दुनिया में गलत मैसेज गया, राष्ट्रपति पुतिन के डिनर में LOP को नहीं बुलाने पर मनोज झा ने सरकार पर साधा निशाना

रूस के राष्ट्रपति पुतिन के लिए शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में डिनर रखा गया था। इसमें लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल नहीं थे।

फोटोः IANS
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आईएएनएस

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राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सांसद मनोज झा ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए रखे गए डिनर में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को नहीं बुलाने पर कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से संकीर्ण सोच झलकती है और दुनियाभर में गलत मैसेज गया है।

आरजेडी के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने शनिवार को आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "भारत और रूस के रिश्ते दशकों पुराने हैं। जब मैं बच्चा था, तब भी दोनों देशों के बीच दोस्ती थी। समय के साथ यह रिश्ता और मजबूत हुआ है। लेकिन शुक्रवार के डिनर आयोजन के बारे में सरकार ने जो फैसला लिया, उसमें संकीर्ण सोच दिखाई। साफ तौर पर भेदभाव दिख रहा था। क्या आपको लगता है कि राष्ट्रपति पुतिन के मीडिया सलाहकारों ने यहां की खबरें नोटिस नहीं की होंगी? वे क्या मैसेज लेकर जाएंगे कि यह एक बंटा हुआ घर है?"

उन्होंने आगे कहा, "यह वह मौका था जब भारत एकता दिखा सकता था। अगर हम चुनावों के दौरान लड़ते हैं तो ठीक है, लेकिन ऐसे मौकों पर हमें सार्वभौमिकता और गरिमा दिखानी चाहिए।"


रूस के राष्ट्रपति पुतिन के लिए शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में डिनर रखा गया था। इसमें लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल नहीं थे। शुक्रवार को कांग्रेस ने दावा किया कि मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी को रूसी राष्ट्रपति के सम्मान में रखे गए डिनर में आमंत्रित नहीं किया गया था।

इसी बीच, आरजेडी के सांसद मनोज झा ने प्रभावित उड़ानों के लिए 'इंडिगो' की तरफ से माफी मांगे जाने पर कहा, "इंडिगो की माफी को आधी-अधूरी भी नहीं कहा जाएगा। मुझे दुख है कि उन्होंने हमारी सरकार को झुका दिया।"

 मनोज झा ने कहा कि जनवरी में एक नोटिफिकेशन जारी किया गया था और बाकी सभी एयरलाइंस इसे मान रही थीं। लेकिन उन्होंने 'इंडिगो' रणनीति का इस्तेमाल करके सरकार को नोटिफिकेशन वापस लेने पर मजबूर कर दिया। यह खुद इस बात का संकेत है कि इस देश में पूंजीपतियों की ताकत इतनी बढ़ गई है कि उन्हें आम नागरिकों के साथ क्या होता है, इसकी कोई परवाह नहीं है।

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