सिनेजीवन: पिता कमल हासन संग मतदान करने पहुंचीं श्रुति और बहन के जन्मदिन पर इमोशनल हुए सुनील शेट्टी
कमल हासन अपनी बेटी अभिनेत्री श्रुति हासन के साथ चेन्नई के टेयनमपेट स्थित एल्डम्स रोड पर चेन्नई हाईस्कूल मतदान केंद्र पहुंचे। सुनील शेट्टी ने अपनी बहन के जन्मदिन पर खास पोस्ट शेयर किया।

पिता कमल हासन संग मतदान करने पहुंचीं श्रुति हासन, पूछा- “क्या आपने वोट डाला?”
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के लिए गुरुवार को पूरे राज्य में मतदान हो रहा है। इस अवसर पर सिनेमा जगत की कई हस्तियां अपने मताधिकार का प्रयोग करने पहुंचीं। अभिनेता और राज्यसभा सांसद कमल हासन अपनी बेटी अभिनेत्री श्रुति हासन के साथ चेन्नई के टेयनमपेट स्थित एल्डम्स रोड पर चेन्नई हाईस्कूल मतदान केंद्र पहुंचे।
उनके आने पर मतदान केंद्र के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई। अभिनेत्री श्रुति हासन ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट करते हुए लिखा, “मैंने वोट कर दिया, आपने किया?” इस पोस्ट के साथ उन्होंने मतदान की तस्वीर भी साझा की। पिता-पुत्री की जोड़ी ने सुबह ही मतदान केंद्र पहुंचकर वोट डाला और लोकतंत्र में अपनी भागीदारी निभाई। कमल हासन अपनी पार्टी मक्कल नीति मैयम (एमएनएम) के साथ इस बार चुनाव नहीं लड़ रही है लेकिन उन्होंने डीएमके गठबंधन को समर्थन दिया है।
दिग्गज अभिनेता रजनीकांत ने भी चेन्नई के स्टेला मैरिस कॉलेज में स्थित मतदान केंद्र पर वोट डाला और लोगों से भारी संख्या में मतदान की अपील की। वहीं, अभिनेता धनुष ने भी मतदान किया और वोटरों से भारी संख्या में मतदान का आह्वान किया।
'कुछ रिश्तों को शब्दों की जरूरत नहीं होती', बहन के जन्मदिन पर इमोशनल हुए सुनील शेट्टी

बॉलीवुड अभिनेता सुनील शेट्टी ने अपनी बहन के जन्मदिन पर खास पोस्ट शेयर किया। इस पोस्ट में उन्होंने अपनी बहन के लिए प्यार और आभार जताया। उन्होंने बताया कि उनकी बहन उनके जीवन में हमेशा एक मजबूत सहारा रही हैं और उनके बिना उनकी जिंदगी अधूरी सी लगती है।
पोस्ट में सुनील शेट्टी ने एक तस्वीर साझा की, जिसमें वह अपनी बहन के साथ चलते हुए नजर आ रहे हैं। यह तस्वीर किसी फैमिली प्रोग्राम की लग रही है, जिसमें दोनों खुश दिखाई दे रहे हैं।
तस्वीर के साथ सुनील शेट्टी ने लिखा, ''कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जिनके लिए ज्यादा शब्दों की जरूरत नहीं होती, क्योंकि वे खुद ही जिंदगी को संभाल लेते हैं। मैं अपनी बहन को धन्यवाद देता हूं कि वह हमेशा मेरी ताकत बनी रही और हर मुश्किल समय में मेरा साथ दिया। आपको जन्मदिन की शुभकामनाएं।''
अगर मैं फेल हुआ तो इंडिया फेल हो जाएगा, मनोज बाजपेयी की नई फिल्म 'गवर्नर: द साइलेंट सेवियर' का पोस्टर रिलीज

बॉलीवुड में जब भी किसी गंभीर और दमदार कहानी वाली फिल्म की चर्चा होती है, तो दर्शकों की उम्मीदें अपने आप बढ़ जाती हैं। अब एक ऐसी ही नई फिल्म चर्चा में आ गई है, जिसका नाम है 'गवर्नर: द साइलेंट सेवियर'। इस फिल्म में अभिनेता मनोज बाजपेयी मुख्य भूमिका में नजर आने वाले हैं। मेकर्स ने इसके दो पोस्टर रिलीज किए।
फिल्म निर्माता विपुल अमृतलाल शाह ने अभिनेता मनोज बाजपेयी के जन्मदिन के खास मौके पर इस फिल्म के दो पोस्टर जारी किए। पोस्टर के साथ ही फिल्म के नाम का भी खुलासा किया गया।
फिल्म के पहले पोस्टर में मनोज बाजपेयी का चेहरा नहीं दिखाया गया है। वह पीछे से नजर आ रहे हैं। वह एक लंबे कॉरिडोर में हाथ में सूटकेस लिए नजर आ रहे हैं। इस पर टैगलाइन है- 'अगर मैं फेल हुआ तो इंडिया फेल हो जाएगा।'
वहीं दूसरे पोस्टर में एक हरी कुर्सी पर फोकस रखा गया है, जिस पर ऊपर की तरफ लिखा है- 'इंडिया दिवालिया होने की कगार पर है' और नीचे लिखा है- 'यह सिर्फ कुर्सी नहीं, जिम्मेदारी है।'
इन पोस्टर्स से अंदाजा लगाया जा सकता है कि फिल्म में एक हाई-वोल्टेज लीगल और पॉलिटिकल ड्रामा देखने को मिल सकता है।
'देव डी' की री-रिलीज से पहले अभय देओल ने याद किया अनोखा किस्सा, कल्कि के सीन में किया गया था बदलाव

