बचपन की ‘अद्भुत’ प्रतिभा ने खराब की सेहत, 22 साल में प्रोफेसर बने तथागत तुलसी को आईआईटी ने नौकरी से निकाला

महज 6 साल की उम्र से ही पढ़ने का शौक लगाने वाले तथागत ने कई वर्ल्ड रिकार्ड भी बनाए हैैं। लेकिन अब इस उम्र में तथागत मानसिक तौर पर परेशान हैं। वह कहते हैं कि बचपन में बहुत कम समय में, बहुत कुछ हासिल कर लेने का दबाव ही उनके लिए अब परेशानी का सबब बन गया है।

फोटोः सोशल मीडिया
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सीटू तिवारी

महज 9 साल की उम्र में दसवीं, 11 में बीएससी, 12 में एमएससी और 21 में पीएचडी करके 22 की उम्र आते-आते आईआईटी बॉम्बे मे प्रोफेसर की प्रतिष्ठित नौकरी। जिस शख्स का अकादमिक रिकार्ड इतना जबरदस्त और अद्भुत हो, वो आज बेरोजगार बैठा है। उसके पास कोई नौकरी नहीं और फिलवक्त इस नौजवान को अपनी ‘अद्भुत’ प्रतिभा, ‘चाइल्ड प्रोडीजी’ (विलक्षण बालक) बन जाने से घुटन महसूस हो रही है। दरअसल 32 साल का यह नौजवान बिहार का ‘वंडर ब्वॉय’ डॉ तथागत अवतार तुलसी है। जिसको बीती जुलाई में आईआईटी बॉम्बे ने प्रोफेसर की नौकरी से निकाल दिया है।

कौन हैं डॉ तथागत अवतार ?

डॉ तथागत अवतार तुलसी पहली बार तकरीबन 22 साल पहले सुर्खियों में आए थे। साल था 1997, जब 9 साल के तथागत ने दसवीं के इम्तेहान देने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में अर्जी दी थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हे परीक्षा देने की अनुमति दे दी, लेकिन इसके खिलाफ अगस्त 1997 में सीबीएसई ने माननीय उच्चतम न्यायालय में अपील की। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने भी दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला बरकरार रखा।

नतीजा ये हुआ कि एक 9 साल के बच्चे ने दसवीं की परीक्षा दी और वो उसमें पास भी हुआ। उसकी इसी विलक्षण बुद्धि के चलते 1997 में दूरदर्शन ने उसे ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा ’ गाने में कंप्यूटर चलाते हुए फिल्मांकित भी किया था। इसके बाद तथागत ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। महज 11 साल की उम्र में पटना यूनीवर्सिटी से भौतिक विज्ञान में बीएससी, 12 साल में पटना यूनीवर्सिटी से ही एमएससी और 15 साल की उम्र में इंडियन इन्सटीट्यूट ऑफ साइंस, बैंगलोर से ‘ क्वांटम कंप्यूटर’ विषय पर पीएचडी करनी शुरू की, जो 21 साल में पूरी हो गई। इसके बाद वो 22 साल की उम्र में आईआईटी बॉम्बे में वो असिस्टेंट प्रोफेसर बन गए और साल 2013 में उनकी नौकरी पक्की हो गई।

आईआईटी बॉम्बे ने नौकरी से क्यों निकाला ?

31 जुलाई 2019 को एक पत्र जारी करके आईआईटी बॉम्बे ने तथागत अवतार तुलसी को नौकरी से हटाने की सूचना दी है। पत्र के मुताबिक तथागत को ‘संस्थान से लंबे समय तक अनुपस्थित रहने और अलग-अलग समय पर संस्थान द्वारा जारी निर्देशों का पालन नहीं करने की वजह’ से नौकरी से हटाया जा रहा है। तथागत को अपना पक्ष रखने के लिए 31 जनवरी 2019 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिसका जवाब उन्होंने 15 फरवरी को दिया। लेकिन संस्थान उनके जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ और 22 जून को संस्थान के बोर्ड ऑफ गर्वनर की मीटिंग में तथागत को नौकरी से हटाने का फैसला लिया गया।

तथागत के तर्क

वहीं तथागत ने नवजीवन से बातचीत में बताया कि आईआईटी में नौकरी के बाद से ही उसकी नींद अनियमित हो गई थी। ये समस्या साल 2013 में बहुत बढ़ गई, जिसके बाद डॉक्टर ने उसे आराम की सलाह दी। जनवरी 2014 से तथागत ‘एक्सट्रा आर्डिनरी लीव’ पर चले गए, जो संस्थान ने उन्हें दिसंबर 2017 तक दी।

तथागत के मुताबिक इस बीच उन्होंने महसूस किया कि उनकी परेशानी की वजह बंबई का उमस भरा मौसम है। जिसके आधार पर उन्होंने आईआईटी दिल्ली ट्रांसफर के लिए अर्जी भी दी थी, जिसे आईआईटी एक्ट के नियम के आधार पर ठुकरा दिया गया। इसके अलावा उन्होंने छुट्टी पर रहते वक्त ही साल 2015 से आईआईटी दिल्ली, पटना और कानपुर में भी नौकरी के लिए अप्लाई किया, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।

बकौल तथागत, “मैं मानता हूं कि आईआईटी में मेरा परफारमेंस 2010 से 2013 तक अच्छा नहीं रहा, क्योंकि मेरा स्वास्थय अच्छा नहीं था। लेकिन मेरा पहले का रिकार्ड बहुत अच्छा रहा। मेरी पीएचडी को 85 साइटेशन मिल चुका है। इसके आधार पर ही मुझे कनाडा के इन्सटीट्यूट ऑफ क्वान्टम से भी ऑफर था। मेरे लिए बेहतर होता, अगर मैं आईआईटी बॉम्बे जाने की बजाय कनाडा चला जाता।”

प्रधानमंत्री से नौकरी बचाने की अपील

बिहार के गया जिले के खिजरसराय के तथागत अवतार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अपनी नौकरी बचाने की अपील की है। उनका कहना है कि जिस तरह से साल 2004 में आईएएस और आईपीएस का स्वास्थय आधार पर कैडर ट्रांसफर का प्रावधान किया गया है, उसी तरह आईआईटी एक्ट में भी बदलाव लाए जाएं।

अविवाहित तथागत फिलहाल पटना में रह रहे हैं। उनके पिता तुलसी नारायण प्रसाद पेशे से वकील और मां चंचल देवी शिक्षिका हैं। 6 साल की उम्र से ही तथागत को पढ़ने का शौक लग गया था। जिसके चलते उनकी उपलब्धियों पर कई वर्ल्ड रिकार्ड भी बनें। लेकिन इस उम्र में तथागत मानसिक तौर पर परेशान हैं। वह कहते है, “बचपन में बहुत कम समय में, बहुत कुछ हासिल कर लेने का दबाव ही मेरे लिए अब परेशानी का सबब बन गया है।”

शायद तथागत की कहानी हमें बच्चों के अतिमहत्वाकांक्षी ना होने और उम्र के हिसाब से सामान्य विकास का सबक भी सिखलाती है। ये तो विशेषज्ञों के लिए गहन शोध का विषय है, फिलहाल तथागत को अपनी समस्या के निदान की पीएम से भरपूर उम्मीद है। उनका कहना है कि जल्द ही अगर उनकी स्थिति पर विचार नहीं किया गया तो इस मानसिक तनाव का असर उनके स्वास्थ्य पर और नकारात्मक होगा, जो पहले से ही खराब चल रहा है।

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Published: 19 Oct 2019, 8:30 PM