RBI MPC Meeting: घर और गाड़ी का लोन लेना होगा महंगा? साढ़े तीन साल बाद आज बढ़ सकती है ब्‍याज दरें

बाजार के कई जानकारों का अनुमान है कि आरबीआई इस बैठक में रेपो रेट को 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ा सकता है।

 फोटो: IANS
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  • 5 अक्‍टूबर से चली मॉनिटरी पॉलिसी मीटिंग के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आज पॉलिसी दरों का ऐलान करेगा

  • आरबीआई 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर सकता है, जिसके बाद रेपो रेट 5.5 फीसदी हो जाएगा।

  • जुलाई में 4.45 फीसदी से बढ़कर अगस्त में खुदरा महंगाई 4.82 फीसदी पहुंची है, जिससे आरबीआई पर दबाव बढ़ा है।

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की आज 7 अक्टूबर को होने वाली बैठक पर बाजार की खास नजर है। लंबे समय से ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन बदलते आर्थिक हालात के बीच इस बार तस्वीर अलग नजर आ रही है। बाजार में चर्चा है कि आरबीआई रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो रेपो रेट बढ़कर 5.5 फीसदी हो जाएगा। फरवरी 2023 के बाद यह पहली बार होगा जब आरबीआई ब्याज दरों में बढ़ोतरी करेगा।

25 बेसिस प्वाइंट बढ़ सकता है रेपो रेट

बाजार के कई जानकारों का अनुमान है कि आरबीआई इस बैठक में रेपो रेट को 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ा सकता है। पिछली कई मौद्रिक नीति बैठकों में केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों को स्थिर रखा था, लेकिन अब महंगाई से जुड़ी चिंताओं ने नीति निर्माताओं के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।

कुछ विशेषज्ञों को लगता है कि केंद्रीय बैंक भविष्य में एक और रेट हाइक की संभावना खुली रख सकता है। वहीं, यह भी महत्वपूर्ण होगा कि आरबीआई अपने मौजूदा 'न्यूट्रल' रुख में कोई बदलाव करता है या नहीं।

महंगाई बनी आरबीआई के लिए बड़ी चिंता

ब्याज दरों को लेकर आरबीआई के सामने सबसे बड़ी चुनौती महंगाई की है। केंद्रीय बैंक ने अपनी पिछली समीक्षा में वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान 5 फीसदी रखा था। हालांकि, हाल के महीनों में महंगाई के आंकड़ों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। जुलाई में खुदरा महंगाई 4.45 फीसदी रही थी, जो अगस्त में बढ़कर 4.82 फीसदी हो गई। ऐसे में अब बाजार की नजर इस बात पर होगी कि आरबीआई अपने महंगाई अनुमान में कोई बदलाव करता है या नहीं।

कच्चे माल और कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी अगर अन्य रोजमर्रा की वस्तुओं तक पहुंचती है, तो आने वाले समय में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।

बैंकिंग सिस्टम की अतिरिक्त नकदी भी अहम मुद्दा

मौद्रिक नीति के साथ-साथ बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी यानी लिक्विडिटी भी आरबीआई के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। सितंबर में बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त लिक्विडिटी करीब 12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी। इस अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक ने ओएमओ बिक्री और वीआरआरआर जैसे उपायों का इस्तेमाल किया। इसके बाद सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त लिक्विडिटी घटकर करीब 4 से 6 लाख करोड़ रुपये के दायरे में आ गई।

आंकड़ों के अनुसार, 6 अक्टूबर को बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी सरप्लस करीब 5.03 लाख करोड़ रुपये था। ऐसे में आज की बैठक में बाजार की नजर सिर्फ रेपो रेट पर नहीं, बल्कि लिक्विडिटी को लेकर आरबीआई के रुख पर भी रहेगी।

आगे की राह पर आरबीआई का संकेत होगा अहम

इस बैठक में अगर रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी होती है, तो बाजार के लिए यह फैसला पूरी तरह अप्रत्याशित नहीं होगा। असली असर इस बात से तय होगा कि आरबीआई आने वाले महीनों में ब्याज दरों को लेकर क्या संकेत देता है।