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एक प्रचारक का कबूलनामा : ‘बिना नाम के कई संगठन संघ के लिए काम करते हैं’

कोलकाता के बाहरी इलाके में एक शिशु मंदिर चलाने वाले कालीदास भट्टाचार्य की बातों से साफ पता चलता है कि बंगाल में आरएसएस किस तरह से काम कर रहा है।

फाइल फोटोः Getty Images

शोइबल दासगुप्ता

आरएसएस के साथ 1977 से जुड़े कालीदास भट्टाचार्य एक केस में आरोपी बनने से पहले तक सिलीगुड़ी में प्रचारक थे। उन पर यह मुकदमा अब भी चल रहा है, लेकिन आजकल वे कोलकाता के बाहरी इलाके में एक शिशु मंदिर चलाते हैं। बंगाल में संघ किस तरह कार्य कर रहा है, उनकी बातों से इसकी थोड़ी समझ मिलती है।

एक प्रचारक का कबूलनामा : ‘बिना नाम
के कई संगठन संघ के लिए काम करते हैं’
कालीदास भट्टाचार्य

मैं हिंदू संहति नामक एक समूह के बारे में बहुत सुनता हूं और अक्सर मैंने उन्हें ऊंची आवाज में यह कहते सुना है कि बंगाली कायर हैं...

लेकिन बंगाली एक प्रजाति के तौर पर कायर होते हैं। मैं उस समूह के अध्यक्ष तपन घोष को बहुत अच्छी तहर से जानता हूं। वह कभी-कभी हमारे स्कूल भी आता है। कुछ साल पहले गंगासागर में मारवाड़ी समाज के गेस्ट हाउस में ठहरे हिंदू संहति के कुछ सदस्यों का स्थानीय मुसलमानों के साथ झगड़ा हो गया था। मुसलमानों ने उन पर हमला कर दिया था, तब संघ ने उन्हें बचाया था। लेकिन संघ की अपनी सीमाएं हैं और वह सब कुछ नहीं कर सकता। हिंदू संहति जैसे समूहों की निश्चित तौर पर जरूरत है। उन्हें (मुस्लिमों) पीटे जाने की जरूरत है। मुझसे एक बार तपन दा ने हिंदू संहिता के कुछ कार्यकर्ताओं को शरण देने के लिए कहा था। लेकिन मैंने उन्हें बाहर निकाल दिया था क्योंकि मैंने उन्हें संघ की बुराई करते हुए सुन लिया था।

मैं समझता हूं कि कुछ असामाजिक तत्व संघ में प्रवेश कर गए हैं

क्या आप सोचते हैं कि बीजेपी और संघ में सभी अच्छे लोग हैं? बीजेपी में भ्रष्ट नेताओं की भरमार है। बीजेपी अच्छा काम कर सकती थी लेकिन हाल के दिनों में बड़ी संख्या में निम्न जाति के लोग बीजेपी और आरएसएस में शामिल हुए हैं....

रामकृष्ण मिशन का रुख क्या है (संघ के समक्ष)?

विवेकानंद ने हिंदू धर्म को पश्चिम में फैलाया लेकिन कई महंत इसे स्वीकार नहीं करना चाहते हैं। (उन्हें लगता है कि उनका अनुक्रम हिंदू धर्म से अलग है) लेकिन राम कृष्ण मिशन के भीतर एक समूह अब हिंदू धर्म की तरफ वापस मुड़ गया है।

शिशु मंदिर के लिए आप शिक्षकों को कैसे नियुक्त करते हैं?

वे आवेदन करते हैं, परिक्षा पास करते हैं और फिर तब उन्हें प्रशिक्षण दिया जाता है। यह प्रशिक्षण बिल्कुल वैसा ही है जैसा संघ के बुद्धीजीवियों को दिया जाता है।

क्या उन्हें कुछ वेतन दिया जाता है?

बहुत ज्यादा नहीं, 800 रु से 1500 रु के बीच प्रति माह।

स्कूल में किस तरह का सिलेबस पढ़ाया जाता है?

हम सरकार द्वारा निर्धारित सिलेबस के अनुसार बिल्कुल नहीं पढ़ाते हैं। हमारा अपना सिलेबस और अपनी पुस्तकें हैं। हम अपने बच्चों को संघ से जुड़े महान हस्तियों के बारे में बताते हैं और उन सभी तिथियों को मनाते हैं जो संघ द्वारा मनाई जाती हैं।

बंगाल पर मराठा आक्रमण जिसमें उन्होंने मंदिरों को लूटा और जला डाला था, ऐसे विरोधी इतिहास को आप किस तरह से पढ़ाते हैं?

यह कक्षा IV तक का एक प्राथमिक विद्यालय है। इसलिए मराठा आक्रमण के बारे में बिल्कुल भी नहीं पढ़ाया जाता है। हालांकि, हम निश्चित तौर पर संघ के खिलाफ कुछ भी नहीं पढ़ाने जा रहे हैं। अगर संघ कुछ प्रयास (इन बच्चों को पढ़ाने में) कर रहा है तो उसे उसका फायदा मिलना चाहिए।

यह एक मुलमान इलाका है, क्या वे किसी तरह से आपको परेशान करते हैं?

नहीं। मेन रोड तक मुसलमानों की बहुलता है लेकिन स्कूल के आस पास मौजूद घर हिंदुओं के हैं। (मुस्कुराते हुए) वास्तव में, यहां कुछ मुसलमान छात्र भी हैं और उनमें से एक की मां हिंदू है। वह बच्चा स्कूल में होने वाली सभी पूजाओं और अनुष्ठानों में भाग लेता है।

क्या मुसलमानों को इस स्कूल के राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े होने के बारे में पता है?

नहीं, बिल्कुल नहीं।

क्या विद्यालय के शिक्षक आरएसएस की विचारधारा का समर्थन करते हैं?

बिल्कुल नहीं। हाल में, हमारे शिक्षकों में से एक ने मोहन भागवत जी की कोलकाता यात्रा के दौरान होने वाले कार्यक्रमों में भाग लेने के प्रति कुछ अनिच्छा दिखाई। लेकिन हमने उसे गणवेश (संघ की वर्दी) खरीदकर रैली में शामिल कराया।

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