गुजरात चुनाव के नतीजे चंद घंटों में, लेकिन बीजेपी और मोदी के खिलाफ शिकायतों पर अब भी ‘जांच’ ही कर रहा है चुनाव आयोग

गुजरात में आचार संहिता उल्लंघन की सबसे ज्यादा शिकायतें बीजेपी और पीएम मोदी के खिलाफ हुई हैं। लेकिन हर मामले पर चुनाव आयोग का अभी तक एक ही जवाब है, “हम जांच कर रहे हैं”

फोटो : IANS
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गुजरात विधानसभा के लिए हुए चुनावों के नतीजे आने में बस चंद घंटे बचे हैं, लेकिन चुनाव आयोग अभी तक सत्तारूढ़ बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ लगे आरोपों पर कोई कार्रवाई नहीं कर सका है। हर मामले पर उसका एक ही जवाब है कि अभी जांच जारी है। इसी रवैये के आधार पर कांग्रेस का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ उसके द्वारा की गई शिकायतों पर आयोग तेजी से कार्रवाई नहीं कर रहा है।

गुजरात के मुख्य निर्वाचन अधिकारी यानी सीईओ के पास सभी सवालों का सिर्फ एक ही जवाब है कि , "हम जांच कर रहे हैं।"

सीईओ के कार्यालय ने दो दिनों तक यह भी नहीं बाताया कि आचार संहिता के उल्लंघन पर उनके पास कितनी शिकायतें आई हैं। कांग्रेस का दावा है कि वह 20 आवेदन दे चुकी है। राज्य में आदर्श चुनाव आचार संहिता 25 अक्टूबर को गुजरात चुनाव की घोषणा के बाद लागू हुई। यह संहिता सरकार को नई योजनाओं से संबंधित नीति की घोषणा करने और सभी दलों को सांप्रदायिक एवं जातीय तनाव बढ़ाने से रोकती है। राजनीतिक पार्टियों पर मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए आधिकारिक मशीनरी का उपयोग करने पर भी प्रतिबंध था।

आचार संहिता उल्लंघन के मुख्य आरोप मोदी के खिलाफ थे। उन्होंने 29 नवंबर को भावनगर जिले के पलिताना में एक जनसभा को संबोधित करते हुए 30 साल से भी पहले हुए संघर्ष की याद दिलाते हुए पाटीदार और राजपूत समुदायों के बीच कथित तौर पर नफरत फैलाने वाला बयान दिया।

मंगध के पास स्थित चोमल गांव में 1982 में राजपूत समुदाय के तीन सदस्यों की मौत हो गई थी और 19 पटेलों को उनकी हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उन्हें बाद में बरी कर दिया गया। राजपूतों ने कथित तौर पर बदला लेने के लिए 1984 में मंगध में नौ पाटीदारों को मार डाला था। इस घटना के बाद मंगध गांव जातीय संघर्ष में उलझा रहा। लेकिन समय के साथ मामला शांत हो गया और तब से इस क्षेत्र में शांति बनी हुई है। बशर्ते उन्हें शांत रहने दिया जाए।

मोदी ने लोगों को उकसाते हुए कहा था, "गुजरात उन दिनों को नहीं भूल सकता, जब (पाटीदार) किसानों को कुछ मुट्ठीभर राजपूतों द्वारा लूट लिया गया, जिनके पास कांग्रेस का आशीर्वाद था। अब लोगों को यह तय करना है कि क्या वह उस दिन को वापस लाना चाहते हैं या नहीं। आप उन लोगों को आशीर्वाद देना चाहते हैं, जिन्होंने मंगध में निर्दोष लोगों की हत्या करवाई?" उन्होंने बार-बार इन सवालों का जवाब मांगा।

गुजरात खेदुत समाज ने भावनगर के जिलाधीश के जरिए मोदी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई और आयोग से आग्रह किया कि उन्हें आगे चुनाव प्रचार न करने दिया जाए, क्योंकि वह समाज में नफरत फैला रहे हैं। लेकिि गुजरात के मुख्य चुनाव अधिकारी बी.बी. स्वेन ने कहा, "हम इसकी जांच कर रहे हैं।"

