पाकिस्तान में रवीन्द्र संगीत, सोशल मीडिया पर वायरल हुए दो वीडियो

सुप्रसिद्ध पाकिस्तानी-अमेरिकी फिल्म निर्देशक महरीन जब्बार ने बीते वर्ष के उत्तरार्द्ध में इंस्टाग्राम में दो वीडियो पोस्ट किए थे। ये वीडियो उनके तीन वर्ष पुराने पाकिस्तानी सीरियल ‘दिल क्या करे’ से थे। इनमें सीरियल की मुख्य कलाकार युमना जैदी रवीन्द्र संगीत गा रही हैं।

फोटो: सोशल मीडिया
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नम्रता जोशी

इंटरनेट पर डाली गई चीजें अपने लिए जीवन खुद ही प्राप्त कर लेती हैं। सुप्रसिद्ध पाकिस्तानी-अमेरिकी फिल्म निर्देशक महरीन जब्बार ने बीते वर्ष के उत्तरार्द्ध में इंस्टाग्राम में दो वीडियो पोस्ट किए थे। ये वीडियो उनके तीन वर्ष पुराने पाकिस्तानी सीरियल ‘दिल क्या करे’ से थे। इनमें सीरियल की मुख्य कलाकार युमना जैदी रवीन्द्र संगीत गा रही हैं। उसके बाद से ये दोनों वीडियो वायरल हो गए और इन्हें व्यापक पैमाने पर साझा किया गया। नौ महीने बाद भी इन दोनों वीडियो को काफी सराहा जा रहा है।

‘दिल क्या करे’ वर्तमान में भारत में एमएक्स प्लेयर पर उपलब्ध है। इसकी कहानी प्रेम त्रिकोण पर आधारित है। इसमें दो गहरे दोस्त अरमान और सादी एक ही लड़की अयमान से प्रेम करते हैं। अयमान की भूमिका युमना जैदी ने निभाई है। इस सीरियल में लोकप्रिय बांग्ला गीत ‘अमरो पोरानो जाह चाहे’ और ‘आमी तोमारो बिरोहे रोहिबो बिलिन’ को फिल्माया गया है। क्लिप्स में अयमान को दोस्तों की एक महफिल में गाते हुए दिखाया गया है।

इस सीरियल में कैसे रवीन्द्र संगीत आया होगा? क्या पाकिस्तान में इस संगीत के चाहने वाले हैं? हमारे पड़ोसी मुल्क में टैगोर कितने प्रसिद्ध हैं? इस पर ऑस्ट्रेलिया में रहने वाली मेरी एक कॉलम्निस्ट मित्र ने ई-मेल पर हुई बातचीत के दौरान बताया, “पाकिस्तान में टैगोर के बहुत सारे प्रशंसक हैं। लेकिन लोकप्रिय संस्कृति का अब अधिकांशतः क्लासिक्स से नाता टूट गया है।” उन्हें भी सीरियल में संगीत के इस तरह के इस्तेमाल ने भाव विह्वल कर दिया।


जब्बार ने इनका इस्तेमाल करने के बारे में क्यों सोचा होगा? इसका विचार कहां से आया? क्या इन गानों ने अयमान को साहित्य, कविता और संगीत की दुनिया में जगह दी? दो पुरुषों के साथ उसके रिश्ते में इनका असर क्या है? इस तरह के कई सवाल मेरे दिमाग में चल रहे थे। मैंने फैसला किया कि मैं खुद ही जब्बार से उनके शो में संगीत के बारे पूछती हूं, खासकर इन दो क्लिप्स के संदर्भ में।

पता चला कि ये गाने भारतीय अभिनेत्री और संगीतकार शर्वरी देशपांडे ने गाए हैं। शर्वरी, जब्बार की प्रिय मित्र की दोस्त हैं। शर्वरी जब न्यू यॉर्क में थीं और एक समारोह में गा रही थीं, तो जब्बार को उनके बारे में पता चला। जब्बार याद करते हुए कहती हैं, “वह बहुत ही सुंदर संगीत था और मैं तुरंत ही उसकी दीवानी हो गई। और वह मेरी स्मृति में बस गया।” तीन साल पहले जब वह ‘दिल क्या करे’ की शूटिंग कर रही थीं तो यह संगीत उनकी स्मृति में फिर से ताजा हो आया।

