैंक ने कथित रूप से एचडीआईएल को स्वीकृत किए गए 4,355 करोड़ रुपये ऋण को छिपाने के लिए फर्जी खातों का निर्माण किया था।

हाई कोर्ट में एचडीआईएल की संपत्तियों के शीघ्र निपटान के लिए आदेश जारी करने के लिए एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसे कई जांच एजेंसियों द्वारा जब्त किया गया था। याचिकाकर्ता का मानना था कि इन संपित्तयों के निपटारे से पीएमसी बैंक के जमाकर्ताओं को जल्द से जल्द भुगतान करने में मदद मिलेगी।

सेंसेक्स 164 अंक गिरकर हुआ बंद

देश के शेयर बाजारों में शुक्रवार को गिरावट दर्ज की गई। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 164.18 अंकों की गिरावट के साथ 41,141.85 पर और निफ्टी 39.60 अंकों की गिरावट के साथ 12,098.35 पर बंद हुआ। बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सुबह 88.38 अंकों की तेजी साथ 41,394.41 पर खुला और 164.18 अंकों या 0.40 फीसदी की गिरावट के साथ 41,141.85 पर बंद हुआ। दिन भर के कारोबार में सेंसेक्स ने 41,394.41 के ऊपरी स्तर पर व 41,073.36 के निचले स्तर को छुआ।

बीएसई के मिडकैप व स्मॉलकैप सूचकांक में तेजी रही। बीएसई के मिडकैप सूचकांक 69.76 अंकों की तेजी के साथ 15,904.71 पर और स्मॉलकैप सूचकांक 110.35 अंकों की तेजी के साथ 14,840.33 पर बंद हुआ।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 13.20 अंकों की तेजी के साथ 12,151.15 पर खुला और 39.60 अंकों या 0.33 फीसदी गिरावट के साथ 12,098.35 पर बंद हुआ। दिन भर के कारोबार में निफ्टी ने 12,154.70 के ऊपरी और 12,073.95 के निचले स्तर को छुआ।

बीएसई के 19 में से नौ सेक्टरों में तेजी रही। स्वास्थ्य सेवाएं (1.60 फीसदी), उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं (1.33 फीसदी), सूचना प्रौद्योगिकी (0.65 फीसदी), धातु (0.63 फीसदी) व प्रौद्योगिकी (0.50 फीसदी) में सर्वाधिक तेजी रही।

बीएसई के गिरावट वाले सेक्टरों में प्रमुख रहे -रियल्टी (1.93 फीसदी), ऑटो (1.06 फीसदी), ऊर्जा (0.94 फीसदी), दूरसंचार (0.90 फीसदी) व पूंजीगत वस्तुएं (0.77 फीसदी)।

SBI ने MCLR में की कटौती, आवास ऋण होगा सस्ता

देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक, एसबीआई ने फंड आधारित ब्याज दर की सीमांत लागत यानी एमसीएलआर में 0.5 फीसदी की कटौती की है, जो 10 फरवरी से लागू होगी। इसके बाद एसबीआई से आवास और ऑटो ऋण लेना सस्ता हो जाएगा। एमसीएलआर किसी वाणिज्यिक बैंक द्वारा तय वह न्यूनतम ब्याज दर है, जिस पर बैंक अपने ग्राहकों को कर्ज दे सकता है। एमसीएलआर से नीचे की ब्याज दर पर बैंक को कर्ज देने की अनुमति नहीं है।

आरबीआई द्वारा गुरुवार को प्रमुख ब्याज दर यानी रेपो रेट को यथावत रखने के निर्णय की घोषणा के एक दिन बाद शुक्रवार को एसबीआई ने एमसीएलआर में कटौती की घोषणा की। नई कटौती के बाद एसबीआई का एमसीएलआर 7.90 फीसदी से घटकर 7.85 फीसदी हो गया है। चालू वित्त वर्ष में एसबीआई की यह लगातार नौवीं कटौती है।

देश के सबसे बड़े बैंक ने मियादी जमा पर भी ब्याज दर में कटौती की है। एसबीआई ने रिटेल मियादी जमा पर ब्याज दरों में 10-50 आधार अंकों की कटौती की है, जबकि थोक मियादी जमा पर ब्याज दरों में 25-50 आधार अंकों की कटौती की है। बता दें कि आरबीआई ने गुरुवार को रेपो रेट 5.15 फीसदी पर बरकरार रखने का फैसला किया।


पेट्रोल, डीजल के दाम में इस महीने की सबसे बड़ी गिरावट

पेट्रोल और डीजल के दाम में शुक्रवार को इस महीने की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल के दाम में 21 से 22 पैसे जबकि डीजल के दाम में 24 से 26 पैसे प्रति लीटर तक की कटौती की है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बीते दिनों कच्चे तेल के दाम में आई भारी गिरावट के कारण देश में उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल के दाम में लगातार राहत मिल रही है। इस महीने में अब तक देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 59 पैसे प्रति लीटर सस्ता हो गया है, जबकि डीजल के दाम में उपभोक्ताओं को 60 पैसे लीटर की राहत मिली है।

इंडियन ऑयल की वेबसाइट के अनुसार, दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में पेट्रोल का दाम घटकर क्रमश: 72.68 रुपये, 75.36 रुपये, 78.34 रुपये और 75.51 रुपये प्रति लीटर हो गया है।

