विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस: भारत में मीडिया की आजादी पर बढ़े हमले, 2018 में मारे गए कई पत्रकार

भारत में पिछले कुछ वर्षों के दौरान प्रेस स्वतंत्रता में कमी आई है। मीडिया वॉचडाग ‘द हूट’ ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि भारत में पत्रकारों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।

सांकेतिक फोटो
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नवजीवन डेस्क

आज विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस है। भारत में प्रेस की आजादी को लेकर मीडियाकर्मियों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। लेकिन ज्यादातर पत्रकार इस बात से सहमत हैं कि हाल के वर्षों में पत्रकारिता और पत्रकारों की आजादी पर अंकुश बढ़ा है।

मीडिया वॉचडाग ‘द हूट’ ने एक रिपोर्ट जारी कर कहा है कि भारत में पत्रकारों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में पिछले प्रेस की स्वतंत्रता में कमी आई है। द हूट ने कहा है कि 2018 के पहले 4 महीने में ही कई पत्रकारों की हत्या हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, 2018 के पहले 4 महीनों के दौरान पूरे देश में पत्रकारों और मीडियाकर्मियों पर हुए हमलों की संख्या 13 है, जिसमें से 3 घटनाएं पश्चिम बंगाल में हुईं। जबकि 2017 में 46 लोगों पर हमले किए गए थे।

इस वर्ष जारी विश्व प्रेस सूचकांक के अनुसार 180 देशों में भारत 138वें स्थान पर था। 2017 में भारत 136वें और 2016 में 133वें स्थान पर था। द हूट की रिपोर्ट के अनुसार, "प्रथमदृष्ट्या जांच के आधार पर पत्रकारों को उनकी रिपोर्टिग के संबंध में मारा जा रहा है।" द हूट ने कहा कि इसके अलावा, एक पत्रकार पर मानहानि का मामला भी दर्ज किया गया है। वहीं एक पत्रकार पर राजद्रोह का मामला भी दर्ज किया गया। स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है कि राज्य, केंद्र और न्यायपालिका नियामक नीतियों व न्यायिक आदेशों से बोलने की आजादी को कुचल रहे हैं।

द हूट ने कहा, "2018 के प्रथम चार महीनों के दौरान भारत में मीडिया की स्वतंत्रता में कमी आई। इस दौरान 50 बार सेंसरशिप और 20 बार इंटरनेट स्थगित करने के प्रयास किए गए। यहां तक कि कई बार ऑनलाइन कंटेंट को भी हटाया गया।" इस दौरान तीनों पत्रकार जनवरी से अप्रैल महीने के दौरान वाहनों से कुचल कर मारे गए।

26 मार्च को बिहार के भोजपूर में एक अखबार के दो पत्रकारों को एक एसयूवी ने टक्कर मार दी थी, जिससे दोनों की मौत हो गई। पुलिस ने कहा कि वाहन गांव का एक नेता चला रहा था और एक न्यूज रिपोर्ट को लेकर दोनों के बीच तीखी बहस हुई थी, जिसके बाद इस घटना को अंजाम दिया गया। इस घटना के एक दिन बाद, मध्यप्रदेश के भिंड में एक टीवी रिपोर्टर को एक ट्रक ने कुचल दिया। संदीप ने भिंड में रेत माफिया के खिलाफ एक स्टिंग ऑपरेशन किया था और उसने पुलिस को बताया था कि उसे जान से मारने के धमकी भरे फोन आ रहे हैं।"

हूट की रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि राजनीतिज्ञ, व्यापारी, हिंदू दक्षिणपंथी समूह, पुलिस, अर्धसैनिक बल, सरकारी एजेंसियां जैसे फिल्म प्रमाणन बोर्ड, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, राज्य सरकार, वकील और यहां तक कि मीडिया समूह भी अभिव्यक्ति की आजादी पर लगाम लगाने के प्रयास कर रहे हैं। द हूट ने कहा कि, "अभिव्यक्ति की आजादी पर कई तरह के हमले के बावजूद मौजूदा संघर्ष ने इन अवरोधों के खिलाफ लड़कर अच्छे परिणाम दिए हैं।"

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Published: 02 May 2018, 8:57 PM