अर्थ जगत की 5 बड़ी खबरें: फेक न्यूज पर भड़के रतन टाटा और 1 महीने में 1 अरब डॉलर घट गई डोनाल्ड ट्रंप की संपत्ति

देश के दिग्गज कारोबारी रतन टाटा एक फेक न्यूज पर भड़क गए हैं। दरअसल, इस फेक न्यूज में रतन टाटा के नाम से एक बयान लिखा गया है। कोरोना के कहर के बीच जारी लॉकडाउन से दुनिया के अमीर लोगों को भी काफी नुकसान हुआ है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संपत्ति पिछले एक महीने में 1 अरब डॉलर घट गई है।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

फेक न्यूज पर भड़के रतन टाटा, बोले- ये बात मैंने न कहीं लिखी, न ही बोली

देश के दिग्गज कारोबारी रतन टाटा एक फेक न्यूज पर भड़क गए हैं। दरअसल, इस फेक न्यूज में रतन टाटा के नाम से एक बयान लिखा गया है। रतन टाटा का हवाला देते हुए 'वेरी मोटिवेशनल ऐट दिस आवर' नाम के शीर्षक वाले बयान में इकोनॉमी पर कोरोना वायरस के प्रभाव का जिक्र किया गया है। अब रतन टाटा ने सोशल मीडिया पर इस खबर को शेयर करते हुए इसकी सच्चाई बताई है।

क्या है सच्चाई?

रतन टाटा ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लिखा, 'ये बातें न तो मैंने कही हैं और न ही लिखी हैं. मैं आप सभी से अपील करता हूं कि व्हाट्सऐप और अन्य मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रहे इस पोस्ट की सत्यता का पता लगाएं।' रतन टाटा ने आगे बताया कि मुझे कुछ कहना होता है तो मैं अपने आधिकारिक चैनल के जरिए कहता हूं। उम्मीद करता हूं कि आप लोग सुरक्षित होंगे और अपना खयाल रख रहे होंगे।'

लॉकडाउन से 1 महीने में 1 अरब डॉलर घट गई डोनाल्ड ट्रंप की संपत्ति , दुनिया के 1001वें अमीर

कोरोना के कहर के बीच जारी लॉकडाउन से दुनिया के अमीर लोगों को भी काफी नुकसान हुआ है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संपत्ति पिछले एक महीने में 1 अरब डॉलर घट गई है। फोर्ब्स द्वारा जारी बिलिनेयर 2020 की सूची के मुताबिक वह 2.1 अरब डॉलर के नेटवर्थ के साथ दुनिया के 1001वें सबसे अमीर शख्स हैं।

असल में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप एक बड़े रियल एस्टेट कारोबारी हैं जिनका कारोबार अमेरिका से लेकर भारत तक फैला हुआ है। फोर्ब्स के अनुसार इस साल 1 मार्च से 18 मार्च 2020 के बीच उनकी कंपनियों बॉस्टन प्रॉपर्टीज और वोर्नाडो रियलिटी ट्रस्ट के शेयरों में करीब 37 फीसदी की गिरावट आई है। जाहिर है कि यह कोरोना के प्रकोप की वजह से हुआ है।

चीन में खाद्य कृषि उत्पादों के दामों में लगातार गिरावट

चीनी वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता काओ फंग ने कहा कि अभी तक सात प्रांतों के 20 से अधिक शहरों ने उपभोग की निहित शक्ति को उत्तेजित करने के लिये तरह-तरह के उपभोग कूपन जारी किये। साथ ही उन्होंने इस पर बल दिया कि महामारी से चीन में उपभोग की दीर्घकालीन स्थिरता व निरंतर उन्नति का विकास रुझान नहीं बदलेगा। काओ फंग ने कहा कि 30 मार्च से 5 अप्रैल तक यानी पिछले हफ्ते में सारे चीन में खाद्य कृषि उत्पादों के दाम पहले से 1 प्रतिशत कम हुए हैं, जो निरंतर रूप से छह हफ्तों तक गिरावट रही। उनमें पूरे देश के अनाज का दाम मुख्य तौर पर स्थिर है। खाद्य तेल के दामों में थोड़ा उतार-चढ़ाव हुआ है, लेकिन मांस के दाम में गिरावट रही।

आंकड़ों के अनुसार सब्जियों के दाम में मौसमी गिरावट के साथ 30 किस्मों वाली सब्जियों के औसत थोक मूल्य में 0.6 प्रतिशत की गिरावट आयी। सेब, तरबूज, केला, नाशपाती, अंगूर व साइट्रस समेत छह फलों का औसत थोक मूल्य 0.1 प्रतिशत कम हुआ।

मछुआरों को राहत, लॉकडाउन में मछलीपालन, विपणन की छूट

केंद्र सरकार ने शुक्रवार को मछलीपालन और विपणन से संबंधित कार्यों को लॉकडाउन में छूट प्रदान कर देश के मछुआरों को बड़ी राहत प्रदान की। गृह मंत्रालय द्वारा 24 मार्च को जारी दिशानिर्देश के तहत शुक्रवार को जोड़ी गई पांचवीं परिशिष्ट में मछलीपालन, मछली पकड़ने और उसका विपणन करने समेत मत्स्यपालन उद्योग की तमाम गतिविधियों को छूट प्रदान की गई है जिनमें कोल्ड चेन, हैचरी, फीड प्लांटस आदि भी शामिल हैं।

कोरोनावायरस के प्रकोप पर लगाम लगाने के लिए देशभर में जारी लॉकडाउन के दौरान लोगों को घरों से निकलने की इजाजत नहीं है, लेकिन खाने-पीने की चीजों समेत तमाम आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई को जारी रखने की अनुमति दी गई है। इसके तहत कृषि और इससे संबंधित क्षेत्र की गतिविधियों को भी छूट दी गई है।

लेखा संबंधी 3 संस्थानों ने दान किए 28 करोड़ 80 लाख रुपये

वैश्विक महामारी कोविड-19 से प्रभावित लोगों की मदद के लिए लेखा संबंधी तीन संस्थानों- इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया, इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेट्ररीज ऑफ इंडिया और इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया ने पीएम केयर्स फंड में 28 करोड़ 80 लाख रुपये का योगदान दिया है। भारत में वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से निपटने के लिए 28 मार्च को प्रधानमंत्री आपात स्थिति नागरिक सहायता और राहत कोष (पीएम केयर्स फंड) बनाया गया था। यह समर्पित राष्ट्रीय कोष कोविड-19 महामारी से उत्पन्न किसी भी प्रकार की आपातकालीन या संकट की स्थिति से निपटने और प्रभावित लोगों को राहत प्रदान करने के प्राथमिक उद्देश्य से बनाया गया है।

28 करोड़ 80 लाख रुपये की इस सहायता राशि में सबसे अधिक राशि इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया की ओर से दी गई है।

आईएएनएस के इनपुट के साथ

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