मध्य प्रदेश में लगेगी ‘जय हिंद’ की हाजिरी 

मध्य प्रदेश सरकार में शिक्षा मंत्री कुंवर विजय शाह ने स्कूली बच्चों के लिए फरमान जारी किया है। अब बच्चों को हाजिरी के दौरान ‘यस सर या यस मैडम’ की बजाय जय हिंद बोलना होगा।

फोटो: Google 
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नवजीवन डेस्क

बीजेपी शासित राज्य मध्य प्रदेश में एक और तुगलकी फरमान जारी हुआ है। मध्य प्रदेश के शिक्षा मंत्री कुंवर विजय सिंह ने कहा कि सतना के सरकारी स्कूलों में अब बच्चों की हाजिरी के दौरान बच्चें ‘यस सर या यस मैडम’ नहीं बोलेंगे। इसकी जगह पर स्कूली बच्चों को जय हिंद बोलना होगा। सतना जिले के सभी सरकारी स्कूलों में एक अक्टूबर से इसे लागू करने का आदेश जारी किया गया है।

कुंवर विजय शाह ने कहा कि अगर ये आदेश सफल रहा तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मंजूरी के बाद पूरे प्रदेश में इसे लागू किया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई है कि निजी स्कूल भी इसे जरूर लागू करेंगे क्योंकि यह देशभक्ति से जुड़ा मामला है। हालांकि उन्होंने प्राइवेट स्कूलों में इसे जबरन लागू करने की बात से इंकार किया है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति का जज्बा बढ़े, इसके लिए सभी सरकारी स्कूलों में हर रोज ध्वजारोहण और राष्ट्रगान गाए जाएं।

कुंवर विजय शाह राज्य के स्कूलों में नए-नए प्रयोग करते रहे हैं। इससे पहले भी एक कार्यक्रम के दौरान कंपनियों के नाम पर स्कूलों का नाम रखने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि जो कंपनी ज्यादा पैसा देगी,उसके नाम पर स्कूल का नाम एक साल के लिए रखा जाएगा। अगले साल जो कंपनी ज्यादा पैसा देगी तो फिर उसके नाम पर स्कूल का नाम हो जाएगा। शिक्षा मंत्री ने यह भी दावा किया कि उनके इस फैसले से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी सहमत हैं।

स्कूलों में जय हिंद की हाजिरी पर सामाजिक कार्यकर्ता विनीत तिवारी का कहना है, ‘राष्ट्रवाद के प्रतीक को जब आप बच्चों के मन में ताकत से लागू करते हैं तो इससे संकीर्णता बढ़ती है। उनका कहना है कि स्कूलों में वंदेमातरम् या जय हिंद को सख्ती से लागू करने से ज्यादा जरूरी बच्चों की पढ़ाई है। स्कूलों में बच्चों को तुगलकी फरमान से आजादी मिलनी चाहिए।’

कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा ने बीजेपी के तुगलकी फरमान को लोकतंत्र की तौहीन बताया है। उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘जिन लोगों ने अंग्रेजों से भत्ता लिया हो, जिन्होंने आजादी की लड़ाई का विरोध किया हो, वे किस मुंह से ऐसा कह रहे हैं। उन्हें यह कहने का कोई अधिकार नहीं है।’

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