बीजेपी शासित एमसीडी नहीं दे रही कर्मचारियों को सैलरी, 'आप' ने की इस्तीफे की मांग

आम आदमी पार्टी ने एमसीडी के अंतर्गत आने वाले डॉक्टर्स, टीचर्स और अन्य कर्मचारियों की परेशानियों को लेकर फिर से बीजेपी पर निशाना साधा।

फोटो: सोशल मीडिया
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आईएएनएस

आम आदमी पार्टी ने एमसीडी के अंतर्गत आने वाले डॉक्टर्स, टीचर्स और अन्य कर्मचारियों की परेशानियों को लेकर फिर से बीजेपी पर निशाना साधा। आप के वरिष्ठ नेता दुर्गेश पाठक ने कहा कि "भारतीय जनता पार्टी शासित एमसीडी एक सप्ताह के अंदर अपने सभी कर्मचारियों की सैलरी जारी करे, अन्यथा भाजपा एमसीडी से इस्तीफा दे, उसे एमसीडी की सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है"। दुर्गेश पाठक ने चुनौती देते हुए भाजपा को कहा कि "मात्र 1 साल के लिए नगर निगम का कार्यभार आम आदमी पार्टी को सौंप दें, हम इतने ही बजट में इसी व्यवस्था के साथ 1 साल के भीतर दिल्ली को देश का सबसे स्वच्छ शहर भी बना कर दिखाएंगे और निगम के अधीन आने वाले हर एक कर्मचारी का वेतन भी देंगे"।

उन्होंने आगे कहा, "एमसीडी का 18 हजार करोड़ रुपये का सालाना बजट होता है, इसका 20 प्रतिशत बजट भी इमानदारी से खर्च किया होता, तो आज किसी भी कर्मचारी की सैलरी नहीं रूकी होती। यह सारा बजट भाजपा के पार्षद और उसके नेता खा जाते हैं। हर दिन भाजपा शासित नगर निगम के किसी न किसी विभाग का कोई न कोई ऐसा कर्मचारी मिल जाएगा, जो अपने वेतन को लेकर या तो धरना कर रहा होता है या धरने पर बैठने की चेतावनी दे रहा होता है या फिर आमरण अनशन की चेतावनी दे रहा होता है"।


"आज ही हिंदूराव अस्पताल की एक नर्स ने भाजपा शासित नगर निगम के मेयर साहब को अपने वेतन को लेकर एक बेहद ही मार्मिक एवं दर्द भरा पत्र लिखा है। इसी प्रकार कस्तूरबा गांधी अस्पताल के डॉक्टरों ने पत्र लिखकर भाजपा शासित नगर निगम को बड़े स्तर पर त्यागपत्र देने की चेतावनी दी है। पत्र में डॉक्टर ने लिखा है कि अगर जल्द ही उनका वेतन नहीं दिया गया, तो पूरा का पूरा विभाग एक साथ त्यागपत्र दे देगा। यूनिवर्सिटी के लगभग 1500 शिक्षकों एवं कर्मचारियों को कई महीने से वेतन नहीं मिला है। भाजपा शासित नगर निगम के अधीन काम करने वाले इंजीनियरों ने कहा कि अगर जल्द से जल्द उनका वेतन नहीं दिया गया, तो वे सभी हड़ताल करेंगे। निगम के अधीन आने वाले स्कूलों के लगभग 8000 अध्यापक 16 अगस्त से भाजपा शासित नगर निगम को हड़ताल पर जाने की चेतावनी दे रहे हैं"।

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