बॉलीवुड में स्टार वेतन पर कैंची, करण जौहर के पास अपने अभिनेताओं को भुगतान करने तक के पैसे नहीं?

जुग जुग जीयो फ़्लॉप होने का झटका इतना भारी है कि करण जौहर को अपने अभिनेताओं का भुगतान करने के भी लाले पड़ गए। शायद ही वैसा भुगतान कर पाएं जो उन्हें मिलना ही चाहिए।

फोटो: सोशल मीडिया
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सुभाष के झा

जुग जुग जीयो फ़्लॉप होने का झटका इतना भारी है कि करण जौहर को अपने अभिनेताओं का भुगतान करने के भी लाले पड़ गए। शायद ही वैसा भुगतान कर पाएं जो उन्हें मिलना ही चाहिए। इस वैवाहिक कॉमेडी ने करण जौहर की जेब पर ऐसी चोट की है कि निर्माता द्वारा कियारा आडवाणी को दोहरे अंकों में करोड़ों का भुगतान करने के बाद एक बड़ी वित्तीय देनदारी आ गई है।

करण के एक करीबी की मानें तो “वरुण धवन को करीब 60 करोड़ का भुगतान हुआ। अनिल कपूर को भी कम नहीं दे सकते थे, क्योंकि वह खुद को सुपर स्टार ही मानते हैं। नीतू कपूर जरूर करण और उनकी टीम के साथ दोस्ती निभाते फिल्म कर रही थीं।”

अब तो भूल भुलैया 2 की सफलता के बाद कियारा आडवाणी के भी भाव बढ़ गए हैं। वे खुद को ‘भाग्यशाली शुभंकर’ मानने लगी हैं। लगता है कि कियारा ‘लक्ष्मी बॉम्ब’ और ‘इंदु की जवानी’ भूल गई हैं, जहां किस्मत साथ नहीं थी। कियारा का कबीर सिंह या भूल भुलैया की सफलता का श्रेय लेना जॉनी लीवर द्वारा ‘कभी खुशी, कभी गम’ की सफलता का श्रेय लेने जैसा है।”

इस करीबी की बातें उस मिथक का भी खंडन करती हैं कि करण के अभिनेता उन्हें ‘सद्भावना’ में छूट देते हैं- “वे करण से अपनी पूरी फीस वसूलते हैं। जुग जुग जीयो का आधे से ज्यादा बजट तो सितारों की फीस चुकाने में ही चला गया।”


अब इस ‘स्टार-वेतनमान’ में बदलाव का वक्त आ गया है। करण जौहर, साजिद नाडियाडवाला, रितेश सिधवानी और आदित्य चोपड़ा सहित कई शीर्ष निर्माताओं ने अपने अभिनेताओं से स्वैच्छिक वेतन कटौती का ‘अनुरोध’ किया है, क्योंकि ये निर्माता अभिनेताओं को उनकी मांग के अनुरूप भुगतान की स्थित में नहीं हैं।

ऐसे ही एक परेशान निर्माता कहते हैं- “यह ‘डोमिनोज इफेक्ट’ है: आप वरुण धवन को उनके मनमाफिक भुगतान करते हैं, फिर अनिल कपूर को भी…। लेकिन सच यही है कि अकेले कार्तिक आर्यन ही हैं जिसने इस साल कोई हिट दी।”

ट्रेड के अंदर की बात जानने वाले बताते हैं कि सिर्फ कार्तिक आर्यन ही हैं इस साल, जिनकी फीस बढ़ाने की पेशकश हुई है।

