इस्लामाबाद वार्ता फेल होने के बाद तेल बाजार में भूचाल, कीमतें 100 डॉलर पार
अमेरिका-ईरान वार्ता फेल होते ही तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार पहुंच गईं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी का ऐलान किया है, जिससे ग्लोबल टेंशन बढ़ गई।

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में 21 घंटे चली शांति वार्ता पूरी तरह विफल होने के बाद हालात तेजी से बिगड़ते दिख रहे हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी का ऐलान कर दिया है, जबकि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेज उछाल दर्ज किया गया है।
शांति वार्ता फेल, आरोप-प्रत्यारोप तेज
एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामाबाद में हुई अमेरिका-ईरान वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। अमेरिकी राष्ट्रपति जेडी वेंस ने इसे ईरान के लिए बेहद खराब बताया। वहीं, ईरान ने अमेरिका पर तीखा पलटवार किया। दोनों देशों के बीच अचानक बढ़े तनाव का सीधा असर वैश्विक बाजार पर पड़ा है।
इस बीच डोनाल्ड ट्रंप भी आक्रामक रुख में नजर आ रहे हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ईरान के खिलाफ फिर से बड़े पैमाने पर बमबारी अभियान शुरू करने पर विचार कर रहे हैं।
तेल बाजार में उछाल, कीमतें 100 डॉलर के पार
तनाव बढ़ने के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया। WTI क्रूड ऑयल 8 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 104.24 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि ब्रेंट क्रूड की कीमत 7 फीसदी से अधिक बढ़कर 102.29 डॉलर प्रति बैरल हो गई।
नेचुरल गैस की कीमतों में भी करीब 2 फीसदी की तेजी दर्ज की गई और यह 2.684 डॉलर तक पहुंच गई। इससे पहले दो हफ्तों के सीजफायर के बाद कीमतों में गिरावट आई थी और ब्रेंट क्रूड जून डिलीवरी के लिए 95 डॉलर तक आ गया था।
होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा संकट का केंद्र
तनाव का सबसे बड़ा असर होर्मुज स्ट्रेट पर देखा जा रहा है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल परिवहन को नियंत्रित करता है।
ईरान युद्ध के दौरान इस स्ट्रेट के बंद होने से पहले भी बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। फरवरी के अंत में ब्रेंट क्रूड जहां करीब 70 डॉलर था। वहीं, युद्ध शुरू होते ही यह 119 डॉलर तक पहुंच गया था।
सीजफायर के बावजूद इस रूट पर जहाजों की आवाजाही सीमित रही है। मरीन ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, इस दौरान करीब 40 से ज्यादा कमर्शियल जहाज ही यहां से गुजर पाए हैं।
ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी का ऐलान
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने स्पष्ट किया है कि ईरानी पोर्ट्स और तटीय इलाकों में आने-जाने वाले सभी देशों के जहाजों पर यह नाकेबंदी लागू होगी। हालांकि, गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच यात्रा करने वाले जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दी जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव और बढ़ता है, तो वैश्विक स्तर पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है और तेल-गैस संकट गहरा सकता है।
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