खुलासा: गाजे-बाजे के साथ लांच हुई मोदी सरकार की मुद्रा योजना का सिर्फ 20 फीसदी पैसा ही लगा नए कारोबार में

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना सर्वे पर तैयार किए गए ड्राफ्ट रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में कहा गया है कि बांटे गए कुल मुद्रा लोन में से केवल 20 फीसदी का इस्तेमाल नए कारोबार शुरू करने के लिए हुआ।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

केंद्र की मोदी सरकार की एक और महात्वाकांक्षी योजना के मकसद पर सवाल उठ रहे हैं। देश में रोजगार सृजन के मकसद से नया कारोबार शुरू करने के लिए आर्थिक मदद के तहत मुद्रा लोन योजना की शुरुआत मोदी सरकार ने साल 2015 में की थी। लेकिन इस योजना पर तैयार एक ताजा ड्राफ्ट रिपोर्ट से सवाल खड़ा हो गया है कि क्या यह योजना अपने मकसद में कामयाब हुई है।

मुद्रा योजना सर्वे पर यह ड्राफ्ट रिपोर्ट आने वाले दिनों में सार्वजनिक की जाएगी, लेकिन सूत्रों के अनुसार ड्राफ्ट रिपोर्ट में कहा गया है कि इस य़ोजना के तहत जितने भी मुद्रा लोन बांटे गए उनमें से केवल 20 फीसदी का इस्तेमाल नए कारोबार शुरू करने में हुआ है। ड्राफ्ट रिपोर्ट में कहा गया है कि 80 फीसदी मुद्रा लोन ऐसे लोगों को दिए गए, जो पहले कारोबार चला रहे थे। ऐसे लोग मुद्रा लोन के जरिये अपने कारोबार का विस्तार चाहते थे।


इस रिपोर्ट से नए रोजगार सृजन का मुद्रा योजना का मुख्य उद्देश्य पूरा होता नहीं दिख रहा। इस योजना के तहत ज्यादातर कर्ज ‘शिशु श्रेणी’ यानि 50,000 रुपए तक के बांटे गए, जो कि बांटे गए कुल मुद्रा लोन का 42 फीसदी है। इसके बाद 34% लोन ‘किशोर श्रेणी’ के यानि 50,000 से 5 लाख रुपए तक के कर्ज बांटे गए और इसके 24 प्रतिशत लोन ‘तरुण श्रेणी’ यानि 5 लाख से 10 लाख रुपए तक के बांटे गए।

बता दें कि मोदी सरकार की महात्वाकांक्षी योजनाओं में से एक मुद्रा लोन योजना का उद्घाटन 8 अप्रैल 2015 को स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। इस योजना के बारे में दावा किया गया था कि इस योजना के तहत नए कारोबार के लिए लोगों को प्रोत्साहन मिलेगा जिससे देश में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा। योजना के तहत रोजगार सृजन के मकसद के तहत कारोबार शुरू करने के लिए निजी और सरकारी बैंकों और वित्तीय संस्थानों से 50,000 से लेकर 10 लाख रुपए तक के कर्ज देने की व्य़वस्था थी।

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