त्योहारों से पहले महंगाई की मार, थोक महंगाई दर में उछाल, जानें आप पर क्या होगा असर

खाद्य पदार्थ की ऊंची कीमतों, प्राइमरी आर्टिकल्स और निर्मित वस्तुओं की ज्यादा कीमतों ने भारत की सितंबर थोक मुद्रास्फीति (डब्ल्यूपीआई) को तेज कर दिया है।

फोटो: सोशल मीडिया
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रवि प्रकाश

खाद्य पदार्थ की ऊंची कीमतों, प्राइमरी आर्टिकल्स और निर्मित वस्तुओं की ज्यादा कीमतों ने भारत की सितंबर थोक मुद्रास्फीति (डब्ल्यूपीआई) को तेज कर दिया है। नतीजतन, थोक मूल्यों पर आधारित मुद्रास्फीति की वार्षिक दर सितंबर में बढ़कर 1.32 प्रतिशत हो गई जो अगस्त में 0.16 प्रतिशत थी। वहीं बीते साल सितंबर में थोक महंगाई दर 0.33 फीसदी थी। भारत सरकार के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने बुधवार को इसके आंकड़े जारी किए हैं।

सितंबर में खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति 6.92 फीसदी रही, जो अगस्त में 4.07 फीसदी थी। ईंधन और बिजली की बात करें, तो सितंबर में यह नकारात्मक 9.54 फीसदी रही। अगस्त में यह आंकड़ा नकारात्मक 9.68 था। इस दौरान विनिर्मित उत्पादों की मुद्रास्फीति 1.61 फीसदी रही, जे अगस्त में 1.27 फीसदी हो गई थी। प्राथमिक उत्पादों की मुद्रास्फीति अगस्त में 1.60 फीसदी थी। लेकिन सितंबर में यह 5.10 फीसदी हो गई।

इससे पहले सोमवार को सरकार ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा महंगाई के आंकड़े जारी किए थे। खुदरा महंगाई दर सितंबर में 7.34 फीसदी रही है। पिछले महीने अगस्त में यह 6.69 फीसदी थी। देश में उपभोक्ता मुद्रास्फीति, जो अगस्त में 6.69 प्रतिशत पर थी, सितंबर में 7.34 फीसदी हो गई है। इससे पहले जुलाई में ये 6.73 फीसदी थी।

भारत में महंगाई दर बाजारों में सामान्य तौर पर कुछ समय के लिए वस्तुओं के दामों में उतार-चढ़ाव महंगाई को दर्शाती है। जब किसी देश में वस्तुओं या सेवाओं की कीमतें अधिक हो जाती हैं, तो इसको महंगाई कहते हैं। उत्पादों की कीमत बढ़ने से परचेजिंग पावर प्रति यूनिट कम हो जाती है। थोक मूल्य सूचकांक के आधार पर ही वित्तीय और मौद्रिक नीतियों के फैसले लिए जाते हैं।

Published: 14 Oct 2020, 1:49 PM
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