'Gen Z के बाद अब Gen Alpha से डरी सरकार' राजस्थान के स्कूलों में नो-एंट्री के फरमान पर भड़के डोटासरा और आशुतोष रांका
कांग्रेस नेता गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया कि सरकार स्कूलों की बदहाली दूर करने के बजाय अपनी कमियां छिपाने के लिए ट्रांसपेरेंसी खत्म कर रही है।

राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के सरकारी स्कूलों को लेकर दिए गए नए आदेश को लेकर हंगामा मच गया है। सरकारी स्कूलों में बाहरी व्यक्ति के प्रवेश, फोटोग्राफी और वीडियो ग्राफी को लेकर कड़े निर्देश के बाद अब कांग्रेस, सीजेपी ने सरकार पर निशाना साधा है। इस नए आदेश को अब सरकार की नाकामी छिपाने का जरिया बताया जा रहा है। कांग्रेस नेता गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया कि सरकार स्कूलों की बदहाली दूर करने के बजाय अपनी कमियां छिपाने के लिए ट्रांसपेरेंसी खत्म कर रही है।
नाकामियों पर पर्दा डालने से तस्वीर नहीं बदलेगी
प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया पर लिखा कि 'बीजेपी सरकार ने सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने के बजाय अपनी नाकामी को ढकने और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली छिपाने का रास्ता खोजा है। शिक्षा विभाग ने पारदर्शिता की बजाय स्कूल परिसर में प्रवेश, फोटो व वीडियो पर रोक, और सवाल पूछने वालों पर पहरा लगा दिया है।' उन्होंने आगे लिखा कि विद्यालय जनता के हैं, बीजेपी की निजी संपत्ति नहीं हैं, जो मनमाने आदेश थोपे जा रहे हैं। स्कूल प्रबंधन एवं विकास से जुड़े तंत्र में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों और समाज की निगरानी को कमजोर करने वाला कोई भी निर्णय शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता के खिलाफ है। नाकामियों पर पर्दा डालने से तस्वीर नहीं बदलेगी!
रांका ने सरकार पर बोला हमला
वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी के आशुतोष रांका ने कहा कि स्कूलों को ठीक करने के बजाय सरकार स्कूल इंस्पेक्शन पर रोक लगाने में लगी है। उन्होंने कहा कि ऐसे ऑर्डर के बावजूद उनकी टीम सरकारी स्कूलों की ग्राउंड रियलिटी देखने और सुधार की कोशिश जारी रखेगी।
आदेश में क्या?
राजस्थान शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों (जिसमें मीडियाकर्मी भी शामिल हैं) के प्रवेश को नियंत्रित करने के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। इन निर्देशों के तहत, छात्रों या स्कूल की गतिविधियों से जुड़ी फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग के लिए स्कूल के प्रिंसिपल या संस्थान के प्रमुख से पहले अनुमति लेनी होगी।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक ललित कुमार द्वारा रविवार को जारी आदेश के अनुसार, प्रिंसिपल या स्कूल के अधिकृत अधिकारियों की पूर्व अनुमति के बिना किसी बाहरी व्यक्ति को स्कूल परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी। हर विजिटर को रजिस्टर में एंट्री करनी होगी। सभी विजिटर्स को स्कूल में प्रवेश करने से पहले विजिटर रजिस्टर में अपनी जानकारी दर्ज करनी होगी।
बाहरी लोगों को क्लासरूम, लेबोरेटरी, लाइब्रेरी, हॉस्टल, खेल के मैदान, रेस्टरूम या उन अन्य क्षेत्रों में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी, जहां छात्रों की गतिविधियां हो रही हों, जब तक कि उनके साथ प्रिंसिपल, कोई शिक्षक या स्कूल का कोई अन्य अधिकृत अधिकारी न हो।
साथ ही, फोटो, वीडियो और लाइव स्ट्रीमिंग के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक है। प्रिंसिपल की पूर्व लिखित अनुमति के बिना छात्रों, शिक्षकों या स्कूल की गतिविधियों से संबंधित फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, साक्षात्कार, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग नहीं की जा सकती है।
इस आदेश में छात्रों की तस्वीरें, वीडियो या निजी जानकारी को किसी भी तरह से इकट्ठा करने या फैलाने पर भी रोक लगाई गई है, जिससे उनकी प्राइवेसी, सम्मान या सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
अगर कोई बिना इजाजत स्कूल में घुसता है, परिसर से बाहर जाने से मना करता है, फोटो या वीडियो लेने की कोशिश करता है या स्कूल की गतिविधियों में रुकावट डालता है, तो प्रिंसिपल को निर्देश दिया गया है कि वे तुरंत स्थानीय पुलिस और जिला शिक्षा अधिकारी को इसकी सूचना दें।
प्रिंसिपल किसी भी ऐसे विजिटर को अंदर आने से रोक सकते हैं, जिसकी मौजूदगी से स्कूल की सुरक्षा, छात्रों की प्राइवेसी, अनुशासन या पढ़ाई-लिखाई के माहौल को खतरा हो सकता है। जरूरत पड़ने पर स्थानीय पुलिस की मदद से किसी बाहरी व्यक्ति को स्कूल परिसर से बाहर भी निकाला जा सकता है।
शिक्षा विभाग ने सभी सुपरवाइजरी अधिकारियों और संस्थानों के प्रमुखों को निर्देश दिया है कि वे इन गाइडलाइंस का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। विभाग ने इस बात पर जोर दिया है कि छात्रों की सुरक्षा और प्राइवेसी सबसे जरूरी है और स्कूलों को इन नियमों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है।
आईएएनएस के इनपुट के साथ