हालांकि, नाम न छापने की शर्त पर एक ट्रेड पंडित ने बताया कि कार्तिक के निर्माता भूषण कुमार और मुराद खेतानी ने ‘भूल भूलैया 3’ के लिए उनको अच्छी-खासी वृद्धि की पेशकश की, लेकिन कार्तिक के यह कहने कि मंदी के कारण उन्हें अपनी उड़ान कुछ कम करनी होगी, कुमार ने उन्हें सद्भावना तोहफे के तौर पर एक महंगी कार भेंट कर दी। इस ट्रेड पंडित के अनुसार बाकी सारे तथाकथित ए-लिस्टर्स छेद वाली एक ही नाव के सवार हैं और जरूरी है कि अपनी ऊंची उड़ान थामकर वेतन चेक से कुछ शून्य खुद कम करने की पहल करें।


बताना जरूरी है कि हीरोपंती 2 के बॉक्स ऑफिस पर लुढ़कने के बाद निर्देशक अहमद खान और उनके खास किरदार टाइगर श्रॉफ ने निर्माता साजिद नाडियाडवाला के लिए अपनी अगली फिल्म की फीस में कटौती कर दी है, जो एक हल्की-फ़ुल्की म्यूज़िकल कॉमेडी होगी।

बाकी की बात करें तो ‘अनेक’ के बाद आयुष्मान खुराना, ‘राष्ट्र कवच ओम्’ के बाद आदित्य रॉय कपूर, ‘बच्चन पांडेय’ और ‘सम्राट पृथ्वीराज’ के बाद अक्षय कुमार, ‘जयेश भाई शाह’ के बाद रणवीर सिंह और ‘सत्यमेव जयते 2’ और ‘अटैक’ के बाद जॉन अब्राहम को तो अब खुद को साइन करने के लिए निर्माताओं को भुगतान करना चाहिए।

ओटीटी प्लेटफार्म को लेकर जॉन का अहंकारी बयान सबको याद है। एक ऐसा अभिनेता जो लम्बे समय से किसी भी प्लेटफार्म पर सफल न हुआ हो, ऐसा कैसे कह सकता है। वह एक ऐसे प्लेटफार्म का उपहास उड़ाता है जहां न सिर्फ भविष्य है बल्कि जिसका वर्तमान भी शानदार है।

और फिर एक दिन जॉन को यह कहते हुए पाया जाता है कि- “बतौर निर्माता मुझे ओटीटी स्पेस पसंद है। मैं इसके लिए फिल्में बनाना उसके लिए दर्शक खींचना पसंद करूंगा। लेकिन एक अभिनेता के तौर पर बहुत स्पष्ट हूं कि मैं बड़े पर्दे पर ही आना चाहता हूं। मैं बड़े पर्दे का हीरो हूं और वहीं दिखना चाहता हूं। अभी मैं ऐसी ही फिल्में करूंगा जो बड़े पर्दे के अनुकूल हों। मुझे बिलकुल अच्छा नहीं लगेगा कि कोई मेरी फिल्म को बीच में ही टैब पर इसलिए बंद कर दे कि उसे वाशरूम जाना है। मैं 299 या 499 रुपए में भी उपलब्ध नहीं होना चाहता क्योंकि इससे मुझे दिक्कत है।”


सवाल है कि ऐसी अपमानजनक बातें कहते वक्त क्या जॉन नशे में थे… किस बात का नशा? सत्यमेव जयते 2 और अटैक के बाद जो हुआ, उसके बाद कोई सोच भी कैसे सकता है कि बड़ा पर्दा अब भी उसका इंतजार कर रहा है?

इसका मतलब यह भी नहीं कि जॉन या उनके जैसे तथाकथित ए-लिस्टर्स के लिए ओटीटी इंतजार कर रहा है! जान को समझना होगा कि टेलीविजन के विपरीत ओटीटी बड़े पर्दे से खारिज कलाकारों के लिए कोई डम्पिंग ग्राउंड नहीं है! ओटीटी ने तो जयदीप अहलवात और सूर्या शर्मा से लेकर शेफाली शाह और अदिति पोहनकर तक देश की शीर्ष प्रतिभाओं को पोषित और प्रोत्साहित करने का काम किया है।

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