सिनेजीवन: 'जुदाई' को याद कर उर्मिला मातोंडकर ने सुनाया दिलचस्प किस्सा और भूमि पेडनेकर बनीं 'फॉर्म गर्ल'
उर्मिला श्रीदेवी और अनिल कपूर जैसे बड़े सितारों के साथ काम करने में मैं काफी घबरा रही थीं। भूमि पेडनेकर हाल ही में अपने छोटे से अवकाश का भरपूर आनंद लेती नजर आईं, जहां उन्होंने प्रकृति की गोद में समय बिताया।

श्रीदेवी के सामने एक्टिंग करने में छूट जाते थे पसीने, 'जुदाई' को याद कर उर्मिला मातोंडकर ने सुनाया दिलचस्प किस्सा
हिंदी सिनेमा की कई ऐसी फिल्में हैं, जिन्हें आज भी दर्शक बड़े चाव से देखते हैं। इन्हीं फिल्मों में एक नाम है सुपरहिट फिल्म 'जुदाई' का, जो 1997 में रिलीज हुई थी। यह फिल्म अपनी अनोखी कहानी और शानदार गानों की वजह से लोगों के बीच लोकप्रिय है।
फिल्म में दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी, अभिनेता अनिल कपूर, और अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर की तिकड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया था। खास तौर पर उर्मिला मातोंडकर के निभाए गए जान्हवी के किरदार ने लोगों के दिलों में अलग जगह बनाई थी। हालांकि पर्दे पर आत्मविश्वास से भरपूर नजर आने वाली उर्मिला के लिए इस फिल्म की शूटिंग उतनी आसान नहीं थी, जितनी दर्शकों को दिखाई देती है।
हाल ही में उर्मिला मातोंडकर डांस शो 'इंडियाज बेस्ट डांसर सीजन 5' में स्पेशल गेस्ट के तौर पर शामिल हुईं। इस दौरान उन्होंने अपने फिल्मी सफर की कई यादों को साझा किया। बातचीत में जब फिल्म 'जुदाई' का जिक्र हुआ तो उन्होंने बताया कि इस फिल्म में काम करना उनके लिए कितना चुनौतीपूर्ण अनुभव था।
उर्मिला ने कहा, ''मुझे फिल्म की कहानी और किरदार काफी पसंद आए थे, लेकिन श्रीदेवी और अनिल कपूर जैसे बड़े सितारों के साथ काम करने में मैं काफी घबरा रही थीं। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं इतने अनुभवी कलाकारों के सामने अपने अभिनय को कैसे साबित कर पाऊंगी। कई बार तो यह सोचकर ही पसीने छूटने लगते थे कि मुझे श्रीदेवी के सामने एक्टिंग करना है।''
उर्मिला ने कहा, ''श्रीदेवी काफी बड़ी अभिनेत्री थीं। उनके व्यक्तित्व में भी एक अलग तरह का प्रभाव था। वह अपने काम के प्रति बेहद समर्पित थीं और हर सीन को पूरी मेहनत और ईमानदारी के साथ निभाती थीं। ये देखकर मैं उनके सामने अभिनय करते समय काफी दबाव महसूस करती थी।''
भूमि पेडनेकर दो हफ्ते के लिए बनीं 'फॉर्म गर्ल', नन्हें बकरियों के बच्चे, घर में बने भोजन और प्रकृति के बीच मिलीं खुशियां

अभिनेत्री भूमि पेडनेकर हाल ही में अपने छोटे से अवकाश का भरपूर आनंद लेती नजर आईं, जहां उन्होंने प्रकृति की गोद में समय बिताया। इस दौरान वे नन्हे बकरियों के बच्चों और पूरी तरह जैविक (ऑर्गेनिक) माहौल के बीच सुकूनभरे पल बिताती दिखीं।
अभिनेत्री भूमि पेडनेकर ने हाल ही में अपने व्यस्त कार्यक्रम से कुछ समय निकालकर प्रकृति के बीच सुकूनभरे पल बिताए। उन्होंने दो सप्ताह एक फार्म पर गुजारे, जिसे उन्होंने अपना "घर से दूर दूसरा घर" बताया।
भूमि ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इस ग्रामीण प्रवास की कई झलकियां साझा कीं और प्रशंसकों को प्रकृति, घर में उगाए गए ताजा भोजन और फार्म के जानवरों से घिरे अपने जीवन की एक झलक दिखाई।
अपने प्रवास का एक वीडियो मोंटाज साझा करते हुए भूमि ने कैप्शन में लिखा:
"मैं और मेईईईईन...दो हफ्ते तक एक फार्म गर्ल बनकर रही और यह अनुभव बेहद खास रहा।
जब शाहिद कपूर की इस गलती पर भड़क उठी थीं करिश्मा कपूर, सेट पर सभी हो गए थे परेशान

