गिल्टी माइंड्सः ऊलजलूल वेब सीरीजों से कहीं आगे, हिंदी सिनेमा जगत में युगांतकारी साबित होगी

इस वेब सीरीज की खासियत है कि इसके हर एपिसोड में जो विषय हैं, वह हमारी सोच से कहीं आगे हैं। एक डेटिंग एप, स्वचलित कार, कास्टिंग काउच, लिंगानुपात, पानी और गेम्स को लेकर मुकदमा, यह सब वो विषय हैं जो आने वाले कल के लिए अहम हैं लेकिन हम इन पर आंखे मूंदे हैं।

फोटोः सोशल मीडिया
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हिमांशु जोशी

साल 2016 में शैफाली भूषण के निर्देशन में फिल्म आई थी 'जुगनी'। फिल्म और शैफाली को उतनी चर्चा नही मिली जितनी मिलनी चाहिए थी। अपनी पहचान बनाने की जिद में शैफाली ने 'गिल्टी माइंड्स' बनाने की ठानी, पर कोरोना ने उनके सामने मुसीबत खड़ी कर दी। हिंदी मनोरंजन उद्योग में पहली बार इतना जबरदस्त कंटेंट लाने वाली शैफाली की हिम्मत कोरोना से बिल्कुल भी नहीं टूटी और उन्होंने 'गिल्टी माइंड्स' दर्शकों तक पहुंचा ही दी।

वकीलों के परिवार पर आधारित इस पूरी वेब सीरीज में लगभग चार प्रेम कहानियां साथ चलती हैं, जिसमें एक समान लिंग के बीच भी है। कोर्ट में नए-नए केसों में वकीलों का आमना-सामना होता है, जिनकी जिरह देखने लायक है। दर्शक हर केस में खुद को ऐसा महसूस करेंगे जैसे वह भी केस से जुड़े हैं और कोर्टरूम में बैठे हैं।

वेब सीरीज में निर्देशक ने वकीलों के निजी जीवन को बखूबी समझाया है, साथ ही वकीलों और उनके मुवक्किलों के आपसी सम्बन्धों को भी बड़ी करीबी से दिखाया गया है। निर्देशक ने सीरीज के कलाकारों द्वारा एक दूसरे को किए गए स्पर्शों के जरिए दर्शकों के दिल को भी छू लिया है।

श्रिया पिलगांवकर फिल्म फैन में शाहरुख खान के साथ दिख चुकी हैं पर उन्होंने बॉलीवुड में अपने काम से कोई धमाल नही मचाया था। यहां पर अपने सिद्धांतों पर चलने वाली वकील का किरदार निभा उन्होंने यह काम पूरा कर लिया है। वरुण मित्रा लगभग दस साल से बॉलीवुड में हैं और तेजस जैसी फिल्म में भी दिखे, लेकिन 'गिल्टी माइंड्स' वेब सीरीज के जरिए ही भविष्य में उन्हें जाना जाएगा।


म्यूजिक वीडियोज में दिख चुकी शुभांगी को इस वेब सीरीज की खोज कहा जा सकता है, उनकी आवाज और चेहरा दर्शकों के दिलों में छप जाएगा। सतीश कौशिक, कुलभूषण खरबंदा, वीरेंद्र सक्सेना, अरुण कुमार कालरा ने बेहतरीन काम किया है, लेकिन निर्देशक शैफाली भूषण अगर वीरेंद्र सक्सेना और अरुण कुमार कालरा को स्क्रीन पर ज्यादा मौका देतीं तो बेहतर रहता।

सीरीज में दिल्ली, मुंबई और पहाड़ों की खूबसूरती हूबहू दिखाई गई है, जिससे कहा जा सकता है कि वेब सीरीज का छायांकन बेमिसाल है। पहाड़ के सीढ़ीनुमा खेतों को देखना आंखों को रिझा जाता है। कोर्टरूम में मौजूद लोगों पर तेजी से भागता कैमरा वहां के दृश्यों को और भी दिलचस्प बना देता है।

