RBI की मौद्रिक नीति कमेटी की बैठक शुरू, ब्याज दरों की होगी समीक्षा, जानें क्या है विशेषज्ञों की राय

आरबीआई एमपीसी की द्विमासिक बैठक ऐसे समय पर हो ही है, जब दुनिया वैश्विक अस्थिरता, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, केंद्रीय बैंकों के ब्याज दर बढ़ाने और बॉन्ड यील्ड के उच्च स्तर पर जाने जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है।

RBI ने ब्याज दर 5.25% पर बरकरार रखी
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति कमेटी (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक की शुरुआत सोमवार से हो गई है। इस बैठक में ब्याज दरों (रेपो रेट) के साथ देश की आर्थिक स्थिति की समीक्षा की जाएगी। 

इस बैठक के फैसलों का ऐलान बुधवार को आबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की ओर से सुबह 10 बजे किया जाएगा।

रेपो रेट को लेकर विश्लेषकों की राय 

आरबीआई एमपीसी की द्विमासिक बैठक ऐसे समय पर हो ही है, जब दुनिया वैश्विक अस्थिरता, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, केंद्रीय बैंकों के ब्याज दर बढ़ाने और बॉन्ड यील्ड के उच्च स्तर पर जाने जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है।

कई विश्लेषकों का मानना है कि छह सदस्यों वाली आरबीआई एमपीसी अगस्त में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रख सकती है।


एसबीआई रिसर्च का क्या है अनुमान?

एसबीआई रिसर्च का अनुमान है कि आरबीआई अपनी अगली बैठक में पॉलिसी रेट्स को अपरिवर्तित रख सकता है, क्योंकि अगले दो तिमाहियों में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) 5 प्रतिशत से ऊपर रहने की उम्मीद है, जबकि घरेलू आर्थिक गतिविधि में मजबूती के संकेत मिले हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 7 प्रतिशत से अधिक हो सकती है, जो पहले के अनुमानों से अधिक है। इसके अलावा, तेल की कीमतों में अस्थिरता, रुपए पर दबाव और बाहरी पूंजी प्रवाह में उतार-चढ़ाव के कारण केंद्रीय बैंक से स्पष्ट रूप से नरम टिप्पणी आने की संभावना नहीं है।

हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि जुलाई में मजबूत पूंजी प्रवाह, विदेशी मुद्रा भंडार में सुधार, बेहतर मानसून की स्थिति और लगभग सामान्य जलाशय स्तरों के कारण घरेलू अर्थव्यवस्था के आधारभूत कारकों में सुधार हुआ है।

पिछली बैठक में रेपो रेट नहीं बदला गया

इससे पहले जून में हुई आरबीआई एमपीसी की बैठक ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखा था और अपने पॉलिसी रुख को न्यूट्रल रखा था। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान भी संशोधित कर 6.6 प्रतिशत कर दिया था।

आईएएनएस के इनपुट के साथ

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