सिनेजीवन: जब सनी देओल ही बन गए निर्देशक और जानें तिग्मांशु धूलिया और इरफान खान की अनोखी दोस्ती के बारे
अमीषा पटेल ने बताया, ''सनी देओल कई मौकों पर खुद एक तरह से डायरेक्टर की भूमिका में आ जाते थे।" तिग्मांशु धूलिया अक्सर इंटरव्यूज में इरफान को लेकर एक बात दोहराते थे कि 'वह अभिनय नहीं करते, बल्कि किरदार को जीते हैं।'

तिग्मांशु धूलिया और इरफान खान की अनोखी दोस्ती; एनएसडी से शुरू हुआ सफर सिनेमा के लिए बना यादगार

हिंदी सिनेमा के जाने-माने फिल्मकार तिग्मांशु धूलिया ने कहानियों को बेहतरीन तरीके से पर्दे पर उतारा। उनके करियर में कई कलाकार आए और गए, लेकिन कुछ रिश्ते बेहद खास बन गए। इन्हीं खास नामों में शामिल रहा इरफान खान का नाम, जिनके साथ तिग्मांशु का जुड़ाव एनएसडी के दिनों से शुरू हुआ और आगे चलकर भारतीय सिनेमा की कुछ यादगार फिल्मों तक पहुंचा। तिग्मांशु धूलिया अक्सर इंटरव्यूज में इरफान को लेकर एक बात दोहराते थे कि 'वह अभिनय नहीं करते, बल्कि किरदार को जीते हैं।'
पढ़ाई के दौरान ही उनका झुकाव थिएटर की तरफ बढ़ा। वह कॉलेज में नाटकों में हिस्सा लेने लगे और धीरे-धीरे अभिनय की दुनिया को समझने लगे। इसके बाद उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी), दिल्ली में एडमिशन लिया और 1989 में थिएटर में मास्टर्स पूरा किया। यही वह समय था जब उनकी मुलाकात इरफान खान से हुई। दोनों ने एक ही माहौल में अभिनय की ट्रेनिंग ली, संघर्ष को करीब से देखा और कला को गहराई से समझा।
तिग्मांशु धूलिया का बड़ा ब्रेक तब आया जब उन्होंने 2003 में फिल्म 'हासिल' का निर्देशन किया। यह फिल्म कॉलेज पॉलिटिक्स और युवा संघर्ष पर आधारित थी। इसी फिल्म में उन्होंने इरफान खान को कास्ट किया और यह फिल्म एक कल्ट क्लासिक बन गई।
तिग्मांशु अक्सर इंटरव्यू में कहते थे कि इरफान में एक अलग तरह की सच्चाई थी। वह अभिनय नहीं करते थे बल्कि किरदार में ढल जाते थे। उन्होंने कई प्रोजेक्ट्स में इरफान खान को प्राथमिकता दी। उनकी 'पान सिंह तोमर' फिल्म में इरफान खान ने एथलीट की जिंदगी को पर्दे पर पेश किया। इस फिल्म के जरिए उन्हें 2012 में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (नेशनल अवॉर्ड) मिला।
'कल्याणी रीमिक्स' को लेकर श्रेया घोषाल बोलीं-'गाने की धुन ने तुरंत दिल को छू लिया'

मशहूर गायिका श्रेया घोषाल का नया गाना 'कल्याणी रीमिक्स' काफी चर्चा में है। इस गाने को लेकर आईएएनएस संग बातचीत में श्रेया ने बताया कि किसी भी ऐसे गाने को सुनना हमेशा खास होता है, जो बिना किसी बनावटीपन के सीधे दिल से जुड़ता हो।
आईएएनएस से बात करते हुए श्रेया घोषाल ने कहा, ''गाने 'कल्याणी रीमिक्स' में सबसे पहले जो चीज मुझे प्रभावित करती है, वह इसकी भावनात्मक सच्चाई और इसकी खूबसूरत धुन है। गाने के संगीत ने तुरंत दिल छू लिया। यह गाना ऐसा है, जिसमें भावना और संगीत दोनों बहुत ईमानदारी से जुड़े हुए हैं, और यही इसे खास बनाता है।''
उन्होंने कहा, "यह देखना हमेशा उत्साहजनक होता है कि कोई गाना बिना किसी बड़े प्रचार के भी लोगों के दिलों तक पहुंच जाता है और उनसे जुड़ाव बना लेता है। 'कल्याणी' पहले ही एक मजबूत पहचान बना चुका था और इसके अपने श्रोता भी थे। ऐसे में यह जरूरी था कि मैं इस गाने की मूल आत्मा को बनाए रखूं और उसमें एक नई धुन शामिल करूं। इसमें हिंदी भाषा को शामिल करने के मेरे विचार को काफी पसंद किया गया।''
'गदर: एक प्रेम कथा' के सेट पर जब सनी देओल ही बन गए निर्देशक, अमीषा पटेल ने एक टेक में पूरा किया सीन