इस सीरियल के कुछ हिस्से इंटरनेट में वायरल होने के बाद हाल ही में जब्बार ने एक और क्लिप पोस्ट की। इसमें इस बार देशपांडे स्वयं खूबसूरत रवीन्द्र संगीत गा रही हैं। जब्बार ने इंस्टाग्राम में लिखा, “बंगाली प्रेस और पश्चिम बंगाल तथा बांग्लादेश के लोगों से बहुत सारे सवाल मिले हैं - मैंने उस पल को साझा करने के बारे सोचा जब मैंने पहली बार उन्हें गाते हुए सुना था।”

जब्बार ने अपने सीरियल में अपनी नायिका अयमान को विशेष रूप से टैगोर की ही नहीं बल्कि सामान्य तौर पर कविता प्रेमी के रूप में दिखाया है। वह अमेरिका से पाकिस्तान लौटी है और कभी-कभार गुनगुनाती एवं गाती है। जब्बार कहती हैं, “कुछ दृश्य ऐसे थे जहां अयमान गाती है और मैंने सोचा कि उन दृश्यों में शर्वरी के गीतों के टुकड़ों का इस्तेमाल करना और इसका पाकिस्तानी दर्शकों से परिचय कराना बहुत अच्छा रहेगा जो रवीन्द्र संगीत से शायद उतना परिचित न हों।” इसीलिए उन्होंने शर्वरी से अनुरोध किया कि वह उनके लिए गाएं। वास्तव में, शर्वरी देशपांडे ने टैगोर के साथ-साथ मशहूर पाकिस्तानी गायिका फरीदा खानम और नय्यरा नूर के गीतों के तीन-चार हिस्से गाए। जब्बार स्वीकार करती हैं कि उनके सीरियल के किरदार के उलट वह स्वयं रवीन्द्र संगीत से उतनी परिचित नहीं हैं। वह कहती हैं, “मैं बस शब्दों के प्रति बहुत ही सहज, बुनियादी और मौलिक रूप से आकर्षित हुई और इसके बाद मुझे उनका अनुवाद और अर्थ मिला। उनकी लय बहुत ही उत्कृष्ट और सुंदर थी और मुझे बस इतना पता था कि मुझे यह संगीत और इसका अनुभव अपने दर्शकों/श्रोताओं के साथ साझा करना है।” वह इस बात से खुश हैं कि उनके सीरियल के इन हिस्सों को नोटिस किया गया। उन्हें यह और भी ज्यादा मजेदार लगता है कि किस तरह से सोशल मीडिया की ताकत ने तीन साल पुराने सीरियल को अचानक वापस ला दिया।


जब्बार के लिए भारतीय प्रतिभाओं के साथ काम करना कोई नहीं बात नहीं है। उनकी पहली फीचर फिल्म रामचंद पाकिस्तानी (2008) थी। यह फिल्म पाकिस्तान के एक हिंदू दलित व्यक्ति शंकर और उसके बेटे रामचंद के बारे में थी जो दुर्घटनावश सीमा पार कर जाते हैं। इस फिल्म के एक प्रमुख किरदार में भारतीय अभिनेत्री नंदिता दास थीं। इसमें उन्होंने पत्नी और मां के रूप में चंपा नाम की महिला का किरदार निभाया था। चंपा पाकिस्तान में अपने घर पर अपने पति और बेटे की वापसी का इंतजार करती है। उस तरह की सिनेमाई साझेदारी की अब कल्पना करना भी मुश्किल है। वर्ष 2019 में जम्मू- कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले के बाद से बॉलीवुड में पाकिस्तानी कलाकारों पर प्रतिबंध है। सभी यह उम्मीद कर सकते हैं कि इस तरह की साझेदारी के लिए राजनीतिक रूप से जमी बर्फ पिघलेगी और शांति कायम होगी।

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