बीजेपी सरकार का दोहरा चरित्र: लाल किला निजी हाथों में, लेकिन हेडगेवार स्मृति को दिया पर्यटन स्थल का दर्जा

नागपुर के हेडगेवार स्मृति मंदिर को पर्यटन स्थल का दर्जा देने का प्रस्ताव महाराष्ट्र पर्यटन विकास कॉर्पोरेशन की ओर से किया गया था, जिसे जिला योजना समिति ने तत्काल प्रभाव से मंजूर कर लागू भी कर दिया।

फोटो: सोशल मीडिया
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विश्वदीपक

ज्यादा दिन नहीं हुए जब मोदी सरकार ने पर्यटकों के बीच लोकप्रिय, ऐतिहासिक महत्व की मुगलकालीन इमारत लाल किले को व्यवस्था के नाम पर डालमिया भारत ग्रुप को सौंप दिया था।अब महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार ने हेडगेवार स्मृति मंदिर को पर्यटन स्थल का दर्जा दिया है। यानि, मोदी सरकार जहां एक तरफ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में अहम स्थान रखने वाले लाल किले जैसी विश्व प्रसिद्ध इमारत को निजी हाथों में सौंप कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रही, वहीं दूसरी ओर स्वतंत्रता आंदोलन में अंग्रेजों के लिए भर्ती अभियान चलाने वाले आरएसएस से जुड़ी इमारतों के रखरखाव का जिम्मा ले रही है।

फोटो: नवजीवन
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नागपुर के हेडगेवार स्मृति मंदिर को महाराष्ट्र सरकार ने पर्यटक स्थल का दर्जा दिया

गौरतलब है कि मोदी सरकार ने लाल किले को डालमिया भारत ग्रुप को सौंपने वाले समझौते पर 13 अप्रैल को दस्खत किए। इसके तीन दिन बाद ही नागपुर में मौजूद हेडगेवार स्मृति मंदिर को बीजेपी सरकार ने पर्यटन स्थल दर्जा दे दिया। हेडगेवार स्मृति मंदिर को पर्यटन स्थल का दर्जा देने का मतलब है कि अब इस इमारत का रखरखाव, व्यवस्था, पुनर्निमाण सब कुछ सरकार के खजाने से किया जाएगा।

यहां सवाल यह है कि नागपुर के रेशमबाग इलाके में मौजूद 78 साल पुरानी इस इमारत में ऐसा क्या खास है कि इसे बीजेपी सरकार ने पर्यटन स्थल का दर्जा दिया ? जवाब है कि यह इमारत बीजेपी के पितृ संगठन आरएरएस के संस्थापक डॉ. केशवराम बलीराम हेडगेवार की यादों को समर्पित है। इस इमारत के परिसर में तीन ओर से खुले हुए एक मंदिर के नीचे हेडगेवार की आदमकद प्रतिमा लगाई गई है।

हालांकि बीजेपी सरकार के इस फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है। नागपुर के रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता मोहनिश जबलपुरे ने इस मामले में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद समेत महाराष्ट्र के मुख्य सचिव और नागपुर के पुलिस कमिश्नर को चिट्ठी लिखकर हेडगेवार समृति मंदिर से पर्यटन स्थल का दर्ज छीने जाने की मांग की है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान संघ की ऋणात्मक भूमिका का उल्लेख करते हुए जबलपुरे ने कहा कि समाज में नफरत का बीज बोने वाले संघ से जुड़ी किसी भी इमारत को आखिर पर्यटन स्थल का दर्जा क्यों दिया गया?

 बीजेपी सरकार का दोहरा चरित्र: लाल किला निजी हाथों में, लेकिन हेडगेवार स्मृति को दिया पर्यटन स्थल का दर्जा

मोहनिश का दावा है कि हेडगेवार स्मृति मंदिर को पर्यटन स्थल का दर्जा इसलिए दिया गया क्योंकि बीजेपी की सरकार आने वाली पीढ़ियों को गलत इतिहास पढ़ाना चाहती है।

नवजीन से बातचीत में जबलपुरे ने कहा, “जब सारा देश आजादी की लड़ाई लड़ रहा था तब हेडगेवार ने समाज में जातिवाद का बीज बोया। आरएसएस की विचारधार हर धर्म का अपमान करने की रही है, फिर चाहे वो सिख धर्म हो, इस्लाम हो या फिर ईसाइयत।”

थोड़ी पड़ताल के बाद यह पता चला है कि हेडगेवार स्मृति मंदिर को पर्यटन स्थल का दर्जा देने का प्रस्ताव महाराष्ट्र पर्यटन विकास कॉर्पोरेशन (एमटीडीसी) की ओर से किया गया था, जिसे जिला योजना समिति (डीपीसी) ने तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया।

नागपुर के ही रहने वाले वकील सतीश उइके का कहना है कि स्मृति मंदिर को पर्यटन स्थल का दर्जा मिलने के बाद सरकारी खजाने से इसका विकास करने का रास्ता साफ हो गया है। अब न केवल बीजेपी के कब्जे वाला नागपुर नगर निगम (एनएमसी) बल्कि राज्य की बीजेपी सरकार और केंद्र से भी इसके विकास लिए पैसा भेजा जाएगा।

नवजीवन से बातचीत में उइके ने कहा,“जनता के टैक्स के पैसे से इसका रखरखाव किया जाएगा, कर्मचारियों को सैलरी दी जाएगी, जबकि यहां बीजेपी और आरएसएस के नेताओं के अलावा कोई नहीं आता।”

गौरतलब है कि हेडगेवार स्मृति मंदिर को पर्यटन स्थल का दर्जा देने से पहले एमटीडीसी ने दावा किया था कि इस मंदिर को देखने के लिए बड़ी तादाद में आम लोग आते हैं। खासतौर पर विजयदशमी के दौरान लाखों की संख्या में लोग यहां जमा होते हैं। हालांकि उइके और जबलपुरे का दावा है कि पर्यटक स्थल का दर्जा देने के लिए यह तर्क काफी नहीं है।

नागपुर की स्थानीय मीडिया ने दावा किया है कि एनएमसी ने स्मृति भवन और आरएसएस से ही जुड़े बाला साहेब देवरस की यादों को समर्पित बाला साहेब देवरस पथ त्रिवेणी स्मारक के विकास के लिए 3 करोड़ का बजट तय किया है। इस राशि में से 1.7 करोड़ सिर्फ और सिर्फ हेडगेवार स्मृति मंदिर के विकास के लिए खर्च किया जाएगा।

हेडगेवार स्मृति मंदिर को पर्यटन स्थल का दर्जा दिए जाने की मांग सबसे पहले नागपुर बीजेपी के उपाध्यक्ष भूषण दाडवे ने 2015 में की थी। इसके बाद ही एमटीडीसी ने एक प्रस्वात तैयार किया और उसे जिला विकास समिति के पास अनुमोदन के लिए भेजा।

जबलपुरे के मुताबिक, नागपुर के कलेक्टर सचिन कुरवे ने अतिरिक्त रुचि लेते इसे लेकर जल्द से जल्द फैसला किया। जबलपुरे के मुताबिक, कुरवे के बीजेपी और आरएसएस से गहरे ताल्लुकात हैं। आरएसएस की सिफारिश पर ही कुरवे को उनके गृह जिले नागपुर में स्थानांतरित किया था, जबकि गृह जिले में किसी आईएएस की तैनाती कम ही जाती है।

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Published: 08 May 2018, 7:03 PM
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