सबरीमाला विवाद से नहीं मिला बीजेपी को फायदा, निकाय चुनाव में पार्टी को मिली करारी हार

केरल के सबरीमला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश के आदेश के खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों का नेतृत्व करने वाली बीजेपी को उम्मीद के अनुरूप इसका राजनीतिक लाभ नहीं मिला है। पार्टी को स्थानीय निकाय उपचुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

सबरीमाला मंदिर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रही बीजेपी की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। सबरीमाला मंदिर के मुद्दे पर आंदोलन का जोरदार नेतृत्व करने वाली बीजेपी को इसका राजनीतिक लाभ नहीं मिला है। दरअसल केरल में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में 39 में से बीजेपी को सिर्फ दो सीटों पर ही जीत मिली है। जबकि सबरीमाला मंदिर पर राज्य की वाम मोर्चा सरकार का मुखर विरोध करने के बाद भी लोगों ने चुनाव में 21 सीटों पर एलडीएफ के प्रत्याशियों को चुना है। वहीं, कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ को भी 12 सीटें मिली हैं। स्थानीय निकाय के लिए हुए उपचुनाव के नतीजे शुक्रवार को जारी किये गए।

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के मुद्दे पर हुए विरोध प्रदर्शनों में बीजेपी ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया था। लेकिन सबरीमाला विवाद में विरोध-प्रदर्शन का सबसे बड़ा केंद्र रहे पंडालम राज परिवार के इलाके पत्थानमथिट्टा में भी बीजेपी को तीसरे नंबर पर संतोष करना पड़ा है। माना जा रहा था कि यहां बीजेपी का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहेगा। बीजेपी को इस उपचुनाव में सिर्फ अलपुज्जा जिले में पंचायत वार्ड की दो सीटें मिली हैं। पंडालम नगर पालिका में भी बीजेपी को सफलता नहीं मिली। खास बात ये है कि यहां के कडक्कड़ में बीजेपी उम्मीदवार को महज 12 वोट मिले, जबकि यहां से मुस्लिम समूह एनडीएफ के नेतृत्व वाली एसडीपीआई के उम्मीदवार को कामयाबी मिली है।

सत्ताधारी माकपा नीत एलडीएफ ने स्थानीय निकाय उपचुनाव में 39 सीटों में से 21 सीटें जीत कर साबित कर दिया कि सबरीमला विवाद का राज्य की जनता पर कोई असर नहीं पड़ा है। उसके वोट बैंक पर कोई असर नहीं पड़ा, बल्कि वह पूरी तरह सुरक्षित ही रहा। चुनाव से पहले भी एलडीएफ के खाते में 21 सीटें थी। चुनाव में कांग्रेस नीत यूडीएफ 12 सीटें जीतकर दूसरे स्थान पर रही है। चुनाव में एसडीपीआई ने कुल दो सीटें जीती हैं। पहले पार्टी का एक सीट पर कब्जा था। तीन आजाद उम्मीदवार भी चुनाव में जीते हैं। बीजेपी ने मंदिर विवाद पर इस चुनाव में हिंदू भावनाओं को भुनाने की जमकर कोशिश की थी।

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