अयोध्या केस पर फैसले से पहले अब संघ ने जारी की अपील, प्रचारक वर्ग की बैठक से पहले कहा-सभी मानें कोर्ट का निर्णय

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले बड़ी अपील करते हुए कहा है कि राम मंदिर पर फैसला चाहे जो भी हो, सभी से खुले मन से उसे स्वीकर करें। संघ ने ये अपील दिल्ली में प्रचारक वर्ग की बैठक से पहले की है।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

अयोध्या के बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद में सुप्रीम कोर्ट के संभावित फैसले से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने बुधवार को देशवासियों से खुले मन से अदालती फैसले को स्वीकार करने की अपील की है। आरएसएस ने कहा कि राम मंदिर पर कोर्ट का फैसला चाहे जो हो, सभी खुले मन से उसे स्वीकार करें। आरएसएस ने यह अपील बुधवार को दिल्ली में शुरू हुई अपने प्रचारक वर्ग की अहम बैठक से पहले किया है।

बता दें कि दिल्ली में आयोजित प्रचारक वर्ग की बैठक पहले 30 अक्टूबर से 5 नवंबर तक हरिद्वार में होनी थी। लेकिन कतिपय कारणों से उसे स्थगित कर दिया गया और फिर अचानक दिल्ली में बैठक शुरू हो गई। इस बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत, सरकार्यवाह सुरेश भैयाजी जोशी सहित अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी प्रमुख रूप से भाग ले रहे हैं।

इस बैठक के बीच ही आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार की तरफ से जारी एक सूचना में कहा गया कि “आगामी दिनों में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के केस पर सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय आने की संभावना है। निर्णय जो भी आए, उसे सभी को खुले मन से स्वीकार करना चाहिए। निर्णय के पश्चात देश भर में वातावरण सौहार्द्रपूर्ण रहे, यह सबका दायित्व है। इस विषय पर भी बैठक में विचार हो रहा है।”

इससे पहले प्रचार प्रमुख अरुण कुमार ने बताया कि पहले 30 अक्टूबर से 5 नवंबर तक हरिद्वार में प्रचारक वर्ग के साथ दो दिन की बैठक निश्चित थी, लेकिन आवश्यक कारणों से उसे स्थगित कर दिया गया। लेकिन अब यह बैठक हरिद्वार के स्थान पर दिल्ली में हो रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देशभर में वातावरण सौहार्दपूर्ण रहे, इस पर भी बैठक में चर्चा की जा रही है।

गौरतलब है कि अयोध्या के बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में अंतिम सुनवाई पूरी हो चुकी है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की 5 सदस्यीय पीठ ने 40 दिन तक लगातार सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस बीच वर्तमान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि इस मामले पर उससे पहले सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ सकता है।

इससे पहले पीएम मोदी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ भी अलग-अलग मौकों पर विवाद के संभावित फैसले को लेकर माहौल सौहार्द्रपूर्ण बनाए रखने की बात कह चुके हैं। रविवार को अपने मन की बात कार्यक्रम में पीएम ने सितंबर 2010 में आए इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि जब हाई कोर्ट ने अयोध्वा विवाद पर अपना फैसला सुनाया था तो कई तरह के लोग मैदान में आ गए थे। न जाने कैसी-कैसी बातें की गईं, लेकिन जब फैसला आया तो देश ने आनंददायक बदलाव महसूस किया।

बता दें कि सितंबर 2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अयोध्या ववाद में अपने फैसले अयोध्या की 2.77 एकड़ विवादित भूमि को मामले के तीनों पक्षकारों- सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच बराबर-बराबर बांटने का आदेश दिया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले को तीनों पक्षों द्वारा चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में करीब 14 याचिकाए दाखिल की गई थीं।

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