90 के दशक की लोकप्रिय अभिनेत्री करिश्मा कपूर आज भी अपनी फिल्मों और स्टाइल के लिए जानी जाती हैं। फिल्मी दुनिया से जुड़ा उनका एक पुराना किस्सा अक्सर चर्चा में रहता है, जिसमें उनका नाम अभिनेता शाहिद कपूर के साथ जोड़ा जाता है। यह मामला 'दिल तो पागल है' के सेट का है, जिसमें शाहिद कपूर बैकग्राउंड डांसर के तौर पर मौजूद थे। आखिर, सेट पर ऐसा क्या हुआ, जिससे बॉलीवुज की 'लोलो' आग बबूला हो गई, चलिए आपको बताते है।
करिश्मा ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1991 में रिलीज हुई फिल्म 'प्रेम कैदी' से की। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में काम किया, लेकिन उनके करियर को नई ऊंचाई 1996 में आई फिल्म 'राजा हिंदुस्तानी' से मिली। आमिर खान के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया और फिल्म बड़ी हिट साबित हुई। इस फिल्म ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया। इसके बाद करिश्मा को बड़े-बड़े फिल्म प्रोजेक्ट मिलने लगे और वह उस समय की टॉप अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं।
इसके बाद साल 1997 में आई फिल्म 'दिल तो पागल है' ने उनके करियर को और ऊंचाई दी। इस फिल्म में उनके साथ शाहरुख खान और माधुरी दीक्षित भी थे। इसी फिल्म के एक मशहूर डांस गाने 'ले गई ले गई' में शाहिद कपूर बैकग्राउंड डांसर के रूप में नजर आए थे। कहा जाता है कि इस गाने की शूटिंग के दौरान डांस स्टेप्स कई बार मैच नहीं हो रहे थे, जिससे रीटेक बढ़ते गए। ऐसे में करिश्मा को काफी गु्स्सा आ गया था। हालांकि बाद में इस शॉट को पूरा कर लिया गया और यह फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई और करिश्मा के करियर की सबसे यादगार फिल्मों में शामिल हो गई।
‘जो हमें पसंद नहीं करते, वे कभी पसंद नहीं करेंगे...’: रजनीकांत के बयान से सियासी अटकलें तेज

सुपरस्टार रजनीकांत ने बुधवार को कहा कि “जो लोग हमें पसंद नहीं करते, वे चाहे हम कुछ भी कर लें, हमें पसंद नहीं करेंगे और जो लोग हमें पसंद करते हैं, वे हर हाल में हमारा समर्थन करते रहेंगे।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर शुरू हो गया है और सोशल मीडिया पर भी इसकी व्यापक चर्चा हो रही है।
रजनीकांत ने यह टिप्पणी चेन्नई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की, जहां उनकी 173वीं फिल्म थर्मन का टाइटल और फर्स्ट-लुक पोस्टर जारी किया गया। हालांकि, यह कार्यक्रम फिल्म के लॉन्च के लिए आयोजित किया गया था, लेकिन आलोचना और जनधारणा को लेकर रजनीकांत की टिप्पणी ही चर्चा का मुख्य विषय बन गई।
समारोह को संबोधित करते हुए रजनीकांत ने कहा कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को अक्सर विरोधाभासी अपेक्षाओं का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा, “अगर हम चुप रहते हैं तो लोग पूछते हैं कि हम बोलते क्यों नहीं। जब हम बोलना शुरू करते हैं तो लोग कहते हैं कि बोलते रहिए। और जब लगातार बोलते हैं तो वही लोग कहते हैं कि चुप ही रहना चाहिए था। हमें यह समझना चाहिए कि जो लोग हमें पसंद नहीं करते, वे चाहे हम कुछ भी कर लें, हमें पसंद नहीं करेंगे। वहीं जो लोग हमें पसंद करते हैं, वे हर स्थिति में हमारा समर्थन करेंगे। यह उम्मीद करना कि हर कोई हमारी सराहना करेगा, मूर्खता है।”
कैंसर जागरूकता पर अर्जुन बिजलानी की अपील, बोले- 'सेलिब्रिटी नहीं, हर किसी को आगे आना होगा'

टीवी अभिनेता अर्जुन बिजलानी ने छत्तीसगढ़ में कैंसर मरीजों से मुलाकात के अनुभव के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इस मुलाकात ने मुझे अंदर तक झकझोर दिया। कैंसर जागरूकता को लेकर अर्जुन ने कहा कि यह सिर्फ किसी एक इंडस्ट्री या कुछ लोगों की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि हर उस व्यक्ति की जिम्मेदारी है जो समाज तक अपनी बात पहुंचा सकता है। उन्होंने लोगों से एकजुट होकर इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने की बात कही।
आईएएनएस से बात करते हुए अर्जुन बिजलानी ने कहा, ''छत्तीसगढ़ में कैंसर मरीजों से मिलने पर मैं भावुक हो उठा। वहां एक दो साल का बच्चा कैंसर से लड़ रहा था। उस बच्चे की हालत और उसके माता-पिता की परेशानी देखकर किसी का भी दिल दहल सकता है। उस समय मुझे यह महसूस हुआ कि जिंदगी कितनी नाजुक है और छोटी-सी लापरवाही भी कितनी बड़ी समस्या बन सकती है। यह अनुभव मेरे लिए एक गहरी सीख बन गया।''
उन्होंने कहा, ''अक्सर लोग यह सोचते हैं कि जागरूकता फैलाने का काम सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री यानी बॉलीवुड का है लेकिन यह सोच गलत है। यह जिम्मेदारी सिर्फ एक क्षेत्र की नहीं हो सकती। टीवी इंडस्ट्री, तेलुगु, तमिल, मलयालम फिल्म इंडस्ट्री, खेल जगत के खिलाड़ी, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और यूट्यूबर, हर वह व्यक्ति जो लोगों तक पहुंच बना सकता है, उसे इस काम में आगे आना चाहिए। जब तक सभी लोग मिलकर काम नहीं करेंगे, तब तक जागरूकता पूरी तरह नहीं फैल सकती।''
आईएएनएस के इनपुट के साथ
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