हर एपिसोड के इंट्रोडक्शन में बजने वाला बैकग्राउंड स्कोर उसमें दिखाए जाने वाले ग्राफिक्स के साथ हर आने वाले एपिसोड का प्लॉट तैयार कर देता है। वकील और मुवक्किल की आपसी बातचीत के दौरान बजता बैकग्राउंड स्कोर दृश्य में और अधिक रोचकता पैदा करने में कामयाब रहा है।

निर्देशक की ये खासियत है कि वो निर्जीव वस्तुओं से भी दृश्यों में जान भर देती हैं जैसे एक पेंटिंग के जरिए ही वह वकीलों के पेशे पर चर्चा कराती हैं। ऐसे ही एक दृश्य में कॉफी में दिल दिखाकर ही रिश्तों की गर्मी का अहसास दिला जाती हैं। मुंबई में समुद्र की पीछे सूरज के छिपने वाला दृश्य अमेजन प्राइम के सब्सक्राइबर्स को 'वाह' कहने को मजबूर कर देगा। श्रिया के नृत्य वाला दृश्य रिश्तों और काम की उधेड़बुन से आजादी पाने वाला महसूस होता है।


इस वेब सीरीज की खासियत यह है कि इसके हर एपिसोड में जो विषय है, वह हमारी सोच से कहीं आगे हैं। यह ठीक वैसे ही हैं जैसे हम हॉलीवुड के विषय में सोचते हैं। एक डेटिंग एप को लेकर मुकदमा, स्वचलित कार को लेकर मुकदमा, कास्टिंग काउच, लिंगानुपात, पानी और गेम्स को लेकर मुकदमा, यह सब वो विषय हैं जो आने वाले कल के लिए महत्वपूर्ण हैं लेकिन हम इस पर आंखे मूंदे हुए हैं।

निर्देशक शैफाली ने जिस तरह से इन केसों का चित्रण किया है वह काबिले तारीफ है और इस वेब सीरीज को श्रेष्ठतम बनाता है। पानी को आर्टिकल 21 से जोड़ लेना, इसका उदाहरण है कि निर्देशक ने इस वेब सीरीज पर कितना शोध किया है। हर एपिसोड में जो सेट्स बनाए गए हैं वो कहानी से जुड़े हुए ही जान पड़ते हैं। वो किसी सूखाग्रस्त इलाके के हों या किसी मल्टीनेशनल कंपनी की बिल्डिंग, इसको देखने का अनुभव अद्भुत है।

सोशल मीडिया पर किसी को ट्रोल करने का ट्रेंड सा बन गया है, वेब सीरीज में इसके असर को दिखाने की कोशिश की गई है। पहली कहानी में निर्देशक ने जिस तरह महिलाओं से जुड़े केस में कोर्टरूम के अंदर महिलाओं के साथ किए जाने वाले व्यवहार को दिखाया है, उससे महसूस होता है कि वह इसमें सुधार आने की उम्मीद रखती हैं।

निर्देशक ने वेब सीरीज के संवादों पर भी डूब कर काम किया है जैसे इसमें पत्रकारिता पर एक संवाद है 'पहले सवाल पूछने पर हमें विद्रोही कहा जाता था और अब देशद्रोही', यह संवाद देश की वर्तमान पत्रकारिता पर तीखा व्यंग्य है। राजनीति पर इसमें सच्चाई के करीब एक संवाद इस प्रकार है 'ये बिजनेस और राजनीति एक ही सिक्के के दो पहलू तो हैं भाई'।


रेप के आरोपों पर मुकदमे के दौरान संवाद 'माला ने नो नहीं भी कहा तो हां भी तो नहीं कहा था' फिल्म पिंक के संवादों से भी ज्यादा गहरा असर करता है। 'There is always some proof' और 'lawyer job is not to make any moral judgement' जैसे प्रभावकारी अंग्रेजी संवाद भी इस सीरीज में मौजूद हैं।

आजकल की वेब सीरीज में अश्लील दृश्यों की भरमार है, इसके साथ ही शराब और सिगरेट को भी जमकर दिखाया जाता है। इस वेब सीरीज में निर्देशक ने इतनी जान फूंकी है कि यह इन सब के बिना भी अपने में अलग रहती पर शायद उन्हें ट्रेंड के साथ चलना अच्छा लगा होगा।

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