सेवाग्राम के आश्रम में गांधी जी से जुड़ी चीजों की झलक

सेवाग्राम आश्रम में गांधी जी और उनके सहयोगी रहा करते थे। यह अपने आप में अनोखा हैं जो गांधी जी की जीवनशैली से जुड़ी चीजों को समेटे हुए है।

 
सेवाग्राम में बनाया गया लगभग 30 मीटर ऊंचा ये दुनिया का सबसे बड़ा चरखा है।
सेवाग्राम परिसर में मौजूद तुलसी का यह पौधा कस्तूरबा गांधी ने महादेव देसाई की याद में लगाया था, जिसे बापू 1944 में सेवाग्राम लेकर आ गए थे। आगा खां पैलेस में नजरबंदी के दौरान महादेव देसाई की मृत्यु हो गई थी।
साबरमती छोड़ने के बाद गांधी जी ने व्रत लिया था कि वो तब तक साबरमती नहीं लौटेंगे जब तक देश आज़ाद नहीं हो जाता। उनके सहयोगी और व्यापारी सेठ जमनालाल बजाज ने कुल 100 रुपए की लागत से सेवाग्राम में बापू की कुटिया और करीब 300 एकड़ जमीन खरीदी। सेवाग्राम का असली नाम सेगांव था, जिसे बापू ने बदलकर सेवाग्राम किया था।
सेवाग्राम में मौजूद इस कुटिया में ही महात्मा गांधी आगंतुकों से मिलते थे। देश के बड़े-बड़े नेताओं के साथ इसी कमरे में बैठकर बापू ने आजादी के आंदोलन से संबंधित रणनीतियां तैयार की थीं।
यह तांबे का वो कलश है जिसमें बापू की अस्थियां दिल्ली से सेवाग्राम लाई गई थीं। फरवरी 1948 में बापू को सेवाग्राम आना था। आश्रम के लोग उनका इंतजार कर ही रहे थे कि 31 जनवरी को उनकी हत्या कर दी गई। बापू अस्थि के रूप में इस कलश के साथ उस सेवाग्राम आश्रम में वापस लौटे जहां उन्होंने अपनी जिंदगी के आखिरी के 10 साल बिताए थे।
बापू की कुटिया में ओम का ये चिन्ह उनकी शिष्या मीरा बेन जिसे लोग मेडलिन स्लेड के नाम से भी जानते थे, उन्होंने बनाया था। ब्रिटेश सैन्य अधिकारी एडमंड स्लेड की बेटी मीरा ने गांधी के साथ काम करने के लिए अपने पिता का घर छोड़ दिया था।
सादा जीवन, उच्च विचार के हिमायती महात्मा गांधी लकड़ी की इसी चारपाई पर सोते थे। गद्दे और बिछावन का प्रयोग भी वे जरूरत पड़ने पर, सर्दियों में ही करते थे। सेवाग्राम में मौजूद उनकी लकड़ी की ये चारपाई इस बात की तस्दीक करती है कि आज के दौर में ऐसी सादगी की कल्पना भी मुश्किल है।
सेवाग्राम के इस दफ्तर में बापू के सचिव महादेव देसाई द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला टाइपराइटर आज भी रखा है। इस टाइपराइटर का प्रयोग राजकुमारी अमृतकौर भी किया करती थीं।
बापू ने सेवाग्राम में अपने लिए अलग से एक दफ्तर भी बनवाया था। इस दफ्तर में उनके सचिव महादेव देसाई द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला टाइपराइटर आज भी रखा है।
संगमरमर का यह बाथ टब बापू ने उनके जीवनीकार और मशहूर लेखक लुई फिशर के लिए मंगवाया था। लुई फिशर से भारत की गर्मी बर्दाश्त नहीं होती थी तो बापू के कहने पर मशहूर उद्योगपति घनश्यादास बिड़ला ने ये सेवाग्राम भिजवाया था।
कस्तूरबा गांधी द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाली जैकेट और शॉल आज भी सेवाग्राम में मौजूद कुटिया में रखे हुए हैं।

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