नियमों के तहत चुनाव प्रचार के लिए मस्जिद, चर्च, मंदिर और पूजा के अन्य स्थानों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, लेकिन वडताल स्वामीनारायण पंथ मंदिर में 4 नवंबर को मोदी और मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की उपस्थिति में मंदिर के मुख्य प्रशासक महाराज घनश्याम प्रसाद दास ने भक्तों से बीजेपी के लिए वोट डालने की अपील की। इसके बारे में पूछे जाने पर भी स्वेन ने कहा, "हम मामले की जांच कर रहे हैं।"

गांधीनगर के प्रधान पादरी ने एक पत्र लिखकर ईसाइयों से अपील की थी कि वे प्रभु यीशु से प्रार्थना करें कि गुजरात भारतीय संविधान के प्रति निष्ठावान रहे, जिस पर आयोग ने जिलाधीश के माध्यम से उन्हें एक नोटिस जारी किया और इस पत्र को लिखने के पीछे उनके उद्देश्य की व्याख्या करने के लिए कहा।

मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने विवादित फिल्म 'पद्मावती' पर प्रतिबंध लगाया था। यह पूछे जाने पर कि क्या यह आचार संहिता का उल्लंघन नहीं है, स्वेन ने कहा, "हम मामले की जांच कर रहे हैं।"

चुनाव अभियान के अंतिम दिन 12 दिसंबर को पीएम मोदी ने केंद्र सरकार द्वारा सामुद्रिक वायुयान सेवा शुरू करने की घोषणा करने के लिए साबरमती नदी के किनारे से धरोई बांध जलाशय तक सामुद्रिक वायुयान में उड़ान भरी। इस मुद्दे पर सवाल पूछे जाने पर स्वेन ने कहा, "हम मामले की जांच कर रहे हैं।"

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 14 दिसंबर को दूसरे और आखिरी चरण के लिए होने वाले मतदान की पूर्व संध्या पर एक गुजराती टीवी चैनल को साक्षात्कार दिया था, जिसे दिखाए जाने पर आयोग ने चैनलों को नोटिस भेजा था।

लेकिन, मतदान के दिन मोदी ने अहमदाबाद में वोट डालने के बाद अपनी स्याही लगी उंगली दिखाते हुए रोड शो किया। कांग्रेस ने इसे आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए आयोग में शिकायत दर्ज कराई, इस बाबत पूछे जाने पर भी स्वेन ने कहा, "हम मामले की जांच कर रहे हैं।"

आचार संहिता के अनुसार, मतदान केंद्रों के 100 मीटर के भीतर पार्टियों और उम्मीदवारों का प्रचार करना प्रतिबंधित है।

कांग्रेस ने एक वीडियो के आधार पर निर्वाचन आयोग के पास शिकायत दर्ज कराई। वीडियो में एक बीजेपी विधायक को मतदान केंद्र से बाहर जाते वक्त मातदाताओं को पैसे देते हुए देखा जा सकता है। स्वेन ने इस पर भी कहा, "हम मामले की जांच कर रहे हैं।"

कांग्रेस ने आयोग से तीन दागी अधिकारियों को चुनाव की ड्यूटी से हटाने की मांग की थी। इनमें से एक थे महेंद्र पटेल, जिन्होंने अपने फेसबुक पेज पर तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणी की थी। अन्य दो दागी व्यक्ति पुलिस अधिकारी थे, जो विवादास्पद मुठभेड़ में हुई हत्याओं में शामिल थे और जमानत पर बाहर हैं। ये हैं राजकुमार पंडियन और अभय चूड़ासमा। आयोग ने इनके खिलाफ शिकायतों पर भी कुछ नहीं किया।

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक और निर्वाचन आयोग की पुलिस तैनाती योजना के नोडल अधिकारी मोहन झा ने कहा, "चूंकि इन अधिकारियों के खिलाफ कोई विभागीय जांच नहीं चल रही है, इसलिए इन्हें मतदान कराने की ड्यूटी देकर किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया गया है।"

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