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बिहार: 2019 के लोकसभा चुनाव में पटना साहिब से विपक्ष के उम्मीदवार हो सकते हैं शत्रुध्न सिन्हा

पटना साहिब से बीजेपी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा

सिन्हा अपने प्रशंसकों के बीच बिहारी बाबू के रूप में लोकप्रिय हैं और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। वे पटना से कई बार सांसद रह चुके हैं।

कांग्रेस और आरजेडी दोनों ने यह इशारा किया है कि वे अपनी पार्टी में शत्रुध्न सिन्हा को जगह दे सकते हैं। बीजेपी नेता और पीएम मोदी के कटु आलोचक सिन्हा ने यह वक्तव्य दिया था कि वे अगला चुनाव कांग्रेस या आरजेडी के टिकट पर लड़ सकते हैं। दोनों दलों ने इसी को लेकर प्रतिक्रिया दी है।

नाम न बताने की शर्त पर आरजेडी के एक नेता ने बताया कि उन्हें विपक्ष के उम्मीदवार के तौर पर 2019 के लोकसभा चुनाव में पटना साहिब से खड़ा किया जा सकता है।

हालांकि, दोनों दलों ने यह कहा है कि इसका फैसला सिन्हा को ही करना है कि वे किस पार्टी से चुनाव लड़ना चाहेंगे।

आरजेडी के एक नेता ने कहा, “अभी तक उन्होंने कोई निर्णय नहीं लिया है। न ही उन्होंने औपचारिक रूप से किसी चीज की घोषणा की है।”

इस समझ को दोहराते हुए राज्यसभा सदस्य और आरजेडी प्रवक्ता मनोज झा ने नवजीवन को बताया कि सिन्हा के लिए पार्टी में हमेशा एक ‘स्वाभाविक जगह’ है और वे भी हमेशा से बिहार की पसंद रहे हैं।

मनोज झा ने कहा, “उन्हें सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रखना चाहिए...वे सांस्कृतिक पहचान का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसकी हर बिहारी को जरूरत है। उसके अलावा, लालू जी के परिवार से उनके बहुत अच्छे संबंध हैं। मैंने उन्हें लालू जी के खिलाफ कभी कोई बुरी बात कहते हुए नहीं देखा।

बिहार में आरजेडी की सहयोगी पार्टी कांग्रेस सिन्हा के बारे में बात करने को लेकर थोड़ा सतर्क लग रही थी, फिर भी बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि जो भी कांग्रेस की विचारधारा को स्वीकार करता है और उसे मानता है, उसका पार्टी में स्वागत है।

गोहिल ने कहा, “आडवाणी जी, सिन्हा जी, जोशी जी जैसे वरिष्ठ नेताओं को, जिन्होंने पार्टी के लिए अपना खून-पसीना बहाया, उन्हें मोदी-शाह की जोड़ी के हाथों अपमानित होना पड़ रहा है। आत्म-सम्मान रखने वाला कोई भी नेता बीजेपी में बना नहीं रह सकता।”

गोहिल ने जोड़ा, “जो भी कांग्रेस के सिद्धांतों और विचारधारा से सहमत है वह कांग्रेस में आ सकता है।”

सिन्हा अपने प्रशंसकों के बीच बिहारी बाबू के रूप में लोकप्रिय हैं और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। वे पटना से कई बार सांसद रह चुके हैं।

सिन्हा पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा के काफी करीब है और आडवाणी के शिष्य रह चुके हैं। नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें मोदी खेमे द्वारा पार्टी में किनारे कर दिया था।

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