वहीं, चारों महानगरों में डीजल की कीमत भी घटकर क्रमश: 65.68 रुपये, 68.04 रुपये, 68.84 रुपये और 69.73 रुपये प्रति लीटर हो गई है।

तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल के दाम में शुक्रवार को दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में 21 पैसे जबकि चेन्नई में 22 पैसे प्रति लीटर की कटौती की। वहीं, डीजल के दाम में दिल्ली में 24 पैसे, कोलकाता और मुंबई में 25 पैसे जबकि चेन्नई में 26 पैसे प्रति लीटर की कटौती की गई है।

चीन में कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते वहां की अर्थव्यवस्था में सुस्ती छाने की आशंकाओं से बीते दो सप्ताह के दौरान अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में भारी गिरावट आई है। बेंचमार्क कच्चा तेल ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 10 डॉलर प्रति बैरल टूट गया है। हालांकि, शुक्रवार को तेल के दाम में पिछले सत्र के मुकाबले थोड़ी बढ़त देखने को मिली।

इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज यानी आईसीई पर ब्रेंट क्रूड के अप्रैल अनुबंध में पिछले सत्र के मुकाबले 0.36 फीसदी की तेजी के साथ 55.13 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार चल रहा था। वहीं, न्यूयार्क मर्के टाइल एक्सचेंज यानी नायमैक्स पर अमेरिकी क्रूड वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट के मार्च अनुबंध में पिछले सत्र से 0.27 फीसदी की तेजी के साथ 51.09 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार चल रहा था।

‘चालू वित्तवर्ष की आखिरी तिमाही में महंगाई दर 6.5 फीसदी रहने का अनुमान’

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चालू वित्तवर्ष की आखिरी तिमाही में (जनवरी से मार्च) के दौरान खुदरा महंगाई दर 6.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। चालू वित्तवर्ष की छठी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में आरबीआई ने यह पूवानुर्मान जारी किया है। वहीं, आगामी वित्तवर्ष 2020-21 की पहली छमाही में मंहगाई दर 5.4 फीसदी से पांच फीसदी तक रहने का अनुमान लगाया गया है, जबकि तीसरी तिमाही में 3.2 फीसदी रहने का अनुमान है। अगले वित्तवर्ष में महंगाई की ये अनुमानित दरें आरबीआई द्वारा लक्षित चार फीसदी से दो फीसदी की मार्जिन के तहत है, जिससे केंद्रीय बैंक को अल्पावधि में प्रमुख ब्याज दर में कटौती करने में सहूलियत मिल सकती है।

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति यानी एमपीसी का अनुमान है कि दिसंबर में महंगाई की जो ऊंची दर दर्ज की गई, उसमें आने वाले दिनों में नरमी आ सकती है और चालू वित्तवर्ष की अंतिम तिमाही में यह पांच फीसदी तक रह सकती है, क्योंकि प्याज की खरीफ व रबी फसल की आवक बढ़ने से इसकी कीमत में भारी गिरावट आई है।

खाद्य वस्तुओं की कीमतों में अप्रत्याशित इजाफा होने से दिसंबर 2019 में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 7.35 फीसदी हो गई, जो एक महीने पहले (नवंबर, 2019 में) 5.54 फीसदी थी।

दिसंबर के दौरान सब्जियों खासतौर से प्याज के दाम में बेतहाशा वृद्धि होने के साथ-साथ दालों और मछलियों के दाम में भी काफी इजाफा हुआ। हालांकि उपभोक्ता मूल्य आधारित महंगाई दर में वृद्धि दर्ज की गई लेकिन खाद्य वस्तुओं और ईंधनों को छोड़कर महंगाई दर महज 3.8 फीसदी रही।

आरबीआई ने कहा, “बेमौसम बरसात से अगैती फसल खराब होने के बावजूद सब्जियों का उत्पादन बढ़ने से खाद्य वस्तुओं के दाम में नरमी बनी रह सकती है। वहीं, खासतौर से दूध की उत्पादन लागत बढ़ने और खरीफ सीजन में दाल का उत्पादन घटने से सब्जियों के इतर खाद्य वस्तुओं के दाम में हाल के दिनों में हुई वृद्धि बनी रह सकती है।”

केंद्रीय बैंक ने कहा कि इन कारकों से कुल मिलाकर खाद्य महंगाई थोड़ी ऊंची रह सकती है। वहीं, भूराजनीतिक तनावों के कारण कच्चे तेल के दाम में उतार-चढ़ाव रह सकता है। मौद्रिक नीति समिति ने कहा कि सेवा की इनपुट लागत में हाल के महीनों के दौरान वृद्धि हुई है।

छह सदस्यीय एमपीसी ने कहा कि वैश्विक और घरेलू कारकों से देश के वित्तीय बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। इसका असर महंगाई आउटलुक पर असर पड़ सकता है। हालांकि वित्तवर्ष 2021 की तीसरी तिमाही में बेस इफेक्ट (आधारभूत प्रभाव) अनुकूल रहेगा।

आरबीआई ने कहा, “इन कारकों को ध्यान में रखते हुए और दक्षिण-पश्चिम मानसून के 2020-21 में सामान्य रहने के अनुमान के आधार पर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर चालू वित्तवर्ष की चौथी तिमाही में 6.5 फीसदी रह सकती है, जबकि अगले वित्तवर्ष 2020-21 की पहली छमाही में 5.4 फीसदी से पांच फीसदी और तीसरी तिमाही में 3.2 फीसदी रह सकती है।”

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