कभी-कभी फिल्मों के कुछ सीन के पीछे कलाकारों और डायरेक्टर की सोच और क्रिएटिविटी की लंबी कहानी होती है। ऐसी ही एक दिलचस्प कहानी फिल्म 'देव डी' से जुड़ी है, जिसे आज भी भारतीय सिनेमा की सबसे अलग फिल्मों में गिना जाता है। यह फिल्म अब एक बार फिर 24 अप्रैल को सिनेमाघरों में री-रिलीज हो रही है और इसी मौके पर अभिनेता अभय देओल ने फिल्म से जुड़ा एक मजेदार किस्सा साझा किया है। यह किस्सा निर्देशक अनुराग कश्यप के साथ उनकी क्रिएटिव बातचीत से जुड़ा है।
अभय देओल ने इंस्टाग्राम पर फिल्म का एक सीन शेयर किया और कहा, ''यह मेरे लिए सिर्फ एक सीन नहीं था बल्कि एक ऐसा पल था जिसमें एक्टिंग और डायरेक्शन के बीच एक अलग ही तरह की सोच का मेल हुआ था। इस सीन में मेरा किरदार देव रात के समय चंदा के कमरे के बाहर इंतजार करता है। चंदा का किरदार अभिनेत्री कल्कि कोचलिन निभा रही हैं जो दिन में पढ़ाई करती है और रात में एक मुश्किल जिंदगी जी रही होती है।''
अभय देओल ने बताया कि इस सीन की शुरुआत एक अलग सोच से हुई थी। अनुराग कश्यप ने उनसे कहा था कि वह बाहर बैठकर इंतजार करें और ऐसा माहौल बनाया जाए कि दर्शकों को लगे कि अंदर कुछ हो रहा है। अनुराग की इस बात को अभय ने अपने अंदाज में समझा और उसमें थोड़ा अलग विचार जोड़ दिया।
क्रिकेटर बनने का सपना लेकर मुंबई आए मैक मोहन, फिर बने बॉलीवुड के सबसे यादगार विलेन

कभी-कभी जिंदगी इंसान को उस रास्ते पर ले जाती है, जिसके बारे में उसने सोचा भी नहीं होता। ऐसे ही एक दिलचस्प सफर की कहानी मैक मोहन की है, जिन्हें आज भी लोग 'शोले' के सांभा के रूप में याद करते हैं। उनका सपना कभी अभिनेता बनने का नहीं था, वह क्रिकेटर बनना चाहते थे, लेकिन किस्मत ने उन्हें भारतीय सिनेमा का चेहरा बना दिया।
मैक मोहन का जन्म 24 अप्रैल 1938 को कराची में हुआ था, जो उस समय ब्रिटिश भारत का हिस्सा था। उनका असली नाम मोहन माखीजानी था। उनके पिता ब्रिटिश आर्मी में कर्नल थे। साल 1940 में उनके पिता का ट्रांसफर कराची से लखनऊ हो गया, जिसके बाद उनका पूरा परिवार वहीं बस गया। मैक मोहन की पढ़ाई लखनऊ में हुई और यहीं उनके बचपन के सपनों ने आकार लेना शुरू किया।
बचपन से ही मैक मोहन को क्रिकेट से काफी लगाव था। वह घंटों खेलते रहते थे और क्रिकेटर बनने का सपना देखते थे। उन्होंने मेहनत करके उत्तर प्रदेश की क्रिकेट टीम में जगह बनाई। उस समय उनका पूरा ध्यान सिर्फ खेल पर था और वह यही सोचकर आगे बढ़ रहे थे। लेकिन, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
क्रिकेट के अपने इस सपने को आगे बढ़ाने के लिए वह साल 1952 में मुंबई आ गए। उन्हें लगता था कि यहां बेहतर ट्रेनिंग मिलेगी और उनका करियर बन जाएगा। मुंबई आने के बाद उनकी जिंदगी ने एक बिल्कुल नया मोड़ ले लिया। यहां उन्होंने पहली बार थिएटर और रंगमंच देखा, जिसने उन्हें अंदर से बदल दिया। धीरे-धीरे उनका झुकाव अभिनय की तरफ बढ़ने लगा।
आईएएनएस के इनपुट के साथ