राफेल पर नए खुलासे के बाद चौतरफा घिरी मोदी सरकार, दिल्ली से बंगाल तक उठी पीएम की भूमिका की जांच की मांग

राफेल डील पर अहम खुलासे के बाद मोदी सरकार चौतरफा घिर गई है। संसद से लेकर सड़क तक इस डील में पीएम मोदी की भूमिका की जांच की मांग तेज हो गई है। राहुल गांधी ने कहा है कि चौकीदार ने सुप्रीम कोर्ट से सबूत छिपाया है, लेकिन जनता की अदालत में वह नहीं बच पाएगा।

फोटो : Getty Images
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नवजीवन डेस्क

राफेल डील पर ताजा खुलासों के बाद मोदी सरकार एक बार फिर अपने ही झूठ के जाल में बुरी तरह से फंस गई है और लगभग सारा विपक्ष एक सुर में पीएम मोदी पर हमलावर हो गया है। शुक्रवार को अंग्रेजी अखबार दि हिंदू में छपी एक रिपोर्ट के बाद जहां विपक्षी दलों ने संसद में राफेल डील पर जेपीसी जांच की मांग को जोरशोर से उठाया, वहीं दिन भर संसद के बाहर भी विपक्षी दलों ने पीएम मोदी पर जोरदार हमला जारी रखा। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में जहां पूरी पार्टी ने इस मुद्दे पर हमलावर रुख अख्तियार किया हुआ है, वहीं टीएमसी, डीएमके और आम आदमी पार्टी जैसे विपक्षी दलो ने भी पीएम मोदी पर सीधा हमला बोला है।

नये खुलासों के बाद शुक्रवार शाम को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अंग्रेजी अखबार द हिंदू के दस्तावेज ट्वीट करते हुए सीधा पीएम मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “चौकीदार ने राफेल मामले में सुप्रीम कोर्ट से सबूत छिपाया है। उसके कांड का कच्चा चिट्ठा अब देश देख चुका है। जनता की अदालत में वो बच नहीं पाएगा।”

इससे पहेल कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने द हिंदू की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के लिखे नोट से स्पष्ट होता है कि पीएमओ की राफेल डील को लेकर फ्रांस सरकार से बात चल रही थी, लेकिन खुद पर्रिकर को इसकी खबर नहीं थी। तिवारी ने मौजूदा रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा रिपोर्ट पर दी गई सफाई पर कहा कि वह जो कह रही हैं कि अखबार को पर्रिकर के नोट को भी छापना चाहिए था, तो अगर पर्रिकर का वह नोट छप जाता तो पीएम मोदी की और ज्यादा किरकिरी होती।

दरअसल शुक्रवार को अंग्रेजी अखबार द हिंदू में एक रिपोर्ट छपी है जिसमें रक्षा मंत्रालय के एक नोट के हवाले से दावा किया गया है कि रक्षा मंत्रालय ने राफेल सौदे के संदर्भ में रक्षा मंत्री को एक पत्र लिखा था, जिसमें कहा गया था कि प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा राफेल सौदे में समानांतर बातचीत से रक्षा मंत्रालय की नेगोशिएशन टीम की कोशिशों को धक्का लग सकता है। इस पत्र के जवाब में पर्रिकर ने अपने नोट में लिखा था कि रक्षा सचिव को प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव से सलाह-मशविरा कर इस मुद्दे को हल करना चाहिए। इस नोट से साफ हो गया कि रक्षा मंत्रालय जब राफेल सौदे के लिए फ्रांस सरकार से बात कर रहा था, उसी समय प्रधानमंत्री कार्यालय भी फ्रांस के साथ समानांतर सौदेबाजी कर रहा था।

इस रिपोर्ट पर खुद रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण को संसद में सफाई देनी पड़ी। उन्होंने सफाई देते हुए अखबार की रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि अखबार को पर्रिकर के नोट को भी छापना चाहिए। लेकिन ‘हिंदू ग्रुप’ के चेयरमैन एन राम ने सीतारमण की सफाई को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि अखबार अपनी रिपोर्ट के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा, “रिपोर्ट अपने आप में पूरी है, क्‍योंकि हमने इसमें मनोहर पर्रिकर की भूमिका की बात नहीं की है और इसके लिए जांच की जरूरत है।”

इससे पहले शुक्रवार दिन की शुरुआत के साथ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रेस कांफ्रेंस कर इस मुद्दे पर सीधा पीएम मोदी को घेरा। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने खुद एयफोर्स का 30 हजार करोड़ रुपये चोरी करके अनिल अंबानी को दिलवाया। उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि वायुसेना के लोग कहते हैं कि पीएम मोदी ने हमें दरकिनार कर खुद अपनी टीम के साथ इस डील को करवाया। राहुल गांधी ने कहा कि यह बात हम सभी को पता है कि पीएम मोदी राफेल डीली से सीधे तौर से जुड़े हुए हैं।

उसके बाद आज संसद में भी राफेल पर हुए नये खुलासों को लेकर जमकर हंगामा हुआ। लोकसभा में भी जमकर हंगामा हुआ और पीएम मोदी के खिलाफ भारी नारेबाजी हुई। लोकसभा ‘चौकीदार चोर है’ के साथ ‘पीएम मोदी इस्तीफा दो ‘के नारे भी लगे। संसद में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई विपक्षी नेताओं ने राफेल डील को लेकर जेपीसी जांच की मांग की। पूरे विपक्ष ने एक सुर में मांग की है कि सरकार राफेल डील की जांच जेपीसी से कराए।

इसके बाद इस मामले में पीएम मोदी की मुश्किलें उस समय और बढ़ गईं जब आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने नये खुलासों की रौशनी में सीबीआई को पत्र लिखकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की। संजय सिंह ने अपने पत्र में प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से भारत के राजकोष को भारी नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हैं। उन्होंने आगे लिखा है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद अखबार द्वारा किए गए खुलासे की जांच होनी चाहिए।

इसके बाद राफेल की गूंज दिल्ली तक ही सीमित नहीं रही। दिल्ली में जारी गहमागहमी के बीच तमिलनाडु में डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने भी राफेल सौदे को लेकर पीएम मोदी को घेरा। स्टालिन ने अखबार की रिपोर्ट को लेकर मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि पीएम मोदी सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के दायरे में आ गए हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दिए बंद लिफाफे में पीएमओ की किसी सौदेबाजी का जिक्र नहीं किया। उन्होंने कहा कि आजाद भारत में कभी कोई प्रधानमंत्री इस तरह के गंभीर आरोपों से नहीं घिरा है।

इसके बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पीएम मोदी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी चुनाव के लिए 'चायवाला' बनते हैं और बाद में 'राफेलवाला' बन जाते हैं। ममता ने कहा कि पीएम मोदी भारत को नहीं जानते। वे गोधरा और अन्य विवादों के बाद यहां तक पहुंचे हैं। यह दुर्भाग्‍य है कि वो पैसे की ताकत की बदौलत पीएम बन गए।

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Published: 08 Feb 2019, 8:43 PM
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