उन्नाव रेप कांडः सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद योगी सरकार की भारी किरकिरी, बीजेपी भी सवालों के घेरे में

उन्नाव रेप कांड में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इस मामले का आरोपी बीजेपी विधायक सीबीआई जांच जारी रहने के बावजूद इतना ताकतवर बना रहा कि जेल में रहते हुए भी बाहर उसका आपराधिक रुतबा कायम था।

फोटोः सोशल मीडिया
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उमाकांत लखेड़ा

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उन्नाव रेप कांड में दखल देते हुए दुष्कर्म से संबंधित पांच मामलों को दिल्ली स्थानांतरित करते हुए मामले में रोजाना सुनवाई के लिए एक विशेष न्यायाधीश को नियुक्त करने का आदेश दिया। अदालत ने सीबीआई को रेप पीड़िता के साथ हुए सड़क हादसे की जांच 7 दिन में पूरी करने और 45 दिनों के भीतर मामले का ट्रायल पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

रेप पीड़िता के पत्र पर संज्ञान लेते हुए मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने पीड़िता को 25 लाख रुपये की मुआवजा राशि तत्काल देने का निर्देश दिया है और सीआरपीएफ को पीड़िता, उसके परिवार और वकील को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में यह मामला भी लाया गया कि जेल में बंद रेप पीड़िता के चाचा को कुलदीप सेंगर और उसके गुर्गों से जान मारने की धमकियां मिल रही हैं, इसलिए सुरक्षा की खातिर उन्हें भी तिहाड़ जेल शिफ्ट किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट के आज के आदेश से प्रदेश की योगी सरकार की छवि पर सबसे ज्यादा बट्टा इस बात से लगा है कि वह नाबालिग से रेप के आरोपियों के जेल में रहते हुए जेल के बाहर आपराधिक साम्राज्य बढ़ाने पर कोई रोक नहीं लगा सकी। गवाहों और परिजनों को सबूत मिटाने की नीयत से निर्ममतापूर्वक सड़क दुर्घटना मे जान से मारने की कोशिश के मामलों में राज्य का पुलिस तंत्र सत्ताधारी दल के नेता को लाभ पहुंचाता नजर आया।

उत्तर प्रदेश में गरीबों और कमजोरों को किस तरह न्याय पाने के लिए दर-दर भटककर जान जोखिम में डालना पड़ता है, यह ताजा मामला इसका एक जीवंत उदाहरण है। बीजेपी के यूपी और केंद्रीय नेतृत्व की नाक के नीचे सब कुछ डेढ़ साल से चलता रहा। विधायक कुलदीप सेंगर का रुतबा ही कहा जाएगा कि बीजेपी की राज्य इकाई की इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह कुकृत्य के मामले में जेल में बंद अभियुक्त विधायक को पार्टी से निलंबित करने की हिम्मत जुटा पाती।

इस मामले में बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व की भी तंद्रा तब टूटी जब संसद सत्र के दौरान विपक्ष ने इस मामले को हर रोज सदन में उठाकर केंद्र सरकार और बीजेपी नेतृत्व पर सवाल उठाने शुरू किए। ट्रक दुर्घटना के जरिए कार में सवार पीड़िता और उसके परिजनों पर जानलेवा हमला करवाने के मामले में जब तक सीबीआई ने विधायक पर केस दर्ज नहीं किया तब तक बीजेपी तस्सली से बैठी रही। रेप के आरोप में कोई विधायक अगर राज्य की जेल में बंद है तो उसे तब तक पार्टी से निलंबित रखने की जहमत क्यों नहीं उठाई गई, जब तक वह खुद पर नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार के आरोपों से पाक साफ नहीं निकलता।

डेढ़ बरस पहले रेप पीड़िता के पिता की जान पुलिस हिरासत में पिटाई से इसलिए हो जाती है क्योंकि उसने बलात्कारी विधायक के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी। पीड़िता को न्याय दिलाने में पुलिस भी तब तक कार्रवाई करने से बचने का हर उपाय तलाशती रही जब तक पीड़िता पिता की मौत के बाद बलात्कारी विधायक के खिलाफ केस दर्ज करने के लिए सीएम आदित्यनाथ के सरकारी आवास के बाहर आत्महत्या करने को विवश नहीं हो गई।

उन्नाव रेप कांड के घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश में रेप और संगीन अपराधों में कोर्ट में चल रहे ट्रायल पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। पिछले साल बृज क्षेत्र में सबसे ज्यादा 205 रेप के मामलों में मात्र 140 मामलों में ही अपराधियों को जेल में डाला गया है। 22 नामित आरोपी तो अभी तक कानून की पकड़ से बाहर हैं।

रेप के आंकड़ों पर पर्दा डालने और राजनीतिक सरंक्षण से पुलिस और कानून की नजर से बचने के बावजूद 2018 में यूपी मे रेप के रजिस्टर्ड मामलों में पिछले साल के मुकाबले 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज आंकड़े बताते हैं कि बीते साल एक दिन में औसतन 8 रेप के मामले दर्ज हुए और इसी क्रम में 30 महिलाओं का औसतन अपहरण हो रहा है। हालांकि राज्य की पुलिस का बचाव में कहना है कि दर्ज मामलों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण यह है कि पुलिस उदारतापूर्वक शिकायतों का संज्ञान ले रही है। पुलिस का दावा है कि कई मामलों के तार घरेलू हिंसा से भी जुड़े हुए पाए गए हैं।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के रुख से उन्नाव रेप मामले में इंसाफ की उम्मीद जगी है। इस मामले में सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ शुक्रवार को भी सुनवाई जारी रखेगी। आज की सुनवाई में पीठ ने कहा है कि चिकित्सकीय रूप से स्वस्थ पाए जाने पर पीड़िता और उसके वकील को लखनऊ से दिल्ली बेहतर इलाज के लिए स्थानांतरित किया जाए। इस मामले में कोर्ट ने परिवार के विचार भी मांगे हैं।

पीड़िता ने साल 2017 में बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। वह रविवार को अपनी मौसी, चाची और वकील महेंद्र सिंह के साथ रायबरेली जा रही थी, तभी सामने से आ रहे एक ट्रक ने उनकी कार को टक्कर मार दी। ट्रक के आगे-पीछे की नंबर प्लेट पर कालिख पुता हुआ था। हदसे में पीड़िता की मौसी और चाची की मौत हो गई, जबकि पीड़िता और उसके वकील की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। हादसे में मारी गई मौसी पीड़िता के साथ रेप के मामले की गवाह थीं।

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