अयोध्‍या में हिंदू बाहुल्य गांव में अकेले मुस्लिम ने जीता प्रधानी का चुनाव, जानें क्यों हो रही इसकी चर्चा

अयोध्या में रुदौली विधानसभा क्षेत्र का राजनपुर गांव क्षेत्र के सैकड़ों गांवों की तरह ही साधारण लगता है, मगर जिस चीज ने इसे अचानक असाधारण बना दिया है, वह यह कि इस हिंदू बहुल गांव ने हाल ही में एक मुस्लिम को ग्राम प्रधान चुना है।

फोटो: आस मोहम्मद कैफ
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आस मोहम्मद कैफ

अयोध्या में रुदौली विधानसभा क्षेत्र का राजनपुर गांव क्षेत्र के सैकड़ों गांवों की तरह ही साधारण लगता है, मगर जिस चीज ने इसे अचानक असाधारण बना दिया है, वह यह कि इस हिंदू बहुल गांव ने हाल ही में एक मुस्लिम को ग्राम प्रधान चुना है। हाफिज अजीमुद्दीन खान राजनपुर के नव-निर्वाचित ग्राम प्रधान हैं। इस प्रमुख हिंदू गांव में एकमात्र उन्हीं का मुस्लिम परिवार है।
हाफिज सात हिंदू उम्मीदवारों के साथ अकेला मुस्लिम उम्मीदवार थे।

गांव वाले बताते हैं कि उनके पिता भी प्रधान थे और उन्होंने बेहद निष्पक्ष और ईमानदारी से प्रधानी की जिससे लोगों के मन में उनके बेटे के प्रति विश्वास पैदा हुआ। प्रधान का नाम हाफिज अज़ीमुदीन है। अज़ीमुदीन ने इस जीत को गांव की हिन्दू मुस्लिम भाईचारे के जीत बताया है और उन्होंने कहा है कि वो इस भरोसे को कभी टूटने नही देंगे। हाफिज ने कहा, "मेरी जीत गांव राजनपुर में ही नहीं, बल्कि पूरे अयोध्या में हिंदू-मुस्लिम आत्मीयता का एक उदाहरण है। मैंने कभी सांप्रदायिक कार्ड नहीं खेला और अपने भाइयों और बहनों से वोट मांगा। मैं समूचे गांव को एक विस्तारित परिवार के रूप में मानता हूं।"


गांव के लिए अपनी प्राथमिकताएं बताते हुए हाफिज ने कहा, "ग्राम प्रधान के पास आने वाले सभी धन का उपयोग गांव के विकास के लिए किया जाएगा। बुनियादी सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी, और मनरेगा के तहत हकदार सभी लोगों को रोजगार दिया जाएगा।"

उन्होंने आगे कहा कि वह लोगों की भावनाओं को समझते हुए तालमेल के साथ काम करेंगे और धन का समुचित उपयोग सुनिश्चित करेंगे। हाफिज की जीत से स्थानीय लोग भी उतने ही रोमांचित हैं।

स्थानीय निवासी मनोहर लाल ने कहा, "हमारे गांव ने साबित कर दिया है कि हम सांप्रदायिक राजनीति से प्रभावित नहीं हुए हैं। हाफिज युवा हैं और हमें विश्वास है कि वह अच्छा काम करेंगे।"

रजनपुर गांव के किसान शेखर साहू कहते हैं कि इस बार लोगों ने धर्म को नहीं, इंसान को देखकर अपना वोट डाला है। गांव के एक अन्य व्यक्ति कहते हैं कि हमने सिर्फ इस आधार पर वोट दिया था कि गांव और हमारे लिए क्या बेहतर है।

रजनपुर ग्राम पंचायत से प्रधान पद के लिए 7 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। उनमें से एक मात्र मुस्लिम हाफिज अजीमुद्दीन खां भी चुनाव लड़ रहे थे। 670 वोटर की आबादी वाले रजनपुर गांव से हाफिज अजीमुद्दीन खां को 191 वोट मिले।‌ अजीमुद्दीन ने अपने निकटतन प्रतिद्वंदी को 83 वोट से हराकर जीत हासिल की है। गांव की जनता ने किसी धर्म या जाति के हथकण्डे को नकारते हुए प्रत्याशी का व्यवहार, कर्मठता तथा ईमानदारी को पैमाना मानते हुए अजीमुद्दीन खां को अपने ग्राम का प्रधान चुनकर गांव में साम्प्रदायिक सौहार्द की एक अनोखी मिसाल कायम की गई हैं।


हाफिज अजीमुद्दीन रजनपुर में अपने परिवार के साथ रहते हैं। रजनपुर गांव में केवल यही एक परिवार मुस्लिम परिवार रहता हैं। रजनपुर गांव में केवल 27 मुस्लिम मतदाता हैं और ये सभी लोग अजीमुद्दीन के परिवार के सदस्य हैं। अजीमुद्दीन पेशे से किसान हैं। उन्होंने एक मदरसे से हाफिज और आलिम की डिग्री हासिल ली हुई है। वे 10 वर्ष तक एक मदरसे के अध्यापक भी रह चुके हैं और अब अपने परिवार के साथ गांव में ही रहकर खेती करते हैं।

हाफिज अज़ीमुदीन बताते हैं कि 25 वर्ष पूर्व उनके पिता सलाहुद्दीन भी इसी ग्राम पंचायत से प्रधान रह चुके हैं। उसके बाद सीट आरक्षित हो गई थी, इस बार सीट अनारक्षित होने पर तमाम गांव वालों के आग्रह पर वे चुनावी मैदान में कूदे और जीत हासिल की है । उन्होंने कहा कि उन्हें भी कम उम्मीद लग रही थी कि वह चुनाव जीतेंगे लेकिन चुनाव परिणाम ने एक नई इबारत लिख दी।

उल्लेखनीय है कि कोविड महामारी के कारण राज्य सरकार ने ग्राम प्रधानों और जिला पंचायत सदस्यों के शपथ ग्रहण समारोह को स्थगित कर दिया है। सरकार ने जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुखों के चुनाव को भी स्थगित कर दिया है। शपथ ग्रहण समारोह और ये चुनाव 15 जून के बाद होने की उम्मीद है।

आईएएनएस के इनपुट के साथ

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