15 जून 2001 को रिलीज हुई फिल्म 'गदर: एक प्रेम कथा' अपने दौर की बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्म रही। इस फिल्म के सीक्वल 'गदर 2' ने भी बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया था। फिल्म में सनी देओल और अमीषा पटेल की जोड़ी को काफी पसंद किया गया था। अब फिल्म से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी अभिनेत्री अमीषा पटेल ने 'इंडियाज बेस्ट डांसर सीजन 5' में साझा की।
शो में अमीषा पटेल ने कहा, '''गदर: एक प्रेम कथा' की शूटिंग के दौरान मैं इंडस्ट्री में बिल्कुल नई थी। मेरे लिए यह एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट था और साथ ही एक बड़ा दबाव भी। उसी समय मैं एक और बड़ी फिल्म 'कहो ना… प्यार है' की शूटिंग भी कर रही थी, जिससे मेरा शेड्यूल और भी मुश्किल हो गया था। दो अलग-अलग तरह की फिल्मों को एक साथ संभालना मेरे लिए बिल्कुल भी आसान नहीं था और यह दौर मेरे करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण समय बन गया था।''
अमीषा ने बताया, ''सनी देओल कई मौकों पर खुद एक तरह से डायरेक्टर की भूमिका में आ जाते थे। वे मुझे सीन समझाते थे और सही इमोशन्स लाने में मदद करते थे, जिसके बाद मेरा शॉट अक्सर एक ही टेक में पूरा हो जाता था। यह मेरे लिए बहुत बड़ा सहारा था, क्योंकि उस समय मैं सीखने की प्रक्रिया में थीं और हर दिन कुछ नया अनुभव कर रही थीं।''
लॉस एंजिल्स में भाषा से जुड़ी चुनौतियों पर बोलीं सना सईद, 'सुना जाना सबसे जरूरी होता है'

सुपरहिट फिल्म 'कुछ कुछ होता है' में शाहरुख खान की बेटी 'अंजलि' का किरदार निभाकर लोगों के दिलों में जगह बनाने वाली अभिनेत्री सना सईद ने सोशल मीडिया पर अपना एक अनुभव साझा किया। दरअसल, उन्होंने विदेश में रहने के दौरान भाषा, उच्चारण और संवाद से जुड़ी कठिनाइयों के बारे में खुलकर बात की।
सना सईद आज लॉस एंजिल्स में रहती हैं और अपने करियर और जीवन को नए तरीके से आगे बढ़ा रही हैं। उन्होंने गुरुवार को इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने अपने अमेरिका पहुंचने के शुरुआती दिनों का एक दिलचस्प अनुभव बताया।
सना ने बताया, "साल 2016 में मैं पहली बार पढ़ाई के लिए लॉस एंजिल्स आईं थी। इस दौरान मुझे रोजमर्रा की छोटी-छोटी बातों में भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। मुझे याद है कि एक बार मैं एक रेस्टोरेंट में गई थी और वहां पानी पीना चाहती थी लेकिन मेरा उच्चारण वहां के लोगों को ठीक से समझ नहीं आया। मैंने कई बार 'वॉटर' कहा, लेकिन रेस्टोरेंट वाला अलग-अलग चीज समझता रहा और यहां तक कि 'सोडा' या 'कोक' तक ऑफर करने लगा।"
उन्होंने आगे कहा, ''उस दिन मुझे एहसास हुआ कि अगर मुझे अमेरिका में लंबे समय तक रहना है, तो मुझे अपने बातचीत करने के तरीके पर काम करना होगा, क्योंकि सुना जाना सबसे जरूरी है। इसके बाद मैंने अपने उच्चारण और बोलने के तरीके पर ध्यान देना शुरू किया और इसके लिए ट्रेनिंग भी ली।''
पुराने और नए बॉलीवुड एक्टर्स में क्या है असली फर्क? अरशद वारसी ने एक किस्से के जरिए समझाया

बॉलीवुड अभिनेता अरशद वारसी अपनी सादगी और चुलबुले अंदाज के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में उन्होंने आईएएनएस से बॉलीवुड में काम करने के बदलते तरीके पर अपने अनुभव साझा किए और पुराने व नए कलाकारों के बीच फर्क को समझाया। उन्होंने कहा कि शूटिंग के सेट पर उनका तरीका हमेशा से सीधा और फोकस्ड रहा है जबकि आज की नई पीढ़ी का नजरिया थोड़ा अलग है।
आईएएनएस ने जब अरशद वारसी से इंटरव्यू में बॉलीवुड के बदलते वर्क कल्चर को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने एक किस्सा सुनाते हुए कहा, ''एक बार मैं किसी फिल्म की शूटिंग कर रहा था, जहां मुझे लगातार कई स्टंट करने थे। इस दौरान मैंने बिना ज्यादा ब्रेक लिए अपने सारे सीन पूरे किए। उस समय मेरा पूरा ध्यान सिर्फ काम पर था। मेरे लिए काम का मतलब था लगातार परफॉर्म करना और सेट पर मौजूद रहना।''
उन्होंने बताया, "सीन पूरे करते देख डायरेक्टर मेरे काम से काफी प्रभावित हुए और उन्होंने मेरे काम की तारीफ भी की। इसी बातचीत के दौरान डायरेक्टर ने मजाकिया अंदाज में नए कलाकारों का जिक्र भी किया। उन्होंने मुझसे कहा कि आजकल के नए कलाकार थोड़े अलग तरीके से काम करते हैं। वे दो-चार स्टेप्स या थोड़ा सा काम करने के बाद तुरंत आराम के लिए चले जाते हैं।"
अरशद वारसी ने अनुभव को साझा करते हुए कहा, ''पुराने और नए एक्टर्स के बीच फर्क जरूर है लेकिन इसे गलत या सही के तौर पर नहीं देखा जा सकता। हर दौर के कलाकार अपनी परिस्थितियों और जरूरतों के हिसाब से काम करते हैं। पुराने समय में जहां शूटिंग का माहौल अलग होता था, वहीं आज के समय में तकनीक, प्रेशर और काम का स्तर काफी बदल गया है।''
आईएएनएस के इनपुट